Sunday, May 10, 2026
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मेरठ में भ्रष्ट एक्सईएन सीएम योगी की मंशा को लगा रहा पलीता!, खुल गई पोलपट्टी

  • कॉलोनी का नहीं है मानचित्र स्वीकृत, फिर कैसे हो गया ऊर्जीकृत?
  • पर्दे के पीछे एक्सईएन और बिल्डर के बीच पार्टनरशिप की चर्चा

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जीरो टोलरेंस के दावों को ऊर्जा निगम के एक्सईएन प्रवीण कुमार पलीता लगा रहे हैं। कमिश्नर सुरेन्द्र सिंह के स्पष्ट आदेश है कि अवैध कॉलोनियों में विद्युतीकरण नहीं होना चाहिए। इसके लिए ऊर्जा निगम के एमडी को भी पत्र लिखा गया।

एमडीए के तत्कालीन वीसी मृदुल चौधरी ने भी पत्र लिखकर अवैध कॉलोनियों में विद्युतीकरण नहीं करने की बात कही थी, लेकिन ऊर्जा निगम में तो भ्रष्टाचार चरम पर हैं। जब बाढ़ ही खेत को खा रही है तो फिर हालत क्या हो गए? यह कहना मुश्किल होगा। कॉलोनी का मानचित्र स्वीकृत नहीं, फिर भी कॉलोनी को ऊर्जीकृत क्यों किया जा रहा हैं, यह बड़ा सवाल हैं।

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अवैध कॉलोनी में एक भी मकान बना हुआ नहीं है, अभी फिलहाल सड़क बनकर तैयार हुई है, तभी ऊर्जा निगम के एक्सईएन प्रवीण कुमार ने अवैध कॉलोनी को ऊर्जीकृत कर दिया और तीन ट्रांसफार्मर भी लगा दिए गए। चर्चा यह है कि पर्दे के पीछे से एक्सईएन प्रवीण कुमार और बिल्डर के बीच पार्टनरशिप है, तभी अवैध कॉलोनी में विद्युतीकरण कराया जा रहा है। बिना स्वीकृत मानचित्र के जहां पर मकान भी नहीं बने अवैध रूप से विद्युतीकरण करना एक्सईएन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।

सूत्रों का कहना है कि एक्सईएन ने अवैध कमाई का कुछ अंश बिल्डर के साथ लगाकर इंजीनियर बिल्डर बन गए हैं। रियल एस्टेट में एक्सईएन की विशेष रुचि रहती है। क्योंकि रियल एस्टेट में तमाम काली कमाई को बैनामी संपत्ति इकट्ठी कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि अवैध कमाई का कुछ अंश रियल एस्टेट में बिल्डरों के साथ लगा दिया है। एक तरह से बैनामी संपत्ति एक्सईएन इस तरह से खड़ी करते जा रहे हैं।

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एक कॉलोनी नहीं, बल्कि कई ऐसी कालोनियों को विद्युतीकरण कर दिया है, जिनका मेरठ विकास प्राधिकरण से मानचित्र स्वीकृत नहीं है। ऐसी कालोनियों में बिल्डर और एक्सईएन प्रवीण कुमार की सेटिंग से विद्युतीकरण किया जा रहा है। चर्चा है कि एक्सईएन अपनी काली कमाई को बिल्डर के साथ पार्टनरशिप में लगाकर बैनामी संपत्ति तैयार कर रहे हैं। यहां यह खूब चर्चा का विषय बना हुआ है।

क्योंकि जब से एक्सईएन का कार्यभार प्रवीण कुमार ने संभाला है, तब से तमाम अवैध कालोनियां बागपत बाइपास के इर्द-गिर्द या फिर बागपत रोड पर विकसित की जा रही हैं। इन सभी में विद्युतीकरण खूब किया जा रहा है। ऊर्जा निगम के जेई से लेकर एक्सईएन के बीच बड़ा सेटिंग का खेल चल रहा है। काली कमाई को सलीके से एक्सईएन और बिल्डर मिलकर ठिकाने लगा रहे हैं। चर्चा है कि एक्सईएन और बिल्डर के बीच अवैध कॉलोनी में पार्टनरशिप हैं।

