Tuesday, April 21, 2026
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खौफ: जिंदा रहना है तो शाम तक खारकीव छोड़ दो…

  • हमले के इनपुट मिलने पर पैदल निकल पड़े छात्र
  • स्टेशन और रास्ते में धमाकों से हुए दहशतजदा

जनवाणी संवाददाता |

किठौर: यूक्रेन पर रशियन सेना के हमले लगातार जारी हैं। फिलहाल खारकीव शहर सेना के निशाने पर है। बुधवार को युद्धपोतों ने यहां दो बार बमबारी की। जिससे अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। साथ चल रहे भारतीय छात्रों के ग्रुप एक-दूसरे से बिछड़ गए। जान बचाने की जद्दोजहद में भूख-प्यास से बिलख रहे तमाम लोग ट्रेन न मिलने पर पैदल ही खारकीव से निकल पड़े। देर शाम पिसोचीन के आर्मी स्कूल में उन्हें पनाह मिली। वहां उन्हें कुछ ब्रेड व बिस्किट खाने को दिए गए।

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किठौर निवासी आसिफ चैधरी का बेटा अमन खारकीव यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस प्रथम वर्ष का छात्र है। उसने बताया कि यूक्रेन के शहर खारकीव की हालत बेहद खराब है। यहां रशियन सेना के हमले जारी हैं। बुधवार सुबह खारकीव पर हमले के इनपुट मिले थे। कहा गया था कि जिंदा रहना है तो शाम छह बजे तक खारकीव छोड़ दो। इतना सुनते ही कई दिनों से बंकरों में बंद भूखे-प्यासे हजारों छात्र अपने-अपने ग्रुप बनाकर खारकीव रेलवे स्टेशन की तरफ दौड़ पड़े, लेकिन स्टेशन पर पहुंचने के कई घंटे बाद भी ट्रेन नही मिली।

छात्र ट्रेन का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे कि दोपहर लगभग 2:30 बजे स्टेशन के पास जोरदार धमाका हुआ। जिससे अफरा-तफरी मच गई। छात्रों के कई ग्रुप स्टेशन पर बने शैल्टरों में तो कई इधर-उधर घुस गए। बहरहाल लगभग एक घ्ांटा बाद हालात सामान्य हुए तो सीनियर छात्रा स्वाधि महापात्रा ने तमाम छात्रों को इकट्ठा कर यहां से 700 छात्रों के दो ग्रुप बनाए और सर्तकता बरतने की हिदायत के साथ बहुत जल्द खारकीव छोड़ने का सुझाव दिया।

जान की फिक्र में भूख-प्यास भूले छात्र

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दोनों ग्रुप्स का नेतृत्व कर रहे बिलाल अहमद, अय्यान, फैज, आहिल और मुन्ना ने बताया कि स्टेशन पर हुए धमाकों ने मिले इनपुट्स को यकीन में तब्दील कर दिया। लिहाजा तमाम साथी पैदल ही पिसोचीन की ओर रवाना हो गए। 15 किमी के इस रास्ते में अभी सात किमी ही चल पाए थे कि जोरदार दो धमाके हुए और छात्र फिर तितर-बितर हो गए। घंटों बाद शांति होने पर फिर सफर का आगाज किया। इस तरह भूख-प्यास से बिलखते ये लोग देर रात में पिसोचीन जा पहुंचे।

टूटे शरीर को मिला आसरा

बिलाल ने बताया कि खारकीव विवि से निकलकर रेलवे स्टेशन और वहां से पिसोचीन का तीस किमी. पैदल सफर कर भूखा शरीर पूरी तरह टूट चुका था। ठहरने के लिए आसरे की तलाश हुई तो पिसोचीन आर्मी स्कूल में पनाह मिल गई। आसरा मिलने पर भूख की शिद्दत महसूस की तो आर्मी ने बिस्कुट और ब्रेड खिलाकर उसको भी शांत करने में मदद की। खबर लिखे जाने तक तमाम लोग आर्मी स्कूल में ठहरे हुए थे। उनकी फ्लाइट का बंदोबस्त नही हो पाया था।

