Monday, October 3, 2022
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HomeUttar Pradesh NewsMeerutबन रहा होटल, आंख मूंदे है एमडीए इंजीनियर

बन रहा होटल, आंख मूंदे है एमडीए इंजीनियर

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  • रोहटा बाइपास स्थित शोभापुर पुलिस चौकी के पीछे चल रहा अवैध निर्माण

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: रोहटा बाइपास स्थित शोभापुर पुलिस चौकी के ठीक पीछे होटल की बड़ी बिल्डिंग बनाई जा रही है। रात दिन होटल का काम चल रहा है। इसका कोई मानचित्र स्वीकृत नहीं है। एक नहीं, बल्कि कई और भी बिल्डिंग अवैध रूप से यहां पर बनकर तैयार हो गई है। मेरठ विकास प्राधिकरण के इंजीनियर आंखें मूंदे बैठे हैं। इसमें किसी तरह की कार्रवाई प्राधिकरण इंजीनियरों की तरफ से नहीं की जा रही है। यही वजह है कि पुलिस चौकी के ठीक पीछे होटल समेत कई बड़े निर्माण चल रहे हैं।

मेरठ विकास प्राधिकरण के इंजीनियरों ने पुलिस को भी लिखकर कुछ नहीं दिया, ताकि अवैध निर्माण को यहां पर पुलिस रोक सके। रात दिन निर्माण चल रहे हैं, लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि मेरठ विकास प्राधिकरण के इंजीनियरों को यह बड़े निर्माण दिखाई नहीं देते। ऐसा तब है जब कमिश्नर सुरेंद्र सिंह अवैध निर्माणों को लेकर तमाम सख्ती किए हुए हैं। कमिश्नर पिछली एमडीए की बोर्ड बैठक में भी इंजीनियरों को खूब नसीहत दे चुके हैं। फिर भी अवैध निर्मार्णों पर अंकुश नहीं लग रहा है।

रोहटा बाइपास स्थित शोभापुर पुलिस चौकी के ठीक पीछे वर्षों से अवैध निर्माण चल रहा है। क्योंकि जिस तरह से अवैध निर्माण किए गए हैं, वो एक दिन का नहीं है, बल्कि लंबे समय से यहां अवैध निर्माण चल रहे हैं, लेकिन वर्तमान में होटल का बड़ा निर्माण चल रहा है। उसको तो प्राधिकरण के इंजीनियर रोक सकते हैं, लेकिन उसको भी निर्माण करने की खुली छूट दे रखी है। अवैध निर्माण रोकने की बात तो हर माह होने वाली समीक्षा बैठक में भी की जाती है, लेकिन धरातल पर काम नहीं हो रहा है।

इंजीनियरों पर उनकी भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि इतने बड़े निर्माण यहां चल रहे हैं लेकिन इंजीनियरों के खिलाफ कोई कार्रवाई विभाग के अधिकारी नहीं कर रहे। इंजीनियरों का तबादला कर देना कोई सजा नहीं,बल्कि विभागीय कार्रवाई होनी चाहिए। यही वजह है कि इंजीनियर सिर्फ कागजी खानापूर्ति कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं। यह एनएच-58 पर सुनियोजित विकास के दावे तो किए जाते हैं, लेकिन यहां पर विकास अवैध बिल्डरों की मर्जी से चल रहा है।

बिल्डरों का नहीं तो रेरा में पंजीकरण है और नहीं मानचित्र स्वीकृत कराये जाते हैं। इन पर कोई शिकंजा नहीं कसा जा रहा हैं, जो बिल्डर रेरा में पंजीकृत है, उस पर कार्रवाई की जा रही हैं। वैसे काम कर रहा है। रोहटा रोड बाइपास पर देखा जाए तो ग्रीन बेल्ट है, लेकिन इस ग्रीन बेल्ट में होटल और मकानों की बिल्डिंग बनकर खड़ी हो गई है। कई दुकानें भी बन गई है।

दुकानों पर भी कोई कार्रवाई मेरठ विकास प्राधिकरण की तरफ से नहीं की गई। तथाकथित बिल्डर सुनील सिद्धू अवैध कॉलोनी विकसित कर चले गए और भोले भाले लोगों को फंसाकर छोड़ गए। क्योंकि अब जिन लोगों ने अवैध निर्माण किया है, उन पर मेरठ विकास प्राधिकरण कार्रवाई करेगा। क्या मेरठ विकास प्राधिकरण के इंजीनियर अवैध कॉलोनी को विकसित करने वाले तथाकथित बिल्डर सुनील सिद्धू के खिलाफ भी कोई कार्रवाई होगी?

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