Thursday, July 2, 2026
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सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की सड़ांध से एक और महामारी फैलने की आशंका ?

पूरी कॉलोनी में फैल रही सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की सड़ांध

उठती है भयंकर बदबू, वीआईपी डिफेंस कॉलोनी का घुट रहा दम


मनोज राठी |

गंगानगर: उपयुक्त योजना, कुछ इच्छा शक्ति और जरा-सा दिमाग। इन तीनों का सही इस्तेमाल हो जाता तो यह मैला (सीवर) भी अच्छा हो जाता। गली-कूचों में बजबजाता, सड़ांध मारता बदबूदार सीवेज अगर खेतों तक पहुंचता तो खेती की शायद सूरत व सीरत दोनों बदल जाती और शहरों के तो क्या कहने! वे तो चमक उठते हैं।

मगर, इसके लिए उपयुक्त सीवर प्रणाली चाहिए, जो नहीं है। घरों के आगे गंदे पानी की समस्या से डिफेंस कॉलोनी के नागरिक काफी समय से परेशान हो रहे थे। वहां पर बनाया गया सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट नकारा होने से सीवरेज पाइप लाइन और गंदे पानी की सड़ांध से उनका घरों में रहना दूभर हो रहा है। साथ ही बीमारियां फैलने का अंदेशा भी बना हुआ है। इस समस्या से बार-बार जिम्मेदारों को अवगत कराने के बावजूद उसका कोई समाधान नहीं किया जा रहा है।

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पूरी दुनिया में आने वाले समय में प्रयोग करने लायक पानी की उपलब्धता को लेकर बहस चल रही है। ऐसे में एसटीपी की उपयोगिता दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। हमारे घरों से निकलने वाला गंदा पानी कहां जाता है? ये पानी हमारे घरों से बहकर नाले में पहुंचता है और उनको दूषित कर देता है।

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इसको रोकने और दूषित जल को पुन: प्रयोग में लाने के लिए एसटीपी का प्रयोग किया जाता है। मवाना रोड स्थित वीआईपी कॉलोनी में शुमार डिफेंस कालोनी में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट एसटीपी पर आधा एमएलडी का एसटीपी बनाया गया है। पॉश कालोनी होने के बाद भी डिफेंस कालोनी में एसटीपी नहीं बनाया गया था।

जिससे अब तक इसका सीवेज शोधित हुए बिना ही कसेरूखेड़ा नाले में डाला जा रहा है। इस समस्या को देखते हुए पिछले वर्ष एमडीए ने कालोनी के सोसाइटी पदाधिकारियों को नोटिस जारी किया था। साथ ही वहां के मानचित्र आवेदनों की स्वीकृति पर रोक लगा दी थी। इसके बाद सोसाइटी के पदाधिकारी बैकफुट पर आए और एसटीपी का निर्माण हुआ और अब इसने कार्य करना शुरू कर दिया है।

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क्या है एसटीपी                                                       

सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में गंदे पानी और घर में प्रयोग किये गये जल के दूषणकारी अवयवों को विशेष विधि से साफ किया जाता है। इसको साफ करने के लिए भौतिक, रासायनिक और जैविक विधि का प्रयोग किया जाता है। इसके माध्यम से दूषित पानी को दोबारा प्रयोग में लाने लायक बनाया जाता है और इससे निकलने वाली गंदगी का इस प्रकार शोधन किया जाता है कि उसका उपयोग वातावरण के सहायक के रूप में किया जा सके।

कैसे काम करता है ?                                                       

एसटीपी को ऐसी जगह बनाया जाता है। जहां विभिन्न स्थानों से दूषित जल वहां लाया जा सके। घरों के दूषित जल को साफ करने की प्रक्रिया तीन चरणों में संपन्न होती है जिसके तहत पहले, ठोस पदार्थ को उससे अलग किया जता है, फिर जैविक पदार्थ को एक ठोस समूह एवं वातावरण के अनुकूल बनाकर इसका प्रयोग खाद एवं लाभदायक उर्वरक के रूप में किया जाता है। इसके बाद उसे प्रयोग में लाने के लिए नालों में छोड़ दिया जाता है।

सड़ांध से पॉश कॉलोनी भयंकर दूषित                                     

कॉलोनियों से रोजाना कई लीटर सीवेज (गंदा पानी) निकलता है, इतनी बड़ी मात्रा में निकलने वाले घरेलू सीवेज का मात्र 20 फीसद ही ट्रीटमेंट हो पाता है। बाकी 80 फीसद सीवेज नालों में बहा दिया जाता है। गंगानगर क्षेत्र में कुछ कॉलोनियों में सीवर लाइन न होने से वहां का पानी सीधे जमीन के अंदर डाल दिया जाता है अथवा खुले में बहता है। अपनी पैदा की हुई गंदगी को ठिकाने लगाने के लिए हमारे पास कोई तंत्र नहीं है।

स्थानीय लोगों को हो रही भारी परेशानी                                         

डिफेंस कॉलोनी में ओपन सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट होने के कारण और कसेरूखेड़ा नाले में शहर से निकलने वाले लाखों लीटर सीवरेज छोड़ने पर स्थानीय लोगों ने आपत्ति जाहिर की है। लोगों का कहना है कि शहर में खुली नालियां हैं और शहर का पूरा गंदा पानी कसेरूखेड़ा नाले में छोड़ा जाता है। ऐसे में कई बार दूषित जल पीने से भी लोगों के स्वास्थ्य पर इसका असर पड़ता है। कई बार पीलिया जैसी बीमारियों का प्रकोप भी शहर में देखा गया है। जिसकी वजह कहीं न कहीं सीवरेज का सही ढंग से ट्रीटमेंट नहीं होना भी है।

नालियों की नहीं सुधरी हालत, दयनीय स्थिति में                           

वीआईपी कॉलोनी में शुमार डिफेंस कॉलोनीवासियों का कहना है कि नालियों का सिस्टम वैसा ही बना हुआ है। बारिश में भी पानी भरने से नालियां जाम हो जाती है, लेकिन इसके लिए भी कोई बेहतर व्यवस्था नहीं की गई है। कसेरूखेड़ा नाले की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। मेरठ नगर निगम को यह व्यवस्था करनी चाहिए, जिससे दूषित जल को ट्रीटमेंट करने के बाद कसेरूखेड़ा नाले में छोड़ा जाए।

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