- दहेज हत्या की लंबी कानूनी लड़ाई में पति और बेटे की हो चुकी मौत
- मां ने अदालतों के काटे चक्कर, बहू की हत्या नहीं बीमारी से हुई थी मौत
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: किसी की जिंदगी में इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा कि बेटे की ससुराल वालों ने फर्जी तरीके से दहेज हत्या का मुकदमा 33 साल पहले लिखवा दिया। इस लंबी कानूनी लड़ाई के दौरान बेटा और पति दुनिया छोड़कर चले गए। अकेली मां ने हिम्मत नहीं हारी और हत्या के कलंक को मिटाने के लिये अदालतों में तारीख पर तारीख पर चक्कर काटती रही।
आखिरकार शुक्रवार को अतिरिक्त जिला जज कोर्ट संख्या-14 वीरेंद्र सिंह द्वारा सन 1990 में रेलवे रोड थाना अंतर्गत दहेज हत्या के मुकदमे में 33 बरस लंबी चली सुनवाई में फैसला सुनाते हुए दहेज हत्या के आरोप से बाइज्ज्त बरी कर दिया गया।
एडवोकेट देवेन्द्र कुमार कश्यप ने बताया कि मुकदमा अपराध संख्या 128/1990 में मूलचंद (ससुर) उर्मिला (सास) तथा राजेश (पति) पर वर्ष 1990 में कल्पना (पुत्रवधू-पत्नी)की हत्या करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था। दौरान-ए-सुनवाई मूलचंद (ससुर) तथा राजेश (पति) की मृत्यु हो गई तथा उर्मिला (सास) द्वारा लगातार 33 वर्षों तक इंसाफ की लड़ाई मेरठ जिला न्यायालय में अपनी बेकसूरी साबित करने के लिए इस 32 वर्ष की लंबी लड़ाई लड़ी।

अधिवक्ता देवेंद्र कुमार ने बताया कि सभी गवाहन व सबूतों का सफल परीक्षण न्यायालय में करते हुए उर्मिला को न्याय दिलवाया तथा 33 वर्ष बाद बाइज्जत बरी करवाया। उर्मिला (सास) ने अदालत में नम आंखों से कहा गया कि उक्त मुकदमे ने उनका सब कुछ बर्बाद कर दिया है। इस न्यायिक लड़ाई में उनके पति तथा पुत्र को लील लिया है।
उर्मिला के परिवार वालो ने अपने अधिवक्ता का धन्यवाद किया और साथ ही कहा कि काश राजेश और उनके पिता मूलचन्द जिंदा होते या जीवित समय उन्हें यह खुशी मिलती तो वह लोग कितना खुश होते कि जिंदगी से यह एक बदनुमा दाग खत्म हो गया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अब उनकी आत्मा को भी शांति मिलेगी। उन्होंने इस लड़ाई में सारथी बनकर उनका साथ दिया।
पबरसा गांव के बवाल में बसपा और भाजपा नेता नामजद
मोदीपुरम: पबरसा गांव में दो बिरादरी में चल रहे विवाद में जातीय संघर्ष की आशंका को देखते हुए शुक्रवार को दौराला पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 37 लोगों को नामजद किया है। जबकि, 20-25 लोग अज्ञात में शामिल है। पबरसा गांव में लगभग एक सप्ताह पहले किसी बात को लेकर दो बिरादरी के लोगों में किसी बात को लेकर कहासुनी के बाद झगड़ा हो गया था। दो दिन बाद ही पल्लवपुरम में एक पक्ष ने छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए दूसरे पक्ष के लोगों के साथ मारपीट की थी। पुलिस ने दोनों पक्षों को थाने बुलाकर वार्ता की थी।
जिसके बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाते हुए तहरीर दी थी। बृहस्पतिवार देर रात एक बिरादरी के लोग बाहरी लोगों को बुलाकर पंचायत कर रहे थे। जिसके बाद दूसरी बिरादरी के लोगों ने पुलिस को सूचना दे दी। जिस पर पुलिस ने मौके पर पहुंच एक युवक को पकड़ लिया था। गांव में जातीय संघर्ष का तनाव देखते हुए पुलिस बल तैनात कर दिया गया था।
शुक्रवार को दौराला पुलिस ने कार्रवाई करते हुए इस मामले में अपनी ओर से मुकदमा दर्ज करते हुए 37 लोगों को नामजद किया और साथ में 20-25 लोगों को अज्ञात में शामिल किया। थाना प्रभारी संजय शर्मा का कहना है कि 37 लोगों को नामजद करते हुए मुकदमा दर्ज किया गया है। इस पूरे बवाल में पुलिस ने भाजपा और बसपा नेताओं के खिलाफ भी रिपोर्ट दर्ज की गई।
धोखाधड़ी से बेच दी इंटर कालेज के जमीन
