Sunday, January 23, 2022
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देदवा गांव: प्रशासन की नहीं टूटी कुंभकर्णी नींद

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  • जहरीले पानी के सेवन से ग्रामीण हो रहे बीमार

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ/लावड़: जिले में बहने वाली काली नदी में इन दिनों बेशक पानी है, लेकिन जल स्त्रोतों को इसका साफ पानी नहीं मिल पा रहा। इसकी वजह यह है कि पानी प्रदूषित हो चुका है। किसान इस पानी से खेतों की सिंचाई करने से कतराते हैं। जब इस नदी में पानी कम हो जाता है तो जगह-जगह कीचड़ दिखाई देता है। किसान काफी समय से इसके उद्धार की मांग उठा रहे हैं। प्रदूषण के कारण नदी का पानी जहरीला हो गया है।

देदवा गांव में काली नदी का पानी ग्रामीणों के लिए काल बना हुआ है। ग्रामीणों की यह समस्या लोगों को मौत की दहलीज पर पहुंचा रही है, लेकिन प्रशासन की कुंभकर्णी नींद नही खुल रही है। एक के बाद एक यहां पानी का सेवन करने से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का प्रकोप फैला हुआ है, लेकिन उसके बाद भी इस समस्या से छुटकारा दिलाने के लिए कोई कदम अभी तक नहीं उठाया गया है। ग्रामीण अपनी परेशानी को जहां शासन सरकार में बया कर चुके हैं। वहीं, जनप्रतिनिधियों को भी अपना दुखड़ा सुना चुके हैं, लेकिन उसके बाद भी अभी तक इस और किसी का ध्यान नहीं है।

प्रदूषण विभाग कई बार यहां नमूने ले जा चुक ा है, लेकिन नमूने ले जाने तक तो कार्रवाई हो जाती है। उसके बाद कार्रवाई का कोई अता-पता नही रहता है। अब देखना है कि इस गांव की समस्या को कैसे दूर किया जा सकता है। नदी के पानी की जब जांच की गई तो इसमें भारी मात्रा में कांच मग्नीज व लोहा जैसे भारी तत्व व प्रतिबंधित कीटनाशक मिले। इस नदी के पानी में आॅक्सीजन की मात्रा अधिक नहीं बची।

नदी का आकार कई जगह काफी सिकुड़ चुका है। नदी के पानी में इतना प्रदूषण है कि हाथ में लेने पर हथेली की रेखाएं नहीं दिखतीं। काली नदी अब बीमारियां बांट रही है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस नदी का पानी नालों की वजह से प्रदूषित हुआ है। नदी के आसपास के गांवों के नालों का पानी इसी नदी में गिरता है, जिसकी वजह से उसमें कीचड़ घुल चुका है। लिहाजा नदी का पानी काला हो गया है। कहीं-कहीं यह पानी अन्य नदियों के जल की अपेक्षा कुछ गाढ़ा भी है।

काली नदी के सफाई के प्रयास सिर्फ कागजों पर

काली नदी का पानी अगर साफ हो जाए तो किसानों की खेती को जीवनदान मिल सकता है। नदी का पानी प्रदूषित होने के कारण पानी इस पानी से सिंचाई करने से कतराते हैं, क्योंकि फसलों में रोग लग जाता है और वे नष्ट हो जाती हैं। सिंचाई विभाग ने सफाई की योजना पर माथापच्ची भी शुरू की, लेकिन बाद में आगे कोई काम नहीं हुआ।

आज भी नदी गंदी है। जिस समय पानी बढ़ जाता है, उस वक्त नदी के पानी रंग काले से कुछ हल्का हो जाता है, लेकिन जब पानी कम होता है, तब अपने नाम के अनुरूप इस नदी का जल काला ही दिखता है। वह और एक गंदे नाले के रूप में नजर आती है।

गांव के पानी का सैंपल बेहद खराब

देदवा गांव में पानी के सैंपल लेने के लिए टीम कई बार गई। वहां के सैंपल भी लाए गए। हालांकि पानी का सैंपल खराब है, लेकिन इसके लिए शासन स्तर से ही सिस्टम बने। उसके बाद ही इस गांव की समस्या का समाधान हो सकता है।

ग्रामीणों की समस्या हो दूर

गांव में पानी का सेवन ग्रामीणों को कैंसर की जानलेवा बीमारी की चपेट में ले रहा है। क्योंकि इस गांव में पानी बेहद खराब हो गया है। इस और सरकार को ध्यान देना चाहिए। ग्रामीणों की समस्या को दूर करना चाहिए।
-अनुपमा, पत्नी सुनील सिंह, ग्राम प्रधान देदवा

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