मुसीबत में मिले सुकून के पल

यूक्रेन की डेनीपर सिटी से निकला राधना का अब्दुल खालिक करीब 200 भारतीय छात्रों के साथ अभी स्लोवाकिया की हुमेन्ने सिटी के पांच सितारा होटल अलीबाबा में ठहरा हुआ है। अब्दुल खालिक ने बताया कि इस फाईव स्टार होटल में उन्हें भारतीय दूतावास की ओर से रखा गया है। जहां उनको लजीज खाने की व्यवस्था की गई है। साथ ही यह भी हिदायत दी गई है कि फ्लाइट होने तक तमाम लोग इसी होटल में ठहरे रहेंगे। एक-दो दिन में इनकी फ्लाइट हो जाएगी। बता दें कि हमले के बाद से खालिक डेनीपर से लवीव फिर स्लोवाकिया की प्रोसोव सिटी होता हुआ हुमेन्ने तक पहुंचा है।

यूक्रेन से सकुशल लौटा सरधना का युवक

सरधना: रूस द्वारा यूक्रेन पर किए जा रहे हमले ने हजारों भारतीय परिवारों की सांसे रोक दी हैं। बड़ी संख्या में भारतीय छात्र यूक्रेन में फंसे हुए हैं। गुरुवार को सरधना का युवक अफसर सिद्दीकी सकुशल यूक्रेन से घर वापस लौटा तो परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। सूचना मिलने पर एसडीएम भी छात्र से मिलने पहुंचे।

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सरधना के रामतैलया मोहल्ला निवासी अफसर सिद्दीकी पुत्र समीउज्जमा यूक्रेन के इवानो शहर में एमबीबीएस की पढ़ाई करने गया हुआ था। अफसर पांचवें वर्ष की पढ़ाई कर रहा था। अफसर ने बताया कि 24 फरवरी को यूक्रेन पर हमला हुआ तो उनसे कुछ किमी की दूरी पर स्थित हवाई अड्डे पर बमबारी की गई। जिससे छात्रों में दहशत फैली हुई थी। वह अपने अन्य साथियों के साथ 25 फरवरी को रोमानिया बॉर्डर के लिए निकला था।

करीब 150 छात्रों ने तीन बस कराए पर ली और रोमानिया बॉर्डर पहुंचे। जहां पहले ही हजारों की संख्या में लोगों की भीड़ मौजूद थी। भीड़ को देखकर उनके भी हाथ-पैर फूल गए। थे। भीड़ के चलते उन्हें करीब 10 किमी पैदल चलकर बॉर्डर तक जाना पड़ा। शाम तक बॉर्डर पहुंचे, लेकिन तब तक सभी बस जा चुकी थी। अगले दिन भारतीय दूतावास की ओर से बस आई। जिसके माध्यम से वह रोमानिया के बुच्चारेस्ट शहर में पहुंचे।

यहां छात्रों को ढाई दिन सेल्टर होम में रहना पड़ा। भारतीय दूतावास की ओर से उनके वतन लौटने की व्यवस्था की गई। देर रात वह रोमानिया से हवाई जहाज के द्वारा भारत रवाना हुए और गुरुवार सुबह दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरे। जहां परिजन पहले ही इंतजार कर रहे थे। दोपहर के समय अफसर अपने घर लौटे। युवक के घर लौटने पर परिजनों में खुशी की लहर दौड़ गई। युवक से मिलने वालों का भी तांता लगा रहा।

एसडीएम ने की छात्र से मुलाकात

सूचना मिलने पर एसडीएम सूरज पटेल भी छात्र से मिलने उसके घर पहुंचे। एसडीएम ने छात्र को बुके भेंट कर हालचाल जाना। साथ ही उसके संपर्क में रहे अन्य भारतीय छात्रों के बारे में जानकारी हासिल की।

रोमानिया बॉर्डर पर हालत खराब

छात्र अफसर सिद्दीकी ने बताया कि यूक्रेन से घर लौटने तक के छह दिन बहुत ही दहशत में गुजरे सबसे अधिक दहशत रोमानिया के बॉर्डर पर देखने को मिली। जहां बड़ी संख्या में लोग घर वापसी के लिए जमा थे। उम्मीद खत्म होती नजर आ रही थी। मगर भारतीय दूतावास की ओर से नागरिकों के लिए हर संभव कोशिश की जा रही थी। जिसके चलते छात्र अपने घर लौट पा रहे हैं।

अमेरिका के छात्र पहले ही निकल चुके थे

अफसर सिद्दीकी ने बताया कि अमेरिका व अन्य देश के छात्र उनके कई दिन पहले ही निकल चुके थे। उनके देश से एडवाइजरी जारी होते निकलने की प्रक्रिया शुरू हो गई थी। मगर भारत की ओर से देरी से एडवाइजरी जारी की गई। पहले जहां हो वहीं रहने के लिए कहा गया। इसके बाद तत्काल यूक्रेन छोड़ने के लिए कहा गया। जिसको लेकर छात्रों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

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