Tuesday, April 7, 2026
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झूठी सरकार को वोट की चोट से सजा दें: राकेश टिकैत

  • संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा-जनता विकास चाहती है, हिंदू-मुस्लिम का मैच नहीं
  • किसान नेता बोले, वेस्ट यूपी को हिंदू-मुस्लिम स्टेडियम बनाने वालों का सपना नहीं होने दें पूरा
  • मेरठ की क्रांतिधरा से किसान मोर्चा के सरकार को सजा दो आंदोलन की शुरुआत

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: संयुक्त किसान मोर्चा के फायर ब्रांड नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि जनता चुनाव में झूठी सरकार को वोट की चोट से सजा देने का काम करे। राज्य में विकास और खुशहाली जनता चाहती है, मगर भाजपा वालों के वेस्ट यूपी में फिर से हिंदू-मुसलमान और जिन्ना का मैच खेलने के मंसूबे हैं। इनसे सावधान रहें। इसके लिए मुजफफरनगर को फिर से स्टेडियम बनाने का प्रयास हो रहा है। यहां का मतदाता इस बार इनको जातिवाद और साम्प्रदायिकता का मैच न खेलने दे।

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रविवार को संयुक्त किसान मोर्चा ने सरकार को सजा दो आंदोलन की शुरुआत मेरठ से की। इस दौरान किसान नेताओं ने चैपल स्ट्रीट में पत्रकार वार्ता को संबोधित किया। राकेश टिकैत ने भाजपा पर बड़ा हमला बोला और कहा कि बीजेपी वालों की वेशभूषा तो पुजारी वाली है, मगर यह बलि वाले हैं।

इनसे सावधान रहने की जरूरत है। किसानों से किया एक भी वादा केन्द्र और राज्य सरकार ने पूरा नहीं किया है। 48 हजार किसानों पर आंदोलन के दौरान केस दर्ज किए गए हैं, मगर उनमें से एक किसान के ऊपर से वादे के बावजूद भी केन्द्र या राज्य सरकार ने मुकदमा वापस नहीं लिया है। उन्होंने कहा कि, एमएसपी गारंटी कानून के लिए न कमेटी बनाई गई है और न बिजली के रेट घटाने के वादे को सरकार ने पूरा किया गया।

लेबर एक्ट में बदलाव बता रहा है कि सरकार अपने चंद पंूजीपति मित्रों के लिए देश को मजदूर कालोनी बनाना चाहती है। बिहार और उत्तराखंड से बड़े पैमाने पर पलायान हो रहा है, मगर भाजपा कैराना के झूठे पलायान का नारा देकर वोट की फिर फसल काटना चाहती है।

किसान नेता हन्नान मोल्ला व योगेंद्र यादव ने कहा है कि यह समय जनता विरोधी सरकार को हराने का है। इस चुनाव में जनता भाजपा को वोट की चोट से सजा देने का काम करेगी। वार्ता के दौरान प्रदेश संयोजक पुष्पेंद्र कुमार व मीडिया प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक मौजूद रहे।

एमएसपी में बड़ा घोटाला, व्यापारी मित्रों को भुगतान

किसान नेताओं ने भाजपा के खिलाफ हुंकार भरते हुए कहा है कि एमएसपी में बड़ा घोटाला है। किसानों को फसल के दाम की गारंटी देने के बजाय सरकार अपने व्यापारी मित्रों का भुगतान कर रही है। किसान नेताओं ने कहा कि जो मतदाता वोट मांगने आए जनता उनसे पांच साल में कराए गए विकास कार्यों का हिसाब मांगे। देश का युवा बेरोजगार हो रहा है चुनाव बाद वह भी आंदोलन में खड़ा होगा। संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने योगी सरकार के वादों पर एक किताब का विमोचन भी किया।

सत्ता के लिए समाज को बांट रही भाजपा

संयुक्त किसान मोर्चा ने भाजपा पर आरोप लगाए थे वह सत्ता पाने के लिए देश में समाज को बांटने का काम कर रही है। बिहार में लालू और यूपी में मुलायम परिवार को तोड़ने का काम भाजपा ने किया है। गुजरात में पटेल बनाम नॉन पटेल, हरियाणा में जाट बनाम नॉन जाट, महाराष्ट्र में मराठा बनाम नॉन मराठा के नाम पर जनता को लड़ा कर वोट लेने का काम किया गया है।

दो घंटे की कमेटी दो माह में नहीं बनी: योगेंद्र यादव

संयुक्त किसान मोर्चा के योगेन्द्र यादव ने कहा कि केन्द्र सरकार एमएसपी गारंटी पर बातचीत के लिए दो घंटे में बनने वाली कमेटी को दो माह में भी नहीं बना पाई है। बड़े अफसोस की बात है कि बजट तो चुनाव के दौरान पेश हो सकता है, मगर कमेटी नहीं बन सकती है।

