Sunday, June 13, 2021
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दिल्ली में ब्लैक फंगस की दवा का संकट, मेडिकल में भर्ती

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  • बारह जनपदों के मरीज अधिकांश दवाओं के कारण भर्ती
  • दिल्ली के अस्पतालों से रोज आ रहे भर्ती के लिये फोन

ज्ञान प्रकाश |

मेरठ: कोरोना से ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा ब्लैक फंगस का संकट अभी और बढ़ेगा। इसके पीछे कारण साफ है कि इसके इलाज में लगने वाले लिपोसोमल एम्फोटेरिसिन बी इंजेक्शन इंजेक्शन और दवाओं का भारी संकट है। हालात इस कदर गंभीर हो गए हैं कि मेरठ के आसपास के जनपदों और दिल्ली में ब्लैक फंगस की दवाएं बाजार में उपलब्ध नहीं है और लोग मेडिकल कालेज फोन करके मरीज को भर्ती करने की गुहार लगा रहे है। इस वक्त दिल्ली के चार मरीज इलाज भी करा रहे हैं।

कोरोना के बाद ब्लैक फंगस लोगों को बुरी तरह से दहशत में डाल रही है। मेडिकल कालेज में इस वक्त 118 और अन्य निजी अस्पतालों में 66 मरीज भर्ती है। मेडिकल कालेज में नोएडा, गाजियाबाद, बागपत, हापुड़, अमरोहा, रामपुर, मुरादाबाद, बिजनौर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर समेत बारह जनपदों के मरीज इलाज करा रहे हैं। म्यूकर वार्ड के प्रभारी डा. वी पी सिह ने बताया कि जिन मरीजों के ब्रेन में फंगस का बैक्टीरिया घर कर गया वो बेहद गंभीर स्थिति पैदा कर रहे हैं।

इसके अलावा जिनके नाक और आंख में संक्रमण है उनका आॅपरेशन किया जा रहा है। मेडिकल में अब तक दस लोगों का सफल आपरेशन हो चुका है। उन्होंने बताया कि दिल्ली के तेगबहादुर अस्पताल समेत अन्य अस्पताल से फोन आ रहे हैं कि दिल्ली में ब्लैक फंगस की दवाओं का घोर संकट है। इस कारण लोग इलाज कराने मेडिकल कालेज आ रहे है।

नोएडा के फोर्टिस में ब्लैक फंगस का आपरेशन कराने के बाद मरीज दवाओं के लिये भर्ती हुआ है। ऐसे कई जनपद के मरीज भर्ती है जो पूरे वेस्ट यूपी में मेडिकल में फ्री में मिल रही दवाओं के कारण इलाज करा रहे हैं। ब्लैक फंगस के एक मरीज के इलाज के लिए 150 लिपोसोमल एम्फोटेरिसिन बी इंजेक्शन की जरूरत पड़ती है। मरीज को 25 दिन तक रोजाना छह इंजेक्शन दिए जाते हैं। अगर निर्धारित मात्रा में इंजेक्शन की डोज नहीं दी जाती तो उसका रिकवरी का समय भी बढ़ जाता है।

वहीं ब्लैक फंगस के आॅपरेशन केस में इंजेक्शनों की कमी के चलते दोबारा संक्रमण फैलने से मरीज की जान पर खतरा बना रहता है। एम्फोटेरिसिन प्लेन इंजेक्शन की प्रतिदिन एक ही डोज काफी होती है। संक्रमण को बढ़ने से रोकने और फंगस को समाप्त करने में इंजेक्शन का बड़ा अहम रोल होता है। अगर इंजेक्शन की पर्याप्त डोज नहीं मिलती तो संक्रमण के फिर से बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है।

इससे खासकर आॅपरेशन के बाद मरीजों के लिए खतरा पैदा हो जाता है। निजी अस्पताल में भर्ती मरीजों को छह हजार रुपये में एम्फोटेरेसिन बी रेडक्रास की तरफ से दिया जा रहा है। वहीं कम संक्रमण वालों को डेढ़ हजार रुपये में और मामूली संक्रमण वाले को एक हजार रुपये में इंजेक्शन मिल रहा है। जबकि मेडिकल कालेज में यह इलाज पूरी तरह से नि:शुल्क है।

ऐसे होता है इलाज

ब्लैक फंगस में दो तरह के इंजेक्शन लगाए जाते हैं। जिसमें लाइपोसोमल एंफोटेरीसिन बी एंटीफंगल ड्रग्स को डिजीटल वाटर में ग्लूकोस के साथ मरीज को दिया जाता है। जो धीरे-धीरे मरीज के शरीर में चढ़ता है। 60 किलो के मरीज को एक बार में पांच एमजी का एक इंजेक्शन दिया जाता है। ऐसे मरीज को पांच से छह इंजेक्शन एक दिन में दिए जाते हैं। जबकि दूसरा जो सामान्य इंजेक्शन है वह एक दिन में 15 से 20 तक दिया जाता है। अगर ब्लैक फंगस दिमाग या आंख में इंफेक्शन कर गया हो तो इसकी खुराक दोगुनी करनी पड़ती है।

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