Wednesday, May 20, 2026
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जानिए, कौन है साइबर हमलों का सबसे बड़ा टारगेट ?

  • तीन महीने में हो गई 20 फीसदी की बढ़ोतरी

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: साइबर थ्रेट टार्गेटिंग द ग्लोबल एजुकेशन सेक्टर शीर्षक से जारी एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारतीय शिक्षा क्षेत्र साइबर हमलों के लिए सबसे बड़ा टारगेट बना हुआ है। भारत के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, इंडोनेशिया और ब्राजील का स्थान है।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि 2022 के पहले तीन महीनों में 2021 की इसी अवधि की तुलना में डाटा वैश्विक शिक्षा क्षेत्र के लिए साइबर खतरों में 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत शैक्षणिक संस्थानों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के लिए साइबर खतरों का सबसे बड़ा लक्ष्य है। क्योंकि कोविड- 19 वैश्विक महामारी के दौरान दूरस्थ शिक्षा को अपनाना, शिक्षा का डिजिटलाइजेशन और ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफार्मों का प्रचलन प्रमुख तौर बढ़ा है, जिससे साइबर हमले की घटनाएं भी बढ़ी हैं।

रिपोर्ट को सिंगापुर स्थित एआई-संचालित डिजिटल रिस्क मैनेजमेंट एंटरप्राइज क्लाउडसेक (CloudSEK) के थ्रेट रिसर्च एंड इंफोर्मेशन एनालिटिक्स डिवीजन द्वारा तैयार किया गया है। क्लाउडसेक का एक्सविजिल (XVigil) प्लेटफॉर्म साइबर खतरों, डाटा लीक, ब्रांड खतरों और आइडेंटिटी थेफ्ट का पता लगाने के लिए सरफेस, डीप और डार्क वेब पर हजारों स्रोतों को खंगालता है।

क्लाउडसेक के प्रिंसिपल थ्रेट रिसर्चर दर्शित आशरा के मुताबिक, ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से बढ़ते वैश्विक शिक्षा और प्रशिक्षण बाजार के 2025 तक 7.3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, यह आशाजनक दृष्टिकोण शिक्षा प्रौद्योगिकी बाजार के विस्तार, जनसंख्या वृद्धि और विकासशील देशों में बढ़ती डिजिटल तकनीक पर आधारित है। इसलिए, यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि साइबर अपराधी इस क्षेत्र में संस्थानों को टारगेट करने की ओर बढ़ रहे हैं।

प्लेटफॉर्म के द्वारा पिछले साल एशिया-प्रशांत क्षेत्र में देखे गए साइबर खतरों में से 58 फीसदी भारतीय या भारत आधारित शैक्षणिक संस्थानों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को टारगेट कर रहे थे। इसके बाद 10 फीसदी साइबर खतरों के टारगेट के साथ इंडोनेशिया दूसरे स्थान पर था। इसमें ऑनलाइन कोचिंग प्लेटफॉर्म बायजू, आईआईएम कोझीकोड और तमिलनाडु के तकनीकी शिक्षा निदेशालय आदि पर हुए साइबर हमले शामिल थे।

वहीं, संयुक्त राज्य अमेरिका दुनिया भर में दूसरा सबसे अधिक प्रभावित देश था, जिसमें कुल 19 दर्ज घटनाएं थीं, जो उत्तरी अमेरिका में 86 प्रतिशत खतरों के लिए जिम्मेदार थीं। इनमें हॉवर्ड विश्वविद्यालय और कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों पर रैंसमवेयर हमले शामिल हैं।

डिजिटलाइजेशन का फायदा उठा लीक कर रहे निजी जानकारियां

रिपोर्ट में बताया गया कि कोविड-19 महामारी के कारण होने वाले शिक्षा क्षेत्र में हो रहे नुकसान से निपटने के लिए स्कूलों, विश्वविद्यालयों और संबंधित संस्थाओं द्वारा ऑनलाइन और ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग को अपनाया गया है। शैक्षिक सामग्री सामग्री, छात्रों के डाटा और दस्तावेजों का बड़े पैमाने पर डिजिटलाइजेशन किया जा रहा है।

इतना ही नहीं प्री स्कूल एजुकेशन से लेकर सेवानिवृत्त पेशेवरों तक सभी की जरूरतों को पूरा करने वाले ऑनलाइन शिक्षण प्लेटफॉर्म संचालित हो रहे हैं। साइबर अपराधी इन्हें ही टारगेट करते हैं। रिपोर्ट के निष्कर्षों से संकेत मिलता है कि कई साइबर अपराधी पर सक्रिय रूप से डाटाबेस एक्सेस, शैक्षणिक संस्थानों और छात्रों-शिक्षकों की निजी जानकारियां आदि लीक कर रहे हैं।

साइबर थ्रेट टार्गेटिंग द ग्लोबल एजुकेशन सेक्टर रिपोर्ट में छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और कर्मचारियों को संदिग्ध ईमेल, संदेश और लिंक पर क्लिक करने से बचने को कहा गया है। रिपोर्ट में सुझाव दिए गए हैं कि उपयोगकर्ताओं को किसी भी असत्यापित एप को डाउनलोड या इंस्टॉल नहीं करना चाहिए, उन्हें मजबूत पासवर्ड का उपयोग करना चाहिए और सभी खातों में मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (एमएफए) इनेबल बनाना चाहिए।

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