- अभी तक इस दिशा में कोई भी शुभ समाचार क्रांतिधरा का नहीं मिला
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: महाभारत कालीन हस्तिनापुर को फिर से रेल लाइन के लिए कुछ नहीं मिला। हालांकि इसका सर्वे पूरा हो चुका हैं। उम्मीद थी कि इस बार बजट में हस्तिनापुर रेलवे लाइन के लिए अवश्य ही बजट में कुछ न कुछ मिलेगा, लेकिन उम्मीद टूट गयी। अब फिर से हस्तिनापुर की जनता को रेल लाइन से जुड़ने के लिए लंबा इंतजार ही हिस्से में आया।
यही नहीं, मेरठ को एयरपोर्ट से जोड़ने की लंबे समय से मांग चली आ रही हैं। एयरपोर्ट के मुद्दे पर भी मेरठ को बजट में कुछ नहीं मिला। कई बार सर्वे हो चुके हैं। पिछले एक दशक से दावे किये जा रहे हैं कि बीस सीटर विमान उड़ान जल्द ही भरेगा, लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई शुभ समाचार क्रांतिधरा को नहीं मिल रहा हैं।
एयरपोर्ट का कब मिलेगा तोहफा?
क्रांतिधरा की जनता लंबे समय से एयरपोर्ट की मांग कर रही हैं। कभी कहा जाता है कि ट्रमिनल थ्री मेरठ को बनाया जा रहा था। कुछ दिन ये भी सुर्खियों में बना रहा, लेकिन तब केन्द्रीय उड्डयन मंत्री चौधरी अजित सिंह हुआ करते थे। उस दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री थे अखिलेश यादव उन्होंने इसमें अवरोध पैदा कर दिया था।

तब ये अटक गया था। अब दो टर्न से केन्द्र में भाजपा की सरकार हैं। यूपी में भी दूसरी बार भाजपा की सरकार बनी हैं। ऐसे में भी क्रांतिधरा को एयरपोर्ट का तोहफा नहीं मिल रहा हैं। इस बार भी बजट में एयरपोर्ट का कहीं जिक्र नहीं हुआ हैं। आखिर वादे और घोषणाएं ही चल रही हैं। धरातल पर एयरपोर्ट का प्लान कब उतरेगा, इसी पर जनता की निगाहें लगी हुई हैं?
नहीं मिला हस्तिनापुर रेल लाइन के लिए बजट
हस्तिनापुर को रेल लाइन से जोड़ने के लिए बजट में जगह नहीं मिली। हालांकि जब पहली बार नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बने तो बजट में हस्तिनापुर को रेल लाइन से जोड़ने के लिए बजट में जगह दी गई थी। इसके सर्वे के लिए कुछ धनराशि बजट में रखी गई थी। हालांकि पिछले दिनों राज्यमंत्री दिनेश खटीक केन्द्रीय रेल मंत्री से मिले थे तथा दावा किया था कि हस्तिनापुर को रेल लाइन से जोड़ने के लिए तेजी से काम चलेगा। इसके लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया की जाएगी,

लेकिन ये सब ठीक हैं, लेकिन बजट में हस्तिनापुर का कोई जिक्र नहीं आया। इसलिए स्पष्ट हो गया है कि हस्तिनापुर अभी रेल लाइन से जोड़ने की योजना लंबी खींच सकती हैं। इस बजट में हस्तिनापुर की जनता को भी बड़ा झटका लगा हैं। हस्तिनापुर ही नहीं, बल्कि बिजनौर से लेकर पानीपत के बीच जो गांव व कस्बे पड़ते हैं, उनको रेल लाइन से जुड़ने के बाद बड़ी राहत मिल सकती थी। इसका सर्वे तो पूरा हो चुका हैं, लेकिन अब बजट की दरकार थी, जो नहीं मिला।

