Saturday, October 23, 2021
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हरियाणा की पहली महिला सांसद चंद्रावती का निधन, गांव में हुआ अंतिम संस्कार

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जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: हरियाणा की पहली महिला सांसद और पुडुचेरी की पूर्व उपराज्‍यपाल चंद्रावती का रविवार को निधन हो गया। वह 92 साल की थीं और कुछ समय से बीमार थीं। उन्‍होंने रोहतक पीजीआई में अंतिम सांस ली। उनका वहां इलाज चल रहा था। उनके निधन से क्षेत्र में शोक छा गया। निधन की जानकारी मिलते ही काफी संख्‍या में लोग पहुंचने लगे। वह हरियाणा की प्रथम महिला अधिवक्‍ता, पहली महिला विधायक, हरियाणा विधानसभा में किसी दल की पहली महिला विधायक दल नेता और हरियाणा की पहली महिला सांसद थीं।

चंद्रावती का हरियाणा की राजनीति में कई दशक तक दबदबा रहा और वह महत्‍वपूर्ण पदों पर रहीं। वह हरियाणा की पहली महिला सांसद थीं। वह 1977 में भिवानी लोकसभा क्षेत्र से सांसद निर्वाचित हुई थीं। इसके साथ हर वह हरियाणा विधानसभा की पहली विधायक भी बनी थीं। वह हरियाणा में दो बार मंंत्री भी बनीं। वह 1964 में पहली बार मंत्री बनीं और 1966 तक मंत्री रहीं। इसके बाद वह 1972 से 1974 तक राज्‍य में मंत्री रहीं। वह 1982 से 1985 तक हरियाणा विधानसभा में नेता विपक्ष भी रहीं।

पूर्व राज्यपाल दिवंगत चंद्रावती की फाइल फोटो।

चंद्रावती की आपातकाल और उसके बाद भी हरियाणा की राजनीति में महत्‍वपूर्ण याेगदान रहा। वह 1977 में हरियाणा में जनता पार्टी की अध्‍यक्ष रहीं और इस पर पर 1879 पर रहीं। चंद्रावती को 1990 में पुडुचेरी का उपराज्‍यपाल बनाया गया था। वह फरवरी 1990 से दिसंबर 1990 तक पुडुचेरी की उपराज्‍यपाल रहीं।

उनके निधन पर विभिन्‍न राजन‍ीतिक दलों के नेताओं ने शोक जताया है और उनको भावभीनी श्रद्धांजलि दी है। चंद्रावती को श्रद्धांजलि देने लोग काफी संख्‍या में सुबह से उनके निवास पर आ रहे हैं। उनका पिछले दिनों कूल्‍हा टूट गया था और राेहतक पीजीआई में उनके इलाज में लापरवाही बरतने पर विवाद भी पैदा हो गया था। इस मामले की जांच के बाद रोहतक पीजीआई के कई अधिकारियों पर गाज भी गिरी थी।

इसी साल जून माह में वह घर पर ही गिर गई थीं। इससे उनके कुल्हे की हड्डी टूट गई थी। अभी कुछ दिन पहले तबीयत खराब होने पर उन्हें रोहतक पीजीआई में भर्ती करवाया गया था।

सादा तरीके से कर रही थीं जीवनयापन, पति की पहले ही हो गया था निधन

चंद्रावती का जन्म दादरी जिले के गांव डालावास में 3 सितंबर 1928 को हुआ था। गांव में ही प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने पिलानी के बिरला स्कूल से वर्ष 1948 में मैट्रिक कक्षा उत्तीर्ण की। उनके बड़े भाई सुमेर सिंह ने चंद्रावती को उच्च शिक्षा दिलाने की ठान ली थी। इसके बाद चंद्रावती ने संगरूर से स्नातक की तथा दिल्ली विश्वविद्यालय से एलएलबी की। शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए चंद्रावती ने अपने गांव के नजदीकी गांव पंचगांवा में महाशय मंसाराम व राजा महताब सिंह के सहयोग से कन्या गुरूकुल की स्थापना करवाई।

वह पंजाब एवं हरियाणा बार एसोसिएशन में पहली महिला अधिवक्ता थीं। हुड्डा सरकार के दौरान चंद्रावती को हरियाणा डेयरी डेवलेपमेंट फेडरेशन का चेयरपर्सन भी बनाया गया था। चंद्रावती का विवाह दादरी जिले के गांव तिवाला में हुआ था। उनके पति की पहले ही मौत हो चुकी है तथा उनकी कोई संतान नहीं है।

चौधरी बंसीलाल को हराया था चंद्रावती ने

हरियाणा के गठन के बाद भिवानी जिला हिसार लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा था। कुछ वर्षों के बाद जब भिवानी को अलग से लोकसभा क्षेत्र बनाया गया तो चंद्रावती भिवानी लोकसभा क्षेत्र से हरियाणा की पहली महिला सांसद बनीं। वर्ष 1977 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने प्रदेश के कद्दावर नेता चौधरी बंसीलाल को हराया था। चंद्रावती ने चौधरी बंसीलाल को एक लाख से अधिक मतों से शिकस्त दी थी।

ईमानदार व बेदाग छवि की नेत्री रहीं चंद्रावती

चंद्रावती की छवि एक ईमानदार व बेदाग नेत्री की रही है। वह राजनीति में काफी अहम पदों पर रहीं, उसके बावजूद अंतिम समय तक वह बिल्कुल साधारण तरीके से जीवनयापन करती रहीं। वह अपनी पेंशन से ही गुजारा करती थीं। उन्होंने पिता हजारीलाल के नाम से ट्रस्ट बनाकर खुद के मकान को भी ट्रस्ट के नाम कर दिया था।

कांग्रेसी नेता दीपेंद्र हुड्डा ने ट्वीट कर जताया शोक

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