Friday, May 1, 2026
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तीन साल बाद भी तीन ट्रक गेहूं की काला बाजारी मामले में नहीं आयी रिपोर्ट

  • आरोपी, माल की ढुलाई करने वाले वाहन व खाद्यान्न रिलीज, जांच अधिकारी की भूमिका पर संदेह

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: गंगानगर चौकी के समीप सितंबर 2017 में काला बाजारी के लिए तीन ट्रकों में भर कर ले जाए जा रहे चावल गेहूं पकडे गए थे, लेकिन तीन साल बाद भी कार्रवाई अंजाम तक नहीं पहुंच सकी। इस मामले को लेकर अब एक शिकायत सीएम योगी आदित्यनाथ को भेजी गई है। सीएम को इस मामले से अवगत कराने का प्रयास किया जाएगा।

इस मामले की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। सबसे हैरानी भरा खुलासा को उन ट्रकों को लेकर हुआ है जिनसे यह माल भेजा जा रहा था। ट्रक संख्या एचआर-55एच-1535 इसमें 145 बोरे गेहूं पकड़ा गया। जब इसकी पड़ताल की गई तो पता चला कि ये सुधा के नाम से आरटीओ गुड़गांव में रजिस्टर्ड है।

इस नंबर का रजिस्टेÑशन 20 मई 2008 को मारुति सुजुकी वैगनार एलएक्स आई के नाम पर है। ट्रक संख्या पीबी-29-एच-9404- जिससे 200 बोरे चावल पकड़ा गया था वह नंबर पूरे भारत में किसी भी आरटीओ के यहां रजिस्टर्ड नहीं हैं। तीसरा ट्रक पीबी-29एल-9147 जिससे 200 बोरे चावल पकड़ा गया था वह नंबर बलजीत सिह के नाम रजिस्टर्ड है।

फरीदकोट पंजाब में 25 फरवरी 2011 को इस अशोक लीलेड का रजिस्ट्रेशन हुआ है। इससे साफ है कि पकडे जाने पर किसी भी संभावित कार्रवाई से बचने के लिए फर्जी नंबर प्लेट लगाकर खाद्यान काला बाजारी की जाती थी।

पुलिस को दिया झूठा शपथपत्र काला बाजारी की थाना गंगानगर में एफआईआर के बाद खुद की फंसी गर्दन निकालने के लिए इस मामले में झूठे शपथ पत्र तक दाखिल किए गए। एक राशन डीलर फरीद अली की ओर से पुलिस के जांच अधिकारी को जो शपथ पत्र दिया गया उसमें कहा गया कि उक्त खाद्यान्न उसकी दुकान का है। बाद में राशन डीलर ने उक्त शपथ पत्र भी वापस ले लिया। उसका कहना था कि आरएफसी के अफसरों ने ही उससे झूठा शपथ पत्र दबाव डाल कर दिलवाया था।

पुलिस की भूमिका पर सवाल

इस मामले में जांच कर रहे पुलिस के अधिकारी की भूमिका पर भी सवाल हैं। तीन साल बीतने को आए, लेकिन जांच किसी नतीजे तक नहीं पहुंचायी जा सकी। सुनने में आया है कि इस मामले में एफआर की तैयारी कर ली गई थी। सुनना यह भी जाता है कि करीब डेढ़ लाख में सौदा भी तय हो गया था, लेकिन सीक्रेट लीक हो गया। जिसके चलते पांव पीछे खींचने पड़ गए। इस पूरे मामले में तमाम अफसरों की भूमिका पर भी सवाल हैं।

ये था पूरा मामला

17 अगस्त 2017 को तत्कालीन मंडलायुक्त प्रभात कुमार के निर्देश पर मवाना रोड गंगानगर पुलिस चौकी के समीप घेराबंदी कर तीन ट्रकों से ले जाए जा रहे गेहूं व चावल पकडेÞ गए थे। यह माल आरएफसी के रजपुरा ब्लॉक खाद्य गोदाम केंद्र मेरठ तृतीय से लाया रहा था।

इन्होंने मारा छापा

मंडलायुक्त के निर्देश पर छापे मारे करने पहुंचने वाले आरएफसी अफसरों में खुद तत्कालीन आरएफसी पंकज चतुर्वेदी, संभागीय खाद्य वितरण अधिकारी दिनेश चंद मिश्रा, जिला खाद्य वितरण अधिकारी प्रवीण प्रकाश श्रीवास्तव व जिला खाद्य विपणन अधिकारी बागपत अजीत प्रताप सिंह भी शामिल रहे। बागपत के जिला खाद्य वितरण अधिकारी को शामिल करने के पीछे का मकसद ताकि पादर्शिता बनी रहे। मामले की जांच तत्कालीन डीसी फूड अनिल कुमार दूबे को सौंपी गई।

इनके खिलाफ की गई एफआरआर

गेहूं की काला बाजारी मामले में जिनके खिलाफ एफआईआर की गई। उनमें गोदाम प्रभारी राहुल गौड़ व चपरासी हिमांशु शामिल थे। डीसी फूड की जांच में जिनकी भूमिका पर सवाल खडेÞ किए गए उनमें तत्कालीन आरएफसी पंकज चतुर्वेदी, संभागीय खाद्य वितरण अधिकारी दिनेश चंद मिश्र, जिला खाद्य वितरण अधिकारी पीके श्रीवास्तव शामिल रहे।

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