- पुलिस प्रशासन के अधिकारी पहुंचे शाही ईदगाह, ईदगाह कमेटी के पदाधिकारियों के साथ बैठक
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: ईद-उल-अजहा (बकरीद) का त्योहार रविवार को मनाया जाएगा। इसके लिए तैयारियां जोरों पर हैं। पुलिस प्रशासन भी अपने स्तर से प्रशासनिक तैयरियों में कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ना चाहता। इसी कड़ी में पुलिस प्रशासन के आला अधिकारी शुक्रवार को जुमे की नमाज से पूर्व दिल्ली रोड स्थित शाही ईदगाह पहुंचे और वहां ईदगाह कमेटी के पदाधिकारियों के साथ नमाज व अन्य मुद्दों पर चर्चा की।
बैठक में ईदगाह कमेटी के मुतवल्ली सैयद सलमान सब्जवारी ने प्रशासन के समक्ष कई मुद्दों को उठाया। इनमें प्रमुख रुप से शाही ईदगाह के इर्द गिर्द जितने भी मार्ग क्षतिग्रस्त हैं उन्हे दुरुस्त करवाने की मांग की। उन्होंने रौनकपुरा नाले की सफाई का मुद्दा भी उठाया और कहा कि इससे वहां पहुंचने वाले नमाजियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
मुतवल्ली ने जैन नगर वाले रास्ते को भी ईद के दिन खुला रखने की मांग की। बैठक के दौरान सीडीओ शशांक चौधरी व एसएसपी रोहित सिंह सजवाण ने कमेटी के लोगों से अपील की कि कोई भी नई परम्परा शुरु न करें और सभी कार्य शासन की गाइड लाइन के अनुसार करें। इस दौरान प्रशसन व ईदगाह कमेटी के लोगों ने सर्वसम्मति से तय किया कि 10 जुलाई को ईद की नमाज शाही ईदगाह परिसर के अंदर ही अदा की जाएगी और इस बात के पूरे प्रयास किए जाएंगे कि कोई भी नमाजी सड़क पर नमाज अदा न करे।

इस दौरान शहर काजी प्रो. जैनुस साजेदीन सिद्दीकी व आॅल इण्डिया मिल्ली काउंसिल के अध्यक्ष कारी शफीकुर्रहमान कसमी ने भी प्रशासन के समक्ष नमाज व कुर्बानी से जुड़े विभिन्न मुद्दों को उठाया। बैठक में एडीएम सिटी, एसपी सिटी, सिटी मजिस्ट्रेट व सीओ कोतवाली के अलावा नगर निगम, जल निगम व बिजली विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे।
ईदगाह कमेटी की ओर से सैयद अनस सब्जवारी, पूर्व मंत्री डा. मैराजुद्दीन अहमद, डा. साजिद, सगीर अजमल व मो. यासीन मुख्य रुप से मौजूद थे। इनके अलावा नायाब शहर काजी जैनुल राशेदीन,कारी अफ्फान कासमी, हाजी शीराज रहमान व शाहजहां सैफी भी मौजूद थे।
जुमा: बकरीद के बयान में गूंजे ईश्वर,सेवा,मानवता जैसे शब्द
प्रेम, मानवता, ईश्वर, सेवा, दृढ़ संकल्प,अन्तर्रात्मा, बुद्धि की शुद्धि…यह शब्द किसी कथा के दौरान नहीं बल्कि जुमे की नमाज के बाद बकरीद को लेकर आयोजित हुए विभिन्न कार्यक्रमों में एक उलेमा द्वारा इस्तेमाल किए गए। आम तौर पर लगभग सभी उलेमा इस तरह के शब्दों के इस्तेमाल से परहेज करते हैं लेकिन शुक्रवार को जुमे की नमाज से पूर्व और नमाज के बाद आयोजित हुए कुछ कार्यक्रमों में यही शब्द उक्त उलेमा की जुबां की रवानी बन गए।
सदर स्थित मदरसे के मोहतमिम (प्रधानाचार्य) मौलाना मशहूदुर्रहमान चतुर्वेदी ने उक्त शब्दों का इस्तेमाल जुमे के दिन बकरीद पर्व को लेकर आयोजित तकरीरों में किया। उन्होंने शुक्रवार को सदर के अलावा सोतीगंज में दो कार्यक्रमों को सम्बोधित किया जिसमें उन्होंने हज व कुर्बानी की एहमियत पर रोशनी डाली।
इसके अलावा उन्होंने वहां मौजूद नमाजियों को शुद्ध हिन्दी भाषा में सम्बोधित किया। खास बात यह कि लोग टकटकी लगाए उन्हें सुनते रहे। मौलाना चतुर्वेदी ने कहा कि अल्लाह के बन्दों से प्रेम करो। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि सभी को मानव सेवा का दृढ़ संकल्प लेना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि यदि हम मानवता की सच्चे दिल से सेवा करेंगे तो इससे हमारी अन्तर्रात्मा शुद्ध हो जाएगी। मौलाना ने कहा कि इस प्रकार के कार्य करने से ईश्वर भी प्रसन्न होंगे। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि यह हम सब का फर्ज है कि हम लोगों में प्रेम की भावना जागृत करें। मानवता की सेवा को उन्होंने सबसे बड़ी सेवा बताया।
शान्तिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हुई जुमे की नमाज
जुमे की नमाज शान्तिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हो गई। विभिन्न मस्जिदों के बाहर इस बार भी सुरक्षा के चाक चौबंद बंदोबस्त किए गए थे। शाही जमा मस्जिद सहित विभिन्न मस्जिदों में उलेमाओं ने ईद उल अजहा को लेकर तकरीरें की। इस अवसर पर शाही जामा मस्जिद में शहर काजी प्रो. जैनुस साजेदीन सिद्दीकी और नायब शहरकाजी जैनुल राशेदीन ने बकरीद पर होने वाली कुर्बानी की एहमियत बयान की।
फलावदा के शहर काजी व जमीयत उलेमा ए हिन्द के महामंत्री कारी सलमान कासमी ने भी बकरीद पर्व की एहमियत पर रोशनी डालते हुए कुर्बानी के जज्बे को बयान किया। उन्होंने कहा कि खुदा के पास कुर्बानी का गोश्त नहीं बल्कि कुर्बानी करने वाले का जज्बा पहुंचता है।

