- पुलिस मौजूदगी में भाजपा नेताओं को विशेष समुदाय के लोगों ने दौड़ा-दौड़ा कर पीटा, एक की हालत नाजुक
- बवाल करने वाले सचिन सिरोही पुलिस कस्टडी से भागा, पुलिस कर रही तलाश
जनवाणी संवाददाता |
कंकरखेड़ा: थाना क्षेत्र के डबल स्टोरी के निकट कब्रिस्तान में गुरुवार शाम बड़ा बवाल हो गया। दरअसल, कब्रिस्तान और एक प्लॉट के विवाद में दो समुदाय आमने-सामने आ गए, जिसमें मामला सुलझाने आए भाजपा नेताओं को विशेष समुदाय के लोगों ने दौड़ा-दौड़ा कर पीटा और कपड़े फाड़ डाले। घंटों अराजकता का माहौल बना रहा। बाद में पुलिस ने हिंदू जागरण मंच और भाजपा नेताओं को हिरासत में ले लिया।
सूचना पर एसपी सिटी भी मौके पर पहुंचे। घायलों को जिला अस्पताल में भेजा गया। जहां एक भाजपा नेता की हालत नाजुक बनी हुई है। देर रात कंकरखेड़ा थाने में पुलिस की तरफ से हिंदू जागरण मंच के महानगर अध्यक्ष सचिन सिरोही समेत तमाम अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। यह पूरा बवाल पुलिस की मौजूदगी में चला। उधर, बवाल करने वाला सचिन पुलिस कस्टडी से फरार हो गया। उसे पुलिस ने हिरासत में ले लिया था।
ये है मामला
मेरठ विकास प्राधिकरण ने कैलाशी हॉस्पिटल के समीप एनएच-58 पर स्थित 1212 मीटर जमीन डा. सागर तोमर को आवंटित की है। इस जमीन पर डा. सागर तोमर को मेरठ विकास प्राधिकरण की तरफ से अभी तक कब्जा नहीं मिला है। हालांकि आॅन रिकॉर्ड मेरठ विकास प्राधिकरण की तरफ से डा. सागर के नाम इसकी रजिस्ट्री कर दी गई है। महत्वपूर्ण बात यह है कि जैसे ही विशेष संप्रदाय के लोगों को रजिस्ट्री का पता लगा वैसे ही विशेष संप्रदाय के लोगों ने उर्दू में लिखे पत्थर वहां जमीन में गाड दी। कहा कि यहां पर पुरानी कब्र है। यह बहुत पुराना कब्रिस्तान है, जिसको मेरठ विकास प्राधिकरण ने गलत बेच दिया है।

कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र के एक कॉलोनी निवासी विशेष समुदाय की महिला की मौत हो गई थी। महिला के परिजनों ने शव को दफनाने के लिए डिफेंस एंक्लेव डबल स्टोरी के निकट कब्रिस्तान वाली भूमि पर कब्र खोद डाली थी। यह मेरठ विकास प्राधिकरण की भी भूमि है, जिसको लक्ष्य हॉस्पिटल के मालिक डा. सागर तोमर ने खरीद रखा था। उसकी एमडीए की तरफ से रजिस्ट्री भी हो चुकी हैं।
वहां पर कब्र खोदने की सूचना पर लक्ष्य हॉस्पिटल के मालिक आॅथोर्पेडिक सर्जन सागर तोमर और उसके पिता सुधीर तोमर भी पहुंच गए। उन्होंने बताया कि यह भूमि मेरठ विकास प्राधिकरण से करीब 1212 मीटर उन्होंने खरीद रखी है। उन्होंने कब्रिस्तान की भूमि में कब्र खोदने का विरोध किया। बवाल नहीं हो, इसकी सूचना पुलिस को दी। लिखित तहरीर भी दी गई, मगर पुलिस ने काम नहीं रुकवाया। विवाद की स्थिति होने पर कंकरखेड़ा इंस्पेक्टर पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गए, लेकिन मामला नहीं सुलझ सका।
मामला फैलते हुए यहां पर भाजपा नेता दुष्यंत रोहटा, नवाब सिंह लखवाया और हिंदू जागरण मंच के महानगर अध्यक्ष सचिन सिरोही और संजय वर्मा भी पहुंच गए। उन्होंने इस संबंध में पुलिस के सामने विशेष समुदाय के लोगों को समझाने का प्रयास किया। जिस पर विशेष समुदाय के लोग इकट्ठे होकर भाजपा नेताओं पर टूट पड़े। उन्होंने दुष्यंत रोहटा और नवाब सिंह लखवाया के कपड़े फाड़ डाले और मारपीट करते हुए घायल कर दिया। इन्हें दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया। यह पूरा घटनाक्रम पुलिस की मौजूदगी में हुआ। इस दौरान पुलिस ने घेराबंदी कर उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन मुस्लिम समुदाय के लोगों की संख्या अधिक होने के कारण वह पुलिस के काबू में नहीं आ सके।
इसके बाद पुलिस ने दुष्यंत रोहटा, नवाब सिंह लखवाया और सचिन सिरोही को हिरासत में ले लिया। जिसके बाद भी मुस्लिम समुदाय के लोग बवाल करते रहे। इस दौरान पुलिस को लाठियां भांजनी पड़ी, जिसके बाद एकत्र भीड़ को तितर-बितर किया। इस दौरान सचिन सिरोही और संजय वर्मा वहां से निकले और इस घटना के बारे में अधिकारियों को सूचना दी। सचिन सिरोही ने आरोप लगाया कि पुलिस की लापरवाही के कारण बवाल हुआ है। विशेष समुदाय के करीब 300 लोग मौके पर मौजूद थे, लेकिन मौके पर अतिरिक्त फोर्स नहीं बुलाई गयी।
