- आलू और गोभी समेत कई फसलों की चल रही बुवाई, उर्वरक की कालाबाजारी पर कृषि विभाग भी अलर्ट
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: सर्दियों का सीजन शुरू हो गया है। अक्टूबर माह में आलू, फूलगोभी, गाजर, टमाटर, मटर समेत कई फसलों की बुवाई शुरू हो जाती है। इन फसलों की बुवाई के दौरान खाद की आवश्यकता होती है, लेकिन इनका स्टॉक होने के कारण किसानों को फसलों की बुवाई में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उधर, कीटनाशक दवाइयों पर जीएसटी लगने से किसान पहले ही परेशान हैं और अब खाद की कालाबाजारी की आशंका के चलते परेशानी और भी बढ़ गई है।
कोरोना के बाद से व्यापारी से लेकर किसान तक नुकसान झेलता आया है। सभी चीजें तेजी से महंगी हुई हैं। चाहे वह पेट्रोल-डीजल के दाम हों या गैस सिलेंडर के दाम। इसके अलावा खाद्य पदार्थों के दामों में भी तेजी से वृद्धि हुई है। इसका असर हर किसी पर पड़ा है। आम आदमी की जहां रसोई पर फर्क पड़ा है तो किसान भी इससे अछूता नहीं रहा है।
किसान को अब अपने खेतों में एक अच्छी फसल तैयार करने में लाखों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। इसके बाद जब वह फसल तैयार हो जाती है तो उसकी बिक्री सही जगह पर न हो पाने के कारण उसे फसल के अच्छे दाम तक नहीं मिल पाते हैं। जिस कारण आज किसान के हालात अच्छे नहीं है। किसानों की इन्हीं समस्याओं को लेकर भारतीय किसान यूनियन भी दिल्ली के बॉर्डर पर धरने पर बैठे हैं, लेकिन केन्द्र सरकार के कानों में जूं तक नहीं रेंगी है।
यूरिया और डीएपी की उपलब्धता नहीं आसान
अब वर्तमान समय की बात करें तो किसान आलू और सरसों की बुवाई कर चुका है और इसके साथ ही पत्ता गोभी, फूल गोभी, मरटर, मूली, पालक, पत्ता गोभी, धनिया, आलू, सौंफ के बीज, गाजर, शलगम आदि की खेती की बुवाई की तैयारी की जा रही है। इन फसलों की खेती के लिये किसानों को कई तरह के कीटनाशकों की आवश्यकता होती है, लेकिन पिछले कई माह से कीटनाशकों पर भी जीएसटी लगाई जा रही है।
कीटनाशक दवाओं पर 18 प्रतिशत तक की जीएसटी लग रही है और ऊपर से फसलों के सीजन को लेकर दवा विक्रेता भी कीटनाशकों को स्टॉक करने में लगे हैं। जिससे किसानों की समस्या बढ़ती जा रही है। यूरिया और डीएपी की कालाबाजारी की आशंका यहां जताई जा रही है। प्रदेश सरकार भी इस पर सख्ती से कार्य कर रही है, लेकिन यहां किसानों को इसकी वजह से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यूरिया, डीएपी और एनपीए उर्वरक की उपलब्धता न होने के कारण किसान परेशान हैं।
उर्वरक विक्रेताओं के यहां कृषि विभाग का छापा
अपर मुख्य सचिव कृषि के निर्देर्शों पर कृषि विभाग की ओर से गुरुवार को उर्वरक व्यवसाइयों के यहां छापेमारी की गई। इस दौरान विभाग की ओर से 22 नमूने लिए गए जो जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं। प्रयोगशाला से परिणाम आने के बाद संबंधित विके्रताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
इस मौके पर कृषि विभाग के अधिकारियो ने किसानों को कालाबाजारी संबंधित शिकायत दर्ज कराने के विषय में जानकारी दी गई। जिला कृषि अधिकारी प्रमोद सिरोही ने बताया कि गुरुवार को मेरठ की तीनों तहसील क्षेत्रों में उर्वरक व्यवसाइयों, रैंक प्वाइंट, थोक विक्रेताओं समेत खुदरा विके्रताओं आदि के यहां छापामारी की गई। इस दौरान उर्वरक से संबंधित 22 नमूने लिए गए। जिन्हें परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजा गया।
कृषि अधिकारी ने बताया कि जनपद में कहीं भी अधिक दर पर विक्रय या कालाबाजारी नहीं पाई गई है, लेकिन किसानों को डीएपी, एनपीके फॉस्फेटिक उर्वरक की कालाबाजारी से संबंधित कोई शिकायत है तो वह 0121-2655881 पर शिकायत कर सकते हैं। साथ ही उर्वरक खरीदते समय अपना आधार कार्ड अवश्य साथ लाए व पीओएस मशीन पर अंगूठा लगाकर उर्वरक लें और जांच लें कि जितना आपने लिया है उतना आपके नाम है।
इस मौके पर अधिकारियों विक्रेताओं के यहां जो स्टॉक मिला विभाग ने उसको भी दर्ज किया। इस दौरान उप जिलाधिकारी, सहायक आयुक्त, सहायक निबंधक आयुक्त, जिला गन्ना अधिकारी समेत तमाम अधिकारी टीम में मौजूद थे।

