Wednesday, January 26, 2022
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डीबीटी योजना: कितना मिल रहा सरकारी स्कूलों के छात्रों को लाभ?

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  • डीबीटी योजना के तहत कक्षा एक से आठवीं तक के छात्रों को मिलती 11 सौ रुपये की राशि
  • एक लाख 71 हजार छात्रों का अब तक हो चुका है रजिस्ट्रेशन

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा एक से आठवीं तक के छात्रों को सरकार द्वारा स्कूल की ड्रैस खरीदने के लिए सहायता राशि के रूप में 11 सौ रुपये प्रतिवर्ष दिये जाते हैं। इस राशि को छात्रों के अभिभावकों के खाते में सीधा भेजा जा रहा है, जिसे डीबीटी योजना कहते हैं, लेकिन इसका कितना लाभ छात्रों को मिल रहा है यह बड़ा सवाल है।

सरकार द्वारा 2013 मेंं डीबीटी यानी डायरेक्ट बैनीफिट ट्रांसफर पोर्टल की शुरुआत की गई थी, जिसका उद्देश्य यह था कि किसी भी योजना का लाभ लेने के लिए सरकार द्वारा दी जानें वाली सब्सिडी बिना किसी बिचौलिए के सीधे लाभार्थी तक पहुंचे। इस योजना के तहत सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा एक से आठवीं तक के छात्रों को ड्रेस के लिए मिलनें वाला पैसा उनके अभिवकों के खातोंं में सीधे पहुंचता है।

मेरठ में इस सत्र में अभीतक 1 लाख 71 हजार से अधिक छात्रों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है। जिनको डीबीटी के माध्यम से ड्रैस के लिए मिलने वाली 11 सौ रुपये की राशि अभिभावकों के खातों में भेजी जा रही है। हालांकि अब भी रजिस्ट्रेशन करने की प्रक्रिया जारी है, लेकिन फिलहाल पोर्टल बंद है, जिस कारण यह प्रक्रिया रुकी हुई है। वहीं सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार डीबीटी योेजना के तहत स्कूल ड्रैस के लिए जो पैसा अभिभावकों के खातों में जा रहा है। उसका लाभ बच्चों को नहीं मिल पा रहा है।

कारण यह कि पिछले काफी समय से कोरोना के कारण स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति काफी कम है। दूसरी बात यह है कि बड़ी संख्या में उन लोगों के रोजगार प्रभावित हुए है, जिनके बच्चे सरकारी स्कूलों में शिक्षा लेते है। ऐसे में सरकार द्वारा बच्चों की यूनिफार्म के लिए मिलने वाले पैसे अभिभावक अपने खर्च में ले लेते हैं। यानी बच्चों को ड्रैस नहीं मिल पाती, जबकि सरकार इसके लिए पैसे भेजती है। अभिभावक भी यह सोचते हैं कि बिना यूनिफार्म के बच्चे स्कूल जाते हैं तो इससे स्कूलों में कोई सख्ती नहीं की जाती।

  • एक छात्र के लिए मिलते हैं 11 सौ रुपये
  • छात्रों को साल में दो बार यूनिफार्म सिलवाने के लिए छह सौ रुपये
  • स्वेटर के लिए दो सौ रुपये
  • जूते-मौजे के लिए 125 रुपये
  • स्कूल बैग के लिए 175 रुपये मिलते है

कुल स्कूलों की संख्या

परिषदीय व सहायता प्राप्त कुल स्कूलों की संख्या कक्षा एक से आठवीं तक एक हजार 128 है। जिनमें अभी तक एक लाख 71 हजार बच्चों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है, जो अभी जारी है। प्रेरणा नाम के पोर्टल पर यह रजिस्ट्रेशन होता है। जिसके द्वारा डीबीटी के तहत पैसे जाने की प्रक्रिया अभी जारी है।

क्या होती है परेशानी?

कई बार टैक्निकल दिक्कतें आती है। जैसे-एकाउंउ के वैरिफिकेशन में समस्या, अकाउंट बंद होने पर पैदा होने वाली समस्या जिसके कारण पैसा लाभार्थी को भेजा तो जाता है, लेकिन वह वापस आ जाता है। कुल मिलाकर डीबीटी योेजना का उचित लाभ लाभार्थी सभी छात्रों को मिलने पर सवाल उठ रहे हैं, लेकिन इसके लिए सरकार या विभाग जिम्मेदार है। यह नहीं कहा जा सकता। सरकारी स्कूलों के छात्रों को डीबीटी योजना का लाभ देने के लिए अभी कुछ और ठोस कदम उठाने की जरूरत है। जिससे यह योजना पूरी तरह सफल हो सके।

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