Sunday, May 10, 2026
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‘ब्रेक फेल सेफ मोड’ में बस चलाना बना आग का सबब!

  • बड़ौत डिपो में बस में चार दिन पहले हुए हादसे में चालक की घोर लापरवाही उजागर

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: पांच दिन पूर्व बड़ौत डिपो की बस में गाजियाबाद क्षेत्र में हुई आग लगने की घटना की जांच के दौरान एक तथ्य यह सामने आया है कि ‘ब्रेक फेल सेफ मोड’ में बस को चलाकर उसे सुरक्षित लोनी डिपो तक पहुंचाने का प्रयास निगम के लिए भारी पड़ गया। इसके अलावा चालक ने बस में आई कमी के बारे में बड़ौत डिपो पर सूचना दी, तो उसे बस को वहीं खड़ी रखकर मदद आने तक इंतजार करने के लिए कहा गया, लेकिन उसने निर्देशों का पालन नहीं किया।

गौरतलब है कि बीते बुधवार को भोर के समय हरिद्वार से दिल्ली जा रही बड़ौत डिपो की बस संख्या यूपी-30 एटी 2588 में हिंडन एयरपोर्ट के समीप आग लगने की घटना हुई थी। इस बस में सवार 19 यात्रियों को परिवहन निगम की अन्य बस में ट्रांसफर कर दिया गया था। घटना के समय बस को अमित कुमार चला रहा था, जबकि परिचालक सचिन कुमार ड्यूटी पर था। शुक्रवार सुबह हादसे की शिकार बस को खिंचवाकर मेरठ परिक्षेत्र की कार्यशाला लाया गया।

इस हादसे के कारणों की जांच के लिए आरएम केके शर्मा ने एआरएम मेरठ जगदीश सिंह की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की। जिसमें सीनियर फोरमैन मेरठ और गढ़ को शामिल किया गया है। जांच टीम ने शनिवार को बस का मुआयना करते हुए पाया कि उसकी वायरिंग अभी तक सही सलामत है। जबकि गाजियाबाद एसएम की प्रारंभिक रिपोर्ट में वायरिंग में स्पार्क होने से आग लगने का अनुमान लगाया गया था।

जिसके आधार पर मुख्यालय से बड़ौत डिपो के सीनियर फोरमैन को निलंबित कर दिया गया। जांच के तथ्यों के बारे में सूत्रों की जानकारी के मुताबिक ‘ब्रेक फेल सेफ मोड’ में बस को आगे बढ़ाना आग लगने का कारण बना है। तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि प्रेशर ब्रेक सिस्टम में हैंडब्रेक चालू होने की स्थिति में नॉरमल प्रेशर आठ तक पहुंच जाता है। अगर यह किसी वजह से छह से नीचे आ जाता है, तो हैंडब्रेक अपने आप चालू हो जाते हैं।

ऐसी स्थिति में पिछले पहिए जाम हो जाते हैं और प्रेशर बिल्कुल डाउन हो जाने पर वाहन को आठ हाथियों से भी नहीं खींचा जा सकता। जांच दल का अनुमान है कि प्रेशर चार के आसपास होने के कारण ‘ब्रेक फेल सेफ मोड’ चालू हो गया, जिसमें चालक ने लोड की ओर ध्यान दिए बगैर बस को धीमी गति से लोनी डिपो तक पहुंचाने का प्रयास किया। इसी प्रयास में घर्षण के कारण ड्रम इतने गर्म हुए कि टायरों तक में आग लग गई, जिसके बार पूरी बस चपेट में आ गई।

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सूत्रों का कहना है कि इस हादसे से पहले ब्रेक काम न करने के चलते बस में मौजूद यात्रियों को दूसरी बस में बैठाकर चालक ने बड़ौत डिपो के अधिकारियों को इस बारे में बताया था। जहां से निर्देश मिले थे कि बस को जहां है, वहीं खड़ा करके रखा जाए। और लोनी डिपो से मदद आने की इंतजार किया जाए, लेकिन चालक ने इस आदेश की अवहेलना करते हुए बस को लोनी डिपो पहुंचाने के लिए उसे धीमी गति से चलाना जारी रखा।

उसका यही प्रयास बस में आग लगने का कारण बन गया। सूत्रों का कहना है कि इस मामले में चालक पर गाज गिरना लगभग तय है, साथ ही उससे नुकसान की भरपाई भी कराई जा सकती है। इस बारे में आरएम केके शर्मा का कहना है कि अभी उनके पास जांच नहीं आई है, इसमें अभी एक-दो दिन का समय लग सकता है। जांच रिपोर्ट देखकर ही वे कुछ कह सकेंगे।

आग की घटनाओं को लेकर मुख्यालय गंभीर

सूत्रों की जानकारी के अनुसार बीते पांच साल में परिवहन निगम की करीब 60 बसें आग लगने के हादसों की शिकार हो चुकी हैं। जिसको लेकर निगम मुख्यालय ने गंभीर रुख अपनाते हुए इनकी जांच कराने का निर्णय लिया है। जिसमें तकनीकी विशेषज्ञों के माध्यम से एक रिपोर्ट तैयार कराई जाएगी। जिसके आधार पर बसों में आग लगने की आशंका को शून्य करने का प्रयास किया जाएगा।

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