Tuesday, April 21, 2026
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पांच साल में क्या किसानों की आय दोगुनी हुई: जयंत

  • ये वादा कहां तक पहुंचा? क्या कभी इस वादे को भाजपा पूरा कर पायेगी?

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: रालोद के राष्टÑीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सदस्य जयंत चौधरी ने कहा कि 2016 में केन्द्र सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था। 2023 में वित्त मंत्री निर्मला सिंह से सवाल किया कि किसानों की आय दोगुनी करने के वादे का क्या हुआ? ये वादा कहां तक पहुंचा? क्या कभी इस वादे को भाजपा पूरा कर पायेगी? एमएसपी पर कोई कानूनी नहीं बनाया गया।

इसका बजट में जिक्र तक नहीं किया गया। किसान सम्मान निधि में वृद्धि समेत कई मुद्दों पर वित्त मंत्री और केन्द्र सरकार मौन क्यों हैं? यही नहीं, जयंत चौधरी ने ट्यूटर पर यह भी कहा है कि मनरेगा के बजट में भारी कमी कर दी गई, क्योंकि मनरेगा से गांव स्तर पर विकास कार्य किये जाते हैं। गांवों और कृषि की उपेक्षा की गई। कृषि का बजट भी कम कर दिया गया। स्वास्थ्य का बजट भी कम किया।

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महंगाई पर नियंत्रण की दिशा में बजट में कोई प्रयास होते नहीं दिखे। बेरोजगारों को रोजागार देने का कोई ऐलान नहीं किया गया। स्टाई फंड से युवाओं का काम नहीं चलेगा, बल्कि प्रत्येक वर्ष दो करोड़ युवाओं को रोजगार देने का वादा किया था, उसे वादे को केन्द्र सरकार कब पूरा करेगी?

आय दोगुनी करने वाली सरकार घटा रही किसानों की आय

हस्तिनापुर के खादर क्षेत्र के तारापुर निवासी सुंदर सिंह का कहना है कि बजट में दूर-दूर तक किसानों के हित की कोई बात नहीं की गई। 10 साल से केंद्र सरकार लगातार देश के किसानों की आय दोगुनी करने का वादा कर रही है, लेकिन ऐसा होता नजर नहीं आ रहा बुधवार को भी पेश किए गए बजट में न तो किसानों की आय दोगुनी करने का कोई जिक्र किया गया और न ही किसानों की हित की बजट में कोई बात रखी गई।

खादर निवासी जज सिंह का कहना है कि लगातार किसानों के साथ छल किया जा रहा है। जबकि केंद्र की भाजपा सरकार किसानों को आय दोगुनी करने के साथ किसानों की सरकार होने का ढोल पीट रही है। जबकि आज तक किसी भी बजट में किसानों की आय दोगुनी करने संबंधित कोई बात नहीं कही गई। बुधवार को संसद में पेश किया गया। बजट महल पूंजीपतियों के लिए है। किसानों के लिए कोई भी घोषणा नहीं की गई। देश का बजट किसानों के साथ में छलावा नजर आ रहा है।

बजट से निराश दिखा किसान, चूर हुए अरमान

सरधना क्षेत्र में बजट पर छुर गांव के किसान विनेश प्रधान का कहना है कि सरकार ने इस बार भी किसानों को ठगने का काम किया है। किसानों के लिए बजट पूरी तरह बेकार है। बजट में सरकार द्वारा किसानों को लेकर कोई खास घोषणा नहीं की गई है। किसान को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया है।

भाकियू टिकैत के जिला मीडिया प्रभारी अजय दबथुवा का कहना है कि सरकार को अगर किसानों की चिंता होती तो सबसे पहले स्वामी नाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करती। आज महंगाई ने किसान की कमर तोड़ रखी है। फसल से ज्यादा लागत के दाम हो रहे हैं। फसलों के दाम नहीं बढ़ रहे हैं और खाद-बीज आदि के रेट आसमान छू रहे हैं। जिससे किसानों का आय दोगुना तो दूर लागत भी नहीं निकल रही है।

