Sunday, May 10, 2026
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बिलेश्वरनाथ मंदिर में मंदोदरी करती थी पूजा

  • यहीं पर रावण से हुई थी मुलाकात, मंदिर में मंदोदरी सखियों संग आती थी पूजा पाठ करने

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: यूं तो शहर में सिद्धपीठ और शिव मंदिरों का अपना एक अलग इतिहास है, लेकिन शहर के सदर क्षेत्र स्थित श्री बिलेश्वरनाथ शिव मंदिर की एक अलग मान्यता है। बताया जाता है कि त्रेतायुग में रावण की पत्नी मंदोदरी रोज भगवान शिव की पूजा करने के लिए अपनी सखियों संग इस मंदिर में आया करती थी।

भगवान भोलेनाथ ने मयदानव की पुत्री मंदोदरी की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें इसी मंदिर में दर्शन दिए थे और वरदान मांगने के लिए कहा था। मंदोदरी ने भगवान भोलेनाथ से इच्छा जताई थी कि उनका पति धरती पर सबसे विद्वान और शक्तिशाली हो।

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बताया जाता है कि इसके फलस्वरूप इसी मंदिर में रावण से मंदोदरी की पहली मुलाकात हुई थी, जिसके बाद दोनों का विवाह हुआ। बता दें कि दो हजार गज जमीन में फैले श्री बिल्लेश्वर शिव मंदिर परिसर में करीब 150 वर्ष पुराना गुरुकुल भी है। जिसका नाम बिल्लेश्वर संस्कृत महाविद्यालय है। जिसमें 50 से अधिक बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे है।

सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद होती है पूरी

मंदिर के पुजारी पं. हरीशचंद्र जोशी ने बताया कि मान्यता है कि जो सच्चे मन से भोलेनाथ की पूजा करता है, उसकी हर मनोकामना पूरी होती है। महाशिवरात्रि और शिवरात्रि पर प्रति वर्ष लाखों कांवड़ मंदिर के शिवलिंग पर चढ़ाई जाती है।

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हर सोमवार को सैकड़ों लोग अपनी मनोकमाना लेकर मंदिर आते है। जब भक्तों की मनोकामना पूरी हो जाती है तो वह शिव पार्वती की पोषाक चढ़ाने के बाद भंडारे का आयोजन करते है।

मयदानव ने कराया था भंडारा

पुराणों के अनुसार मेरठ का प्राचीन नाम मयदानव का खेड़ा था और वह राक्षसपुरा का राजा था। मेरठ