जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन की रफ्तार अब देश में भी तेजी से बढ़ रही है। इसको लेकर चिकित्सकों का अध्ययन भी जारी है। महाराष्ट्र में इस वायरस के कई केस सामने आए हैं। वहीं, दूसरा वैरिएंट भी महाराष्ट्र में अधिक फैला था। नए वैरिएंट को लेकर हो रहे अध्ययन में अब एक और बात सामने आ रही है। कोरोना का नया वैरिएंट ओमिक्रॉन पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा खतरा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ओमिक्रॉन में व्यक्ति को संक्रमित करने की क्षमता ज्यादा है। वहीं, ओमिक्रॉन वैरिएंट डेल्टा से ज्यादा खतरनाक हो सकता है। नया वैरिएंट ओमिक्रॉन इम्यून सिस्टम पर भारी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि आरटीपीसीआर टेस्ट में सिर्फ यह पता चलता है कि कोई व्यक्ति कोरोना संक्रमित है या नहीं। इससे वैरिएंट का पता नहीं चल पाता। चिकित्सकों का कहना है कि ऐसे में जीनोम सिक्वेंसिंग स्टडी जरूरी हो जाती है, लेकिन अभी संक्रमित सैंपल को जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए नहीं भेजा जा सकता है।
यह प्रक्रिया धीमी, जटिल, और महंगी होती है। आरटीपीसीआर टेस्ट से शरीर में वायरस की मौजूदगी का पता चलता है। मेडिकल कालेज के माइक्रोबॉयोलाजी विभागाध्यक्ष डा. अमित गर्ग ने बताया कि सार्वजनिक और निजी लैब में किए जाने वाले ज्यादातर टेस्ट में सार्स कोव-2 संक्रमण का पता लगाया जा सकता है, लेकिन यह पता नहीं लगाया जा सकता है कि संक्रमित व्यक्ति वायरस के किस वैरिएंट से संक्रमित है। यह टेस्ट वायरस के उस हिस्से को तलाशते हैं, जिनमें ज्यादा बदलाव नहीं होता है। वैरिएंट को म्यूटेशन में अंतर के आधार पर तय किया जाता है।

