- राकेश टिकैत के नेतृत्व में सभी बाधाओं को पार कर ट्रैक्टरों के काफिले के साथ कलक्ट्रेट पहुंचे किसान
- बैरिकेडिंग और कलक्ट्रेट के प्रवेश द्वार पर पुलिस अधिकारियों से किसानों की धक्का-मुक्की
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत के नेतृत्व में किसानों में कलक्ट्रेट परिसर में धरना प्रदर्शन शुरू किया। ट्रैक्टर के काफिले के साथ कलक्ट्रेट पहुंचे किसानों को पुलिस बल ने प्रवेश द्वार को बंद करके वहीं पर रोकने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस अधिकारियों के साथ धक्का-मुक्की करते हुए किसान कलेक्ट्रेट परिसर में घुस गए। इससे पहले कलक्ट्रेट के बाहर लगाई गई बैरिकेडिंग को भी किसानों ने ध्वस्त कर दिया।

बुधवार दोपहर ट्रैक्टर लेकर कंकरखेड़ा और मवाना क्षेत्र के विभिन्न गांव से आए किसान कमिश्नरी पार्क पहुंचना शुरू हो गए। किसानों ने सबसे पहले कुटी चौराहे के पास लगाए गए बैरिकेटिंग को एक झटके में तोड़ दिया। कमिश्नरी पार्क के पास ही किसानों को रोकने के लिए पुलिस प्रशासन की ओर से बैरिकेडिंग लगाए गए थे, लेकिन इन्हें भी हटाकर किसानों के जत्थे आगे बढ़ते चले गए। इन्हीं के पीछे ट्रैक्टर चलते हुए राकेश टिकैत भी काफिले के साथ आगे बढ़ते चले गए।
हालांकि इस दौरान पुलिस बल ने बैरिकेडिंग के दूसरी ओर खड़े होकर बल लगाने का प्रयास भी किया, लेकिन किसानों की भीड़ के समक्ष उनके प्रयास निरर्थक होकर रह गए। कलक्ट्रेट के प्रवेश द्वार को बंद करके पुलिस बल ने किसानों को एक बार फिर रोकने का प्रयास किया, लेकिन यहां भी धक्का-मुक्की करते हुए किसानों ने प्रवेश द्वार को खुलवाते हुए ट्रैक्टरों के काफिले को अंदर प्रवेश करा दिया। इसके उपरांत धरना स्थल के गेट पर भी एक कार खड़ी की गई थी।

जिसे किसानों ने धकियाते हुए एक ओर कर दिया और सभी ट्रैक्टरों को धरना स्थल के अंदर ले जाकर कतारबद्ध तरीके से लगा दिया गया। धरना प्रदर्शन शुरू करने के दौरान पहले मीडिया से मुखातिब हुए चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि इस समय सबसे बड़ा मुद्दा एमएसपी का है। सरकार शक्ति के बल पर किसानों के आंदोलन को कुचलना का प्रयास कर रही है, लेकिन किसानों पर अत्याचार होंगे तो हम साथ होंगे।
राकेश टिकैत ने बॉर्डर पर चल रहे आंदोलन के संदर्भ में पूछने पर कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा की कल चंडीगढ़ में मीटिंग है, वहां जो भी निर्णय लिया जाएगा, उसमें हम साथ हैं। उन्होंने कहा कि किसानों का एकजुट होना जरूरी है। अगर एकजुट नहीं हुए, तो एक-एक करके सभी लपेटे में आएंगे। किसान बड़े आंदोलन के लिए तैयार रहें। किसानों को उनकी फसल की लागत भी नहीं मिल पा रही है। किसान अपने खर्च चलाने के लिए कर्जमंद होता जा रहा है।

सरकार की ओर से एमएसपी की गारंटी किसानों को दी जाए। उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाया जाए। सरकार किसानों की मांगों को मान ले, वरना ऐसे ही चलेगा। किसान सभी पार्टियों में होंगे, लेकिन आंदोलन में साथ होंगे। नोटा नहीं दबाएंगे। जिसकी सरकार बनेगी वही शोषण करेंगी। किसान का मजबूत होना जरूरी है। ये सब मौसी-मौसी के हैं, इनके मामा नागपुर में हैं। उन्होंने धरना स्थल पर आयोजित पंचायत के दौरान किसने की एकजुट पर बोल दिया
उन्होंने जयंत चौधरी का नाम लिए बगैर कहा कि जो लोग इधर-उधर जा रहे हैं, उन्हें आने-जाने दें। किसान अपने हितों की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष करें। और अपने ट्रैक्टरों को आंदोलन के लिए तैयार रखें। इस दौरान अपने समर्थकों के साथ पहुंचे वरिष्ठ नेता मुखिया गुर्जर ने अपने संगठन के स्तर से भारतीय किसान यूनियन को पूर्ण समर्थन देने का आश्वासन दिया।