एसपी सिटी मौके पर पहुंचे
विशेष समुदाय के सैकड़ों लोगों ने लाठी-डंडों से भाजपा नेताओं पर हमला कर दिया था। इस दौरान उन्होंने पथराव भी किया था। हमले में भाजपा नेता दुष्यंत रोहटा और नवाब सिंह लखवाया घायल है। इसकी सूचना मिलने पर एसपी सिटी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और मामले की जानकारी ली। पुलिस ने घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया है। एसपी सिटी विनीत भटनागर ने बताया कि पूरा विवाद डाक्टश्र और ग्रामीणों के बीच था, जो शांत हो गया था, लेकिन हिंदू जागरण मंच के महानगर अध्यक्ष सचिन सिरोही अपने साथ कई लोगों को लेकर आया और हंगामा करवाया। इस पर ग्रामीणों ने उनकी पिटाई कर दी। सचिन को जब पुलिस लेकर जा रही थी वो फरार हो गया। सचिन सिरोही समेत तमाम अज्ञात लोगोंं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।
वीडियो बनाने पर पुलिस कर्मियों से भिड़े विशेष संप्रदाय के लोग
जिस दौरान विवादित जमीन पर कब्र की खुदाई चल रही थी, उस दौरान डा. सागर तोमर पुलिस को लेकर मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने कब्र खोद रहे युवक को कब्र खोदने से मना कर दिया, जिसके बाद एक युवक पुलिस कर्मियों की वीडियो बनाने लगा। इस दौरान पुलिस कर्मी ने युवक को वीडियो बनाने से मना किया, लेकिन युवक नहीं माना, जिसके बाद विशेष संप्रदाय के युवकों और पुलिस के बीच खूब नोकझोंक हुई। देखते ही देखते पुलिस और विशेष संप्रदाय के लोगों के बीच तनातनी बढ़ गई। बाद में मौके पर पहुंचे एक सब इंस्पेक्टर ने हंगामा कर रहे युवकों को दौड़ाया, तब जाकर वीडियो बनाना बंद किया ।
…और बनते गए टकराव के हालात, नहीं बढ़ाई फोर्स
कब्र खोदने को लेकर धीरे-धीरे टकराव के हालात बनते जा रहे थे। इसी बीच इंस्पेक्टर कंकरखेड़ा भी पहुंचे, जिसमें दोनों पक्षों से तय हो गया कि दो दिन बाद दोनों पक्ष जमीन किसकी है? उसके दस्तावेज थाने में लेकर आएंगे, लेकिन जो कब्र खोद दी हैै उसमें युवती के शव को सुपुर्द-ए-खाक करने से कोई नहीं रोकेगा। इस पर सहमति भी बन गई थी। कुछ लोग मौके से चले भी गए थे, लेकिन पुलिस नहीं समझ सकी की धीरे-धीरे आक्रोश का लावा फूट सकता है और पुलिस ने मौके पर फोर्स नहीं बढ़ाई। यही वजह रही कि देखते ही देखते बवाल हो गया। इसमें पुलिस की लापरवाही भी साफ दिखाई दी। पुलिस ने भीड़ को यहां पर एकत्र ही क्यों होने दिया? यदि भीड़ को वहां से हटा दिया जाता तो फिर यह बवाल नहीं होता।
प्लाट बेचकर क्यों हाथ झाड़ रहा एमडीए?
श्रद्धापुरी फेज-2 आॅन रोड हाईवे पर स्थित जमीन मेरठ विकास प्राधिकरण की या फिर नंगलाताशी के विशेष सम्प्रदाय के लोगों की कब्रिस्तान। एमडीए की जमीन है तो फिर एमडीए के अधिकारियों ने अपनी जमीन पर कब्जा क्यों नहीं लिया? गुरुवार को भी जब बवाल हुआ, तब एमडीए का एक भी अधिकारी मौजूद नहीं था। जब जमीन एमडीए की है तो फिर एमडीए इसमें आगे क्यों नहीं आ रहा हैं? एमडीए के अधिकारियों को डा. सागर ने इसकी सूचना लिखित में दी, फिर भी एमडीए के अधिकारियों ने थाने में तहरीर नहीं दी।
दो दिन पहले भी इस जमीन पर उर्दू में लिखे पत्थर जमीन में दबाये गए। इसकी सूचना भी एमडीए अधिकारियों को दी गई, मगर फिर भी अधिकारी इस तरफ से आंखें मूंदे हुए हैं। कहीं ऐसा तो नहीं है कि एमडीए ने गलत आवंटन जमीन का कर दिया हो, क्योंकि इस जमीन को लेकर दस वर्ष पहले भी कुछ लोगों के साथ टकराव हो चुका हैं। यह जमीन एमडीए के दस्तावेज में नर्सिंग होम के नाम पर आवंटित है, जिसकी मेरठ विकास प्राधिकरण रजिस्ट्री भी कर चुका हैं।
वर्तमान में जमीन पर डा. सागर का कब्जा नहीं हैं, जिसको लेकर एमडीए के अधिकारियों की तरफ से ही पहल की जानी थी, मगर आवंटी डा. सागर तोमर व उसके परिजन खुद शव को कब्रिस्तान में दफनाने का विरोध करने पहुंच गए। एमडीए के अधिकारियों को गुरुवार को भी बार-बार कॉल की गई, मगर कोई भी अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे। इससे साफ लग रहा है कि प्लांट के करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये आवंटी से लेने के बाद एमडीए हाथ झाड़ रहा है, तभी इसमें कोई अधिकारी बुलाने के बाद भी मौके पर वास्तविकता बताने के लिए नहीं पहुंचे।