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यही वजह है कि कॉलोनी में मकान एक भी नहीं बना और विद्युतीकरण कर दिया गया। अवैध कालोनियों में विद्युतीकरण कराने के मामले में एक्सईएन प्रवीण कुमार के खूब चर्चे चल रहे हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि मेरठ विकास प्राधिकरण की तरफ से इन अवैध कालोनियों में विद्युतीकरण नहीं करने के लिए पत्र भी लिखा है।

बावजूद इसके एक्सईएन ने तमाम नियम कायदों को ताक पर रखते हुए अवैध कालोनियों में विद्युतीकरण कर दिया है। ये विचारनीय बात हैं। यह भी तथ्य है कि अभी कॉलोनी में एक भी मकान नहीं बना, सिर्फ सड़क बनी है और बिजली के तीन ट्रांसफार्मर लगकर तैयार हो गए हैं।

अब सवाल उठता है कि जब यहां पर कोई रहता नहीं है, मकान नहीं है, फिर बिजली का विद्युतीकरण किसके लिए किया गया है? इससे साफ है कि बिल्डर और एक्सईएन प्रवीण कुमार के बीच सेटिंग का ‘महाखेल’ चल रहा है या फिर जो चर्चा है कि एक्सईएन अपनी काली कमाई का कुछ अंश बिल्डर के साथ पार्टनरशिप कर बैनामी संपत्ति खड़ी कर रहे हैं।

इसको लेकर सवाल उठ रहे हैं। जब मेरठ विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ने पत्र लिखकर अवैध कालोनियों में विद्युतीकरण नहीं करने के लिए आग्रह किया है तो फिर अवैध कालोनियों में विद्युतीकरण करने में आखिर एक्सईएन इतनी रुचि क्यों ले रहे हैं?

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कुछ तो गड़बड़ हैं। यह उनकी भूमिका पर सवाल उठना लाजिमी है। यह भी महत्वपूर्ण तथ्य है कि कमिश्नर सुरेंद्र सिंह भी मीटिंग बुलाकर ऊर्जा निगम के अधिकारियों को यह स्पष्ट कर चुके हैं कि अवैध कालोनियों में बिजली की आपूर्ति नहीं दी जाए। क्योंकि विद्युतीकरण के चलते ही अवैध कालोनियां विकसित हो रही है। ऐसा अवैध कॉलोनियों के विस्तार को रोकने के लिए कमिश्नर ने कदम उठाया था,

फिर भी ऊर्जा निगम के अफसर अवैध कॉलोनियों में विद्युतीकरण करने से बाज नहीं आ रहे हैं। न्यू ट्रांसपोर्ट नगर की ही हम बात करें तो यहां पर मेरठ विकास प्राधिकरण ने 2021 महायोजना में न्यू ट्रांसपोर्ट नगर की प्लानिंग की थी। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी चली।

धारा ( 6) की कार्रवाई भी की गई, लेकिन इसके बाद न्यू ट्रांसपोर्ट नगर कि फाइल को पेंडिंग में डाल दिया गया। इसका मौका अवैध कॉलोनाइजर को मिला और उन्होंने न्यू ट्रांसपोर्ट नगर की जमीन पर एक्सईएन से मिलीभगत करके अवैध कॉलोनी विकसित करनी शुरू कर दी। मिट्टी का भराव किया जा रहा है। सड़क बन चुकी है। साइट आॅफिस बन गया है।

इसके बाद ऊर्जा निगम के एक्सईएन प्रवीण कुमार ने विद्युतीकरण भी करा दिया। जहां मेरठ विकास प्राधिकरण के इंजीनियर की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं एक्सईएन प्रवीण कुमार भी कम दोषी नहीं है। क्योंकि उनके कार्यकाल में ही ये विद्युतीकरण किया गया है। आखिर अवैध कॉलोनियों में किया गया विद्युतीकरण ऊर्जा निगम के अधिकारियों को कठघरे में खड़ा कर रहा है।

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