वहीं मेरठ बार एसोसिएशन के महामंत्री अमित कुमार दीक्षित ने मेरठ बार एसोसिएशन की ओर से भी समर्थन का पत्र राकेश टिकैत को सौंपा। धरना स्थल पर मौजूद एटीएम और एसपी देहात को राकेश टिकैत और भाकियू जिला अध्यक्ष अनुराग चौधरी के नेतृत्व में एक ज्ञापन दिया गया। राष्ट्रपति के नाम दिए गए ज्ञापन में 15 मांगों को उठाया गया है। इनमें मूल्य वृद्धि पर नियंत्रण रखने, नई शिक्षा नीति को रद्द करके सभी के लिए मुफ्त शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी और स्वच्छता के अधिकार की गारंटी दिए जाने की मांग की गई।
वहीं सभी के लिए आवास सुनिश्चित करने, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों के निजीकरण पर रोक लगाने, बिजली संशोधन विधेयक 2022 को वापस लेने, काम के अधिकार को मौलिक बनाए जाने, किसानों के बीज, उर्वरक और बिजली पर सब्सिडी बढ़ाए जाने, एसपी की कानूनी गारंटी देने, सभी फसलों के लिए एक व्यापक सार्वजनिक क्षेत्र की फसल बीमा योजना स्थापित करने की मांग को रखा गया।
इसके साथ-साथ सभी कृषक परिवारों को कर्ज के जाल से मुक्त करने के लिए व्यापक योजना की घोषणा करने, एनपीएस को खत्म करने ओपीएस को बहाल करने, सभी को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने, संविधान के मूल मूल्य अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, असहमति का अधिकार, धर्म की स्वतंत्रता, विविध संस्कृतियों, भाषाओं, कानून के समक्ष समानता और देश की संघीय संरचना पर हमले बंद करने जैसी मांग प्रमुख रूप से उठाई गई।

पंचायत की अध्यक्षता प्रिंसिपल मदन पाल, मेजर चिंदौड़ी, सतबीर जंगेठी ने संयुक्त रूप से की। जबकि संचालन हर्ष चाहल ने किया। बाकियों जिला अध्यक्ष अनुराग चौधरी ने राकेश टिकैत समेत सभी किसानों का आभार प्रकट किया। सत्यवीर सिंह, राजकुमार करनावल, देशपाल, बबलू, हैप्पी, विनोद, नीरज, बिट्टू, मोनू, राजा, नुराज, कृष्णपाल, मनोज, अनुज आदि मौजूद रहे।
पुराने ट्रैक्टरों के साथ पहुंचे भाकियू के किसान
कलक्ट्रेट के घेराव के लिए बुधवार को पहुंचे किसानों में कई ऐसे भी शामिल रहे, जो दशकों पुराने मॉडल के ट्रैक्टर लेकर पहुंचे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के संगठन मंत्री राजकुमार करनावल के नेतृत्व में किसान 10 साल या इससे काफी पुराने ट्रैक्टर लेकर के कलक्ट्रेट पहुंचे। राजकुमार करनावल का कहना था कि पुरानी ट्रैक्टरों को लाकर वे सरकार की 10 साल पुराने वाहन न चलाने की नीति का विरोध करना चाहते हैं। उनके साथ रविंद्र सिंह दौरालिया, प्रशांत सकौती, अब्दुल गांधी, अशफाक प्रधान जैनपुर आदि मौजूद रहे।
किसाणों कै अलबेड्डे लगा रख्ये सरकार नै: टिकैत
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत अपनी चिर परिचित शैली में ही नजर आए। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों पर जमकर निशाना चाहते हुए कहा कि यह भाजपा की नहीं, पूंजीपतियों की सरकार हैं। कलक्ट्रेट में धरना प्रदर्शन के दौरान आयोजित पंचायत में राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार व्यापारियों के यहां एमएसपी पर ही खरीद कराने का कानून बनाए। सरकार किसान की फसल का केवल 10 प्रतिशत खरीदती है, जबकि 90 प्रतिशत फसल व्यापारी खरीदता है। ऐसे में व्यापारियों के लिए भी एमएसपी कानून लागू कराना जरूरी है।

किसान नेता ने कहा कि जो भी बोलता है, सरकार उसकै ही अलबेड्डे (रस्सियों से जकड़ना) लगा देती है। किसान के हाथ पैर बांध दिए गए हैं। इब किसान संज्ञान लेने लगे हैं। सड़कों पर उतरने लगे हैं। अब किसानों को एकजुट होकर और मजबूत रहकर आंदोलन के लिए भी तैयार रहने की जरूरत है। यह आंदोलन की राड़ कभी भी जुड़ सकती है। जयंत चौधरी के भाजपा से गठबंधन कर लेने के मुद्दे को उन्होंने इशारों में उठाया।
उन्होंने कहा कि कुछ लोग पूछते हैं वह तो चला गया इब के करें। भाई, जिसका जहां काम बण रह्या है, बणा लेण दो। यू इलेक्शन बहुत बड़ी बीमारी हो। इसके चक्कर में अपनी मजबूती को कमजोर करणै की जरूरत ना है। एक आदमी के पीछे क्यों पड़ रह्ये। जिब यू कुछ बण जागा, जिब की जिब देखेंगे।