हस्तिनापुर: थाना हस्तिनापुर क्षेत्र के दरियापुर गांव में स्थित इंटर कॉलेज को प्रबंध समिति के प्रबंधक और जीआईसी हस्तिनापुर में तैनात शिक्षक ने धोखाधड़ी से खरीद-फरोख्त कर हड़प लिया। समिति अध्यक्ष ने उक्त दोनों सहित नौ लोगों को नामजद करते हुए धोखाधड़ी व गबन की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है। हस्तिनापुर पुलिस मामले की गहन विवेचना में जुट गई है।
मामला दरियापुर गांव के स्व. प्रसंदी देवी इंटर कॉलेज का है। कॉलेज की प्रबंध समिति के अध्यक्ष तेग सिंह कराना निवासी प्रताप विहार गाजियाबाद ने बताया कि उक्त कॉलेज उनकी माता के नाम पर उनकी जमीन पर 1998 में बनाया गया था। जिसका प्रबंधक उसका भतीजा अशोक कुमार पुत्र स्व. महकार सिंह है। आरोप है कि उनके भतीजे ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर कॉलेज को कुछ लोगों को बेच दिया है। इसकी जानकारी जब उसने रजिस्ट्री कार्यालय से ली तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। कॉलेज के बैनामे में उनके नाम से फर्जी शपथ लगाकर धोखाधड़ी से कॉलेज की खरीद फरोख्त की गई है। आरोप है कि राजकीय इंटर कॉलेज में तैनात शिक्षक नंदलेश ने प्रबंधक से मिलकर अपने परिवार के लोगों के नाम पर कॉलेज खरीद लिया।
उन्होंने कॉलेज प्रबंधक अशोक कुमार, छिद्दा सिंह पुत्र हरपाल सिंह निवासी ग्राम पलड़ा, शिक्षक नंदलेश कुमार भाटी, नंदलेश के पुत्र अनंत भाटी, पुत्री नेहा भाटी, दीपा भड़ाना निवासी ग्राम पलड़ा, सुनीता व सीमा निवासी क्यू ब्लॉक हस्तिनापुर, मनोज कुमार पुत्र महेंद्र निवासी ग्राम अटौरा के खिलाफ धोखाधड़ी व गबन जैसी संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस के मुताबिक विवेचना में दोष सिद्ध होने के बाद गिरफ्तारी की जाएगी।
आरपार की लड़ाई लड़ेंगे ग्रामीण
मोदीपुरम: सिवाया गांव में बिल्डर द्वारा मुर्दा मवेशी गृह की बेसकीमती भूमि को कब्जाने के खिलाफ शुक्रवार को ग्रामीणों ने गांव के शिव मंदिर में पंचायत का आयोजन किया। जिसमें गांव की भूमि कब्जाने वाले भूमाफियाओं और सरकारी अधिकारियों के खिलाफ आरपार की लड़ाई का ऐलान किया। आयोजित पंचायत में ग्राम पंचायत सचिव ने बताया कि यह कब्जा उनके संज्ञान में नहीं था।
जबकि ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि जिला स्तरीय एक महिला अधिकारी ने वेदांता कुंज कालोनी में गांव की इस भूमि पर कब्जा देने के बदले आवासीय प्लाट लिया है। ग्रामीणों ने तय किया है कि सारा गांव मुर्दा मवेशी गृह पर पहुंचकर चारदीवारी कराएगा। इसके अलावा पंचायत में आगे की रणनीति तय की गई। सिवाया गांव की मुर्दा मवेशी गृह की बेसकीमती भूमि पर अजय गुप्ता नाम के बिल्डर ने कब्जा करके गेट लगा दिया था। गुरुवार को ग्रामीणों को पता चला तो उन्होंने एसडीएम सरधना पंकज राठौर को मौके पर बुलाया और गेट उखाड़ फेंका।

लेखपाल अनुज निगम ने बताया कि यह भूमि हमने नापकर ग्राम प्रधान किलेंदर और ग्राम सचिव अतुल चौधरी को सौंप दी थी बाद में यह अवैध कब्जा कैसे हुआ पता नहीं। ग्राम सचिव और प्रधान का कहना है कि यह कब्जा उनके संज्ञान में नहीं है। इस मामले में ग्रामीणों का कहना है कि महिला डीपीआरओ ने इस भूमि पर अवैध कब्जा कराने के बदले कालोनाइजर से वेदांता कुंज कालोनी में एक बेसकीमती प्लाट लिया है।
और सौंदर्यीकरण के नाम पर यह कब्जा कराया है। वहीं, इस मामले में गांववासियों को खामोश रहने को धमका रही है और फर्जी मुकदमे दर्ज कराने की धमकी देती है। अब इस मामले में गांव वालों ने शुक्रवार को गांव के शिव मंदिर में पंचायत रखी है। जिसमें आरपार की लड़ाई का ऐलान किया जाएगा। शुक्रवार को आयोजित पंचायत में प्रधान किलेंदर सिंह, राजकुमार पप्पन, कंवरपाल सिंह, योगेश विहान, सचिन विहान, पिंटू मास्टर, विपिन विहान, बिल्लू चौधरी, जितेंद्र प्रधान आदि मौजूद रहे।