आरोप लगाया कि सरकार की नीयत में खोट है और वह किसानों के मुद्दों को केवल लॉलीपाप देकर उलझाए रखना चाहती है। शहीद किसानों को मुआवजा के बजाए सरकार की ओर से धोखा दिया जा रहा है। किसानों के लखीमपुर नरसंहार में एसआईटी ने गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी को षडयंत्रकारी माना है, मगर किसानों के हत्यारे मंत्री के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने मतदाताओं से अपील की है कि वह इस बार किसानों की हत्यारी सरकार को हराने के लिए वोट दें।

मोदी सरकार ने गद्दारी की, वादा नहीं निभाया: मोल्ला

देश के बड़े किसान नेता हन्नान मोल्ला ने कहा है कि मोदी सरकार ने अपना वायदा निभाने के बजाए किसानों से गद्दारी की है। संयुक्त किसान मोर्चा के 57 संगठनों ने निर्णय लिया है कि धोखा देने वाली सरकार हमारी दुश्मन है। चुनाव में सबक सिखाने के लिए जनता से भाजपा को सजा देने की अपील कर रहे हैं।

सातों चरण में एसकेएम प्रेसवार्ता कर भाजपा को हराने की अपील मतदाताओं से करेगा। देश के किसान की आय 21 हजार रुपये प्रतिमाह होनी चाहिए, मगर मात्र 6 हजार रुपये है। किसान को फसल का एमएसपी नहीं मिल रहा है। जबकि प्रदेश में बिजली के दाम देश में सबसे अधिक हैं। किसानों के हत्यारे अपराधी मंत्री की बर्खास्ती नहीं कर सरकार ने किसानों का अपमान किया है। इसका बदला वोट की चोट से जनता ले।

किसानों को 12 घंटे बिजली का आंदेश: मलिक

एसकेएम के मीडिया प्रवक्ता धर्मेन्द्र मलिक ने कहा कि यूपी में 24 घंटे बिजली देने का ढिंढोरा पिटने वाली सरकार ने किसानों को केवल 12 घंटे ही बिजली देने का आदेश दे रखा है। कोई थर्मल पावर प्लांट पांच साल में सरकार ने नहीं लगाया है। योगी सरकार की करनी और कथनी में बहुत बड़ा अंतर है। किसान दोहरी मार झेल रहा है। जहां मंडी में किसानों से फसल की लूट हो रही है, वहीं खेतों को आवारा पशु चर ले रहे हैं। 120 दिन के भीतर पूर्ण गन्ना भुगतान का वादा भी सरकार का झूठा निकला है, मगर एक रुपया ब्याज का किसान को सरकार ने नहीं दिया है।

एक बिरादरी को टॉरगेट कर रही भाजपा

राकेश टिकैत ने भाजपा पर आरोप लगया है कि वेस्ट यूपी में हिंदू-मुस्लिम मैच खेलने की प्लानिंग के साथ ही इस क्षेत्र में एक बिरादरी विशेष को टारगेट करके प्रचार किया जा रहा है। मुजफ्फरनगर को बदनाम करने के लिए गर्मी निकालाने की बात एक मुख्यमंत्री द्वारा की गई है। इस तरह की भाषा का इस्तेमाल किसी एक बिरादरी या वर्ग के लिए किसी संत या सूबे के सीएम का करना उचित नहीं है। वह सब के सीएम है अकेले भाजपा के नहीं।

क्या क्रांतिधरा से किसान की हुंकार डाल पाएगी चुनाव पर असर?

किसान नेताओं की क्रांतिधरा से हुंकार भरने के साथ ही सियासी हलकों में चुनाव को लेकर चर्चा तेज हो गई है। राजनीति के जानकार इस बात पर मंथन कर रहे है कि क्या किसानों का सरकार को सजा दो आंदोलन भाजपा के चुनाव पर असर डालेगा? भाजपा इस आंदोलन की काट के लिए अब कौन से हथियार का चुनाव में जीत के लिए इस्तेमाल करेगी? प्रचार के अगले दो दिन चुनावी सियासत इसी के इर्द-गिर्द घूमती दिखाई दे सकती है।

मगर, इसके इतर संयुक्त किसान मोर्चा मेरठ से वेस्ट यूपी को एक बड़ा चुनावी संदेश देना चाहता है। राजनैतिक तौर पर भी मेरठ पश्चिम की राजधानी मानी जाती है। किसानों ने क्रांतिकारियों की इस जमीन को अपनी नई क्रांति के आगाज को इसीलिए चुना है। क्योंकि इस जमीन से बजे बिगुल का डंका पूरे देश और दुनिया में गूंजता रहा है।

यही वजह है कि किसान भी भाजपा के खिलाफ यहां से वोट की चोट देकर मोदी और योगी सरकार को सबक सिखाने की पटकथा लिख रहे है। हालांकि उनका यह आंदोलन का प्लान कितना कारगर होगा। यह तो चुनाव का परिणाम ही बताएगा, मगर फिलहाल किसानों की हुंकार ने भाजपा को अपनी चुनावी रणनीति को बदले पर मजबूर जरुर कर दिया है।

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