जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत बन रहे उप राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के सरकारी आवास की जमीन को वहां से हटाकर दूसरी जगह बनाने वाली याचिका को खारिज कर दिया है।
जिस जमीन को चुनौती दी गई थी वहां सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का नया आधिकारिक आवास बन रहा है। अदालत ने कहा कि चीजों की आलोचना होनी चाहिए, लेकिन वह रचनात्मक हो। किसी भी चीज पर विरोध करना सही नहीं है।
न्यायाधीश एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वहां निजी संपत्ति नहीं बनाई जा रही है, जिससे किसी को कोई परेशानी हो। वहां उपराष्ट्रपति और पीएम का आवास बनाया जा रहा है।
चारों ओर हरियाली रहेगी। दरअसल, याचिका में दावा किया गया था कि सेंट्रल विस्टा के जरिए इस क्षेत्र में आम लोगों की आवाजाही कम हो जाएगी।
जिसपर कोर्ट ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि क्या अब आम आदमी से पूछकर उपराष्ट्रपति और पीएम का सरकारी आवास बनाना चाहिए।
याचिका में मांग की गई थी कि उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के लिए बन रहे आवास की जगह को बदल दिया जाए। सेंट्रल विस्टा परियोजना को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई हैं।
याचिकाओं में इस परियोजना के लिए पर्यावरण मंजूरी दिए जाने और इसके लिए भूमि उपयोग में बदलाव समेत अनेक बिंदुओं पर सवाल उठाए गए हैं।