किसान अश्वनी सिरोही का कहना है कि सरकार ने खाद-बीज, बिजली-पानी सस्ता करने की बात कही थी। मगर बजट में ऐसा कुछ नहीं किया। एमएसपी डेढ़ गुना तो कर दी है, लेकिन फसल खरीदने वाला कोई नहीं है। गन्ना मूल्य नकद भुगतान की बात कही थी। वो भी झूठी साबित हुई है। बजट में किसानों को कुछ नहीं मिला है।

झिटकरी गांव के किसान अशोक सिरोही का कहना है कि इस बार भी बजट किसानों की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा है। किसानों के कर्ज माफ का कोई रास्ता नहीं बनाया गया। खाद बीज पर कोई राहत नहीं मिली है। जिससे किसान कोई लाभ नजर नहीं आता। बाकी जो बजट बनाया गया है। वह भी लागू होने का इंतजार रहेगा।

बोले किसान: बजट चुनावी और किसानों के लिए निराशाजनक

किठौर क्षेत्र के असीलपुर निवासी किसान अनस शकील का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बजट को भले ही गांव, गरीब किसान के लिए लाभकारी बता रहें हो मगर वित्तमंत्री ने किसानों के लिए कोई खास व्यवस्था नहीं की है। सिर्फ 20 लाख करोड़ का एग्रीकल्चर के्रडिट टारगेट का लोलीपोप दिखा दिया। इससे आम किसान को कोई लाभ नहीं। खाद, बीज उर्वरक, कृषि संयंत्रों पर सब्सिडी देनी चाहिए थी।

छुछाई निवासी किसान जगबीर सिंह, उर्फ गुड्डू का कहना है कि भारत कृषि प्रधान देश है। यहां की 50 प्रतिशत आबादी कृषि करती है। ऐसे में सरकार को बजट में किसानों का विशेष ध्यान रखना चाहिए था। मगर 1 करोड़ किसानों को नेचुरल फार्मिंग में मदद, आॅर्गेनिक खेती के लिए 10 हजार बायो रिसर्च सैंटर के सपने दिखाकर किसान को मायूस छोड़ दिया गया। किसान की फसल की एमएसपी घोषित नहीं की गई, डीजल, टैक्टर समेत तमाम कृषि संयंत्रों पर छूट की घोषणा नहीं की गई।

किठौर निवासी मौ. वसी का कहना है कि बजट चुनावी और निाराशा जनक है। किसानों, नौजवानों के लिए इसमें कुछ भी खास नहीं। किसान आर्थिक तंगी से जूझ रहा है और सरकार नौजवानों के लिए एग्रीकल्चर बेस्ड उद्यम विकसित करने के दावे कर रही है। पारंपरिक खेती के लिए सरकार ने कोई योजना बनाई नहीं जिससे किसान हताश हैं। उद्योगपतियों के इस ड्रीम बजट में बागवानी को 2200 करोड़ दिए गए हैं। जो उंट के मुंह में जीरा हैं।

शाहीपुर निवासी किसान हरजीत सिंह का कहना है कि बजट में किसानों को नजर अंदाज किया गया है। यह बजट पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने वाला है। किसान, नौजवान, और मध्यमवर्ग के लिए इसमें फिलहाल कुछ नहीं। भविष्य के लिए चर्चा कर तीनों वर्गों को खुश करने की कोशिश की गई है,

लेकिन आर्थिंक तंगी से जूझता किसान, बेरोजगार नौजवान और अभावग्रस्त जीवन गुजार रहा मध्यमवर्ग सरकार की नीयत और नीति को समझ गया है। शिक्षित युवाओं को एकलव्य स्कूलों में 38 हजार शिक्षकभर्ती, 47 लाख युवाओं को तीन साल तक स्टाईपेड, और कौशल विकास योजना लांच करने, स्किल डेवलेपमेंट सेंटर खोलने का लोलीपोप थमा दिया गया है।

किसानों की बजट से आस रह गई धरी की धरी

परीक्षितगढ़ के किसान नेता बिजेन्द्र भाटी ने बजट के बारे में बताया कि सरकार ने किसानों के के्रडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाकर किसानों को बधवा मजदूर बना रही है। क्योंकि सरकार किसानों को कर्जा देकर उनसे ज्यादा वसूली करके उनके साथ खिलवाड़ कर रही है। जबकि किसान किसी पार्टी व धर्म जाति को नहीं मानता है। कोरोना काल में किसानों ने देश की सेवा की है।

