जनवाणी संवाददाता |
कैराना: मंगलवार को झिंझाना रोड स्थित दंगा विस्थापित मुनव्वर हसन कॉलोनी के करीब आधा दर्जन ग्रामीण संपूर्ण समाधान दिवस में पहुंचे। ग्रामीणों ने एसडीएम उद्भव त्रिपाठी को दो मांग पत्र सौंपे। जिसमें बताया गया हैं कि वर्ष 2013 में मुजफ्फरनगर में हुए सांप्रदायिक दंगे के बाद अलग-अलग गांवों से विस्थापित लोग झिंझाना रोड स्थित मुनव्वर हसन कॉलोनी में आकर बस गए थे।
सामाजिक संस्था अफकार इंडिया फाउंडेशन के सहयोग से कॉलोनी में एक अस्थाई स्कूल बनाया गया था। जो गांव भूरा के प्राइमरी स्कूल से अटैच हैं। स्कूल में दो सरकारी अध्यापकों की नियुक्ति की गई थी। कुछ दिन बाद एक अध्यापक का ट्रांसफर हो गया था।
जिसके बाद एक अध्यापक द्वारा विस्थापित कॉलोनी के बच्चों को पढ़ा जा रहा हैं। स्कूल में 150 से अधिक बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं। बच्चों को मात्र एक ही अध्यापक पढ़ा रहा है। ग्रामीणों ने स्कूल में तीन और अतिरिक्त अध्यापकों की नियुक्ति कराने की मांग की है। वहीं आंगनबाड़ी सेंटर खोलने की भी मांग की। इस दौरान मोहम्मद फैजान, आमिर, तासिम, नूर हसन, आशु, रफीक, जफर व फैयाज आदि मौजूद रहे।
आशाओं ने की मानदेय दिलाने की मांग
मंगलवार को तहसील सभागार कक्ष में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में एसडीएम उद्भव त्रिपाठी को आधा दर्जन आशाओं ने एक शिकायती पत्र दिया। जिसमें उन्होंने बताया कि वें सभी नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अर्बन क्षेत्र में तैनात हैं। बताया गया हैं कि जून 2020 से उन्हें कोई मानदेय नहीं मिला।
जिस कारण उनके परिवार के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया हैं। उन्होंने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधीक्षक से भी इस बाबत शिकायत की। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। आशाओं ने एसडीएम से अपना मानदेय का भुगतान कराने की मांग की हैं। इस दौरान आशा सरोज, सरिता, प्रभा, राजबाला, पूनम रानी, बीना व रजिया आदि मौजूद रही।

