Saturday, May 9, 2026
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खस्ताहाल सरकारी स्कूल दे रहे बीमारियों को न्योता

  • हाल-बेहाल, स्कूल में जगह-जगह भरा बारिश का पानी

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: विद्यालय को शिक्षा का मंदिर कहा जाता है, क्योंकि यह न सिर्फ एक विद्यालय है, बल्कि एक ऐसी संस्था है जहां बच्चों के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक एवं नैतिक गुणों का विकास होता है। जिससे वो आगे चलकर देश के उथान में एक सबल और जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभाते हैं, पर शिक्षा का मंदिर कहे जाने वाले सरकारी विद्यालय देखरेख के अभाव में इन दिनों खस्ताहाल हैं। कहीं बारिश का पानी भरा है तो कहीं कचरे के डिब्बे उखड़े पड़े हैं, जो बीमारियों को न्योता देते नजर आते हैं।

मंगलवार को जनवाणी की टीम नगर के कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय पहुंची, जहां हमने स्कूल का मिला जुला हाल पाया। एक तरफ जहां स्कूल की टीचर्स और बच्चों में अच्छा बॉन्ड नजर आया तो दूसरी तरफ स्वच्छता को लेकर बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति कई सवाल भी खड़े हुए।

बीमारियों को बुलावा

केन्द्र व प्रदेश सरकार हमेशा सरकारी स्कूलों को मॉडर्न स्कूल बनाने व प्रत्येक बच्चे को शिक्षा का अधिकार दिलाने की बहुत सी योजनाएं संचालित करती रहती है, लेकिन बावजूद इसके अधिकारियों और स्कूल प्रशासन की लापरवाही और अनदेखी के चलते सरकारी स्कूल हमेशा ही कटघरे मे खड़े नजर आते हैं।

जब जनवाणी टीम कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय पहुंची तो कहीं उखड़े पड़े कचरे के डिब्बे बीमारियों को न्योता दे रहे थे तो कहीं बारिश के जमा पानी मे कीड़े और मच्छर अटखेलियां करते नजर आये। साप्ताहिक कार्यशाला के माध्यम से करते हैं।

बच्चियों का बौद्धिक विकास

प्रधानाचार्य ने बताया कि हर शनिवार को बच्चियों के बौद्धिक विकास के लिये मीना मंच प्रोग्राम और अरुणी प्रोग्राम का आयोजन किया जाता है, जिसमें एक सत्र में कहानियों के माध्यम से बच्चियों को सामाजिक, आत्मरक्षा, गुड और बेड टच जैसे विषयों पर शिक्षित किया जाता है। लंच के बाद दूसरे सत्र में लखनऊ से ट्रेनिंग लेकर आयी विद्यालय की टीचर्स द्वारा लेक्चर के माध्यम से बच्चियों को समझाया जाता है।

छात्रवृत्ति और बच्चियों के लिये सुविधाएं

कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय की प्रधानाचार्य बताती है कि हर माह बच्चियों के अभिभावकों के अकाउंट में 100 रुपये छात्रवृत्ति और यूनिफार्म के 600 दिये जाते हैं। बावजूद इसके कई माता-पिता बच्चियों को बिना स्कूल ड्रेस के ही भेज देते हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि समय-समय पर बच्चियों के लिये हेल्थ चेकअप, संस्थानों द्वारा ड्रेस का वितरण विद्यालय द्वारा कराया जाता रहता है।

लेट काम के भार तले दबा मिला बेसिक शिक्षा विभाग

मेरठ: सरकारी विभागों में कामकाज का ढर्रा क्या है, इससे सभी बाखूबी वाकिफ है। अधिकांश विभागों में काम को टालने की आदत के चलते कई जरूरी काम समय पर पूरे नहीं हो पाते हैं और इसका असर पड़ता है आम लोगों पर और सरकार की उन योजनाओं पर जो लोगों की सुविधाओं के लिए होती है। बेसिक शिक्षा विभाग में भी काम करने का ऐसा ढुलमुल रवैया सामने नजर आया। जैसा कि आप जानते हैं कि सरकार सभी कर्मचारियों का डाटा आॅनलाइन कर रही है।

शिक्षा विभाग में सभी कर्मचारियों की डिटेल मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड करने का काम कराया जा रहा है ताकि एक क्लिक के साथ ही किसी भी कर्मचारी और शिक्षक की समस्त डिटेल देखी जा सके और इस आधार पर कर्मचारी के पेंशन, ट्रांसफर से सम्बंधित व अन्य कार्य आसानी से किए जा सके, लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग मेरठ में डाटा फीडिंग को लेकर कर्मचारियों में अभी तक कोई संजीदगी नजर नहीं आ रही थी

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और जैसे ही लखनऊ से आदेश आया की 5 फरवरी तक यह काम पूरा होना है तो बेसिक शिक्षा विभाग मेरठ के अधिकारियों को इस काम को करने की सुध आई, लेकिन काम पूरा नहीं हो पाया। 5 फरवरी भी निकल गई और 6 फरवरी को भी बड़ी संख्या में विभाग के कर्मचारी इसी काम को किसी भी तरीके से पूरा करने की जद्दोजहद करते नजर आए। बता दें कि पिछले 6 महीने से डाटा फीडिंग का काम पूरा होने की बात लगातार कहीं जा रही थी,

लेकिन काम समय पर पूरा करें तो करें कैसे जब काम समय पर करने की आदत की नहीं है। परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों और कर्मचारियों का डाटा भी पोर्टल पर फीड करने में करीब 2 साल का समय लगा था, लेकिन वहां स्कूलों की संख्या करीब 1000 थी और इन दोनों एडिट विद्यालयों के शिक्षकों और कर्मचारियों का डाटा फीडिंग करने का काम चल रहा है और ऐसे विद्यलयो की संख्या महज 56 है।

तो अंदाजा लगाया जा सकता है लापरवाही भरे रवैया के चलते डाटा फीडिंग का काम समय पर पूरा नहीं हो पाया। इस संबंध में अधिकारियों से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया। वैसे बताया जा रहा है की डाटा फीडिंग की लास्ट डेट बढ़ा दी जाएगी।

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