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किसान आशीष चौधरी निवासी ऐतमापुर का कहना है कि देश में किसान अन्नदाता माना जाता है, लेकिन सरकार ने किसानों के साथ धोखा कर उनका उत्पीड़न किया जा रहा है। इस बजट से यह साबित होता है कि यह सरकार किसान विरोधी सरकार है। बजट में किसानों के अलावा सभी वर्गों के लोगों और व्यापारियों को राहत दी है, लेकिन किसानों की अनदेखी की गई है।

नगर के किसान इंद्रेश त्यागी का कहना है कि आज किसान बजट को देखकर अपने को बहुत ही छोटा महसूस कर रहा है। क्योंकि बजट में किसानों को सही योजनाओं का लाभ नहीं दिया गया है। जबकि किसान अपने परिवार के साथ देश की सेवा के लिए तत्पर खड़ा रहता है। इससे साबित होता है यह सरकार गरीब, मजदूर की सरकार नहीं है।

किसान कुलदीप प्रधान का कहना है कि सरकार किसानों के लिए बड़े-बडेÞ दावे करती है, लेकिन बजट से कोई लाभ किसान को नहीं मिला है। किसानों की फसल पर सरकार ने बजट में हित की बात नहीं की है। जिससें किसान इस बजट को विष बजट बताकर चल रहे हैं। जबकि इस सरकार को बनाने में किसानों का बहुत बड़ा योगदान है।

किसानों को चाहिए फसलों का वाजिब दाम

मवाना तहसील क्षेत्र के गांव मुबारिकपुर निवासी किसान भाकियू मंडल महामंत्री नरेश चौधरी ने बताया कि प्रदेश सरकार हो या केंद्र सरकार। किसानों की हित की बात कहते हुए नजर नही आ रही है। केन्द्र सरकार का बजट बहुत ही निराशाजनक रहा है।

किसान यूनियन मंडल अध्यक्ष चौधरी अनिल चिकारा ने कहा कि सरकार बनने से केन्द्र एवं राज्य सरकार किसानों के हित में बात कहते हुए उनकी वोट ले लेती है, लेकिन जब बजट पास करने की बारी आती है तो किसानों के साथ छलावा करती है। केंद्र सरकार का जारी किया गया बजट बहुत ही निराशाजनक रहा है सरकार ने किसान एवं मजदूरों के पक्ष में कोई बेहतर विकल्प सोचने की जरूरत है।

युवा किसान नेता सोहित चौधरी ने बताया कि किसानों को अन्नदाता भले ही कहा जाता हो, लेकिन किसान भुखमरी के कगार पर आ चुका है। सरकार को किसानों की सुध लेनी चाहिए कि गत दिनों हुई बारिश से किसानों की फसल को काफी नुकसान हो गया।

किसान विलियम सिंह उर्फ अमरपाल ने बताया कि किसानों के हित में सरकार ने रुठा हुआ बजट पास कर उनके चेहरे की खुशी छीन ली है। किसान तभी खुशहाल होगा जब सरकार उनकी फसलों का वाजिब दाम देने का काम करे। किसान हित में सरकार के दावे धरातल पर दावे खोखले साबित हो रहे हैं।

नहीं चाहिए फ्री का लोन: नरेश नंगला

मोदीपुरम: सरकार द्वारा लोकसभा में किए गए बजट में किसानों को एक साल तक के लोन पर कोई ब्याज नहीं लेने का निर्णय लिया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के युवा किसान नेता राष्ट्रीय महासचिव राष्ट्रीय जाट महासभा चौधरी नरेश नंगला ने कहा की किसानों को फ्री में लोन नहीं चाहिए। किसानों को अपनी फसल का उचित दाम मिलना चाहिए और किसान द्वारा बेची गई, फसल का तुरन्त भुगतान होना चाहिए। सरकार द्वारा बजट में किसानों को बिना ब्याज के लोन देने पर कुछ किसान समय से लोन नहीं लौटाएगा।

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