जनवाणी संवाददाता |
दाहा: दाहा गांव में की किसान चिंतन पर रालोद की एक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में तीन कृषि विधेयकों की आलोचना करते हुए केन्द्र सरकार पर भड़ास निकाली। वक्ताओं ने कहा कि कृषि विधेयक पूंजीपतियों को और अमीर बनाने व किसानों को और गरीब बनाने के लिए संसद में रखे गए हैं। जबकि किसी देश का किसान जितना अधिक संपन्न होगा। वह देश उतना ही अधिक मजबूत होगा।
रविवार को दाहा में रालोद की ओर से आयोजित इस बैठक में की अध्यक्षता करते हुए रालोद के जिलाध्यक्ष सुखवीर सिंह गठीना ने कहा कि केन्द्र सरकार किसानों को आर्थिक रूप से कमजोर करने पर तुली हुई है। जबकि कोरोना काल में कृषि ही ऐसा व्यवसाय रहा है। जिससे देश की आर्थिक गतिविधि चलती रही।
उन्होंने कहा कि चौधरी चरण सिंह व चौधरी अजित सिंह ने सदा खेत व किसान की बात की। युवा रालोद जिलाध्यक्ष प्रमेन्द्र तोमर ने कृषि अध्यादेशों का विरोध करते हुए कहा कि यदि यह कानून बन गए तो किसानों की आत्महत्याओं की दर रुकने वाली नहीं है।
किसान नेता मुनेश बरवाला ने कहा कि यदि किसानों ने एकजुट होकर इन विधेयकों का विरोध नहीं किया तो एक दिन किसान कंपनियों के मजदूर बनकर रह जाएंगे। बैठक का संचालन करते हुए आनंद छिल्लर ने कहा कि रालोद किसानों के हित में कदम उठाएगा। रालोद के युवा नेता विश्वाश चौधरी ने कहा की यह सरकार किसान विरोधी है।
किसानों के खिलाफ इस काले कानून से बेरोजगारी बढ़ेगी और किसान बर्बाद हो जाएगा। रालोद के कर्मठ कार्यकर्ता पूर्व प्रमुख सतेंद्र मलिक ने कहा कि भाजपानीत सरकार की कथनी-करनी में बहुत फर्क है। एक ओर विधेयक में एमएसपी समाप्त किए जाने की बात है।
प्रधानमंत्री घोषणा करते हैं कि एमएसपी बरकरार रहेगा। ये कहते कुछ हैं ओर करते कुछ हैं। पूर्व विधायक वीरपाल राठी ने कहा कि किसानों के पूर्व के गन्ना भुगतान को नहीं दिया। दूसरा गन्ना सीजन शुरु होने वाला है। पहले का भुगतान नहीं कराया गया। सभी किसानों को एकजुट होकर अपनी लडाई सरकार के खिलाफ लड़नी होगी।
इस मौके पर संजीव मान, मोहित मुखिया, कृष्णपाल प्रधान मुलसम, गुल्लू राणा, विनोद राणा, नरेश ठेकेदार, देवेन्द्र सिंह, राजू तोमर प्रधान सिरसली, देवपाल राणा, धर्मपाल राणा, विकास राणा आदि मौजूद रहे।

