Saturday, May 2, 2026
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फोरेंसिक विभाग की आपराधिक घटनाओं के खुलासे में अहम् भूमिका

  • पोस्टमार्टम से मौत की इन चार प्रमुख वजहों का होता है खुलासा
  • केवल अप्राकृतिक मौत होने पर होता है पोस्टमार्टम, रिपोर्ट पुलिस के लिए बेहद जरूरी

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: इस मृत्यु लोक में जो आया है, उसे वापस भी जाना है। यह सभी को पता है, लेकिन वापस जाना यानी संसार से मुक्ति पाना या सरल भाषा में कहें कि जीवनलीला समाप्त होने की वजह क्या है, यह बड़ा सवाल है। आमतौर पर किसी हादसे, प्राकृतिक आपदा या बीमारी से होने वाली मौत के मामलों में पोस्टमार्टम नहीं कराया जाता, क्योंकि यह प्राकृतिक मौत की श्रेणी में आती है, लेकिन गोली लगना, धारदार हथियार से हमला कर मौत के घाट उतारना या जिन मामलों में मौत की पूरी वजह साफ नहीं होती है। उनमें पोस्टमार्टम कराया जाता है। वहीं, आपराधिक मामलों में पोस्टमार्टम होने के बाद पुलिस को जो रिपोर्ट मिलती वह उस केस को सुलझाने और दोषियों को सजा दिलाने में अहम् भूमिका निभाती है।

क्यों होती है पोस्टमार्टम की जरूरत यह एक ऐसा सवाल है? जिसके एक नहीं चार जवाब है। पहला मौत का कारण पता करने के लिए पोस्टमार्टम कराना जरूरी है, इसके द्वारा ही पता चलता है कि जिस व्यक्ति की मौत हुई है तो वह कौन सा कारण है? जिसकी वजह से शरीर को इतना नुकसान पहुंचा, जिससे मौत हो गई। दूसरा शरीर पर किन चोटों की वजह से मौत हुई, यानी यदि गोली या धारदार हथियार और लाठी-डंडे के हमले से मौत हुई है तो वह हमले कितने खतरनाक रहे है, जिनसे मौत हो गई। तीसरा पोस्टमार्टम से कितने समय पहले मौत हुई है या इसे कह सकते हैं कि मौत का सही समय क्या रहा होगा? यह किसी भी मौत में आरोपी के लिए काफी अहम् होता है, क्योंकि यदि आरोपी को दोषी या निर्दोष साबित करना है तो मौत के समय वह कहां था,

यह जानकारी काफी अहम् होती है। जबकि चौथा जवाब है किसी भी अज्ञात शव की पहचान कराने में पोस्टमार्टम काफी अहम् भूमिका निभाता है। क्योंकि जब पोस्टमार्टम होता है तो यह केवल शरीर के किसी एक अंग विशेष का नहीं होता बल्कि पूरे मृत शरीर का होता है। ऐसे में मृतक की लंबाई, हुलिया, रंग, शरीर पर मौजूद पहचान योग्य निशान की जानकारी आदि पता चलती है। जिससे मृतक के परिजनों को शव की पहचान करने में मदद मिलती है। यूपी के सभी 16 मंडलों में मेडिकल कॉलेज है। जिनमें फोरेंसिक डिपार्टमेंट है, जहां अटोप्सी यानी पोस्टमार्टम के बारे में पढ़ाई कराई जाती है और जिन डाक्टरों ने फोरेंसिक साइंस की पढ़ाई कर रखी होती है। वहीं, बेहतर तरीके से पोस्टमार्टम कर सकते हैं, लेकिन अब भी आमतौर पर एमबीबीएस डाक्टरों से ही पोस्टमार्टम कराया जाता है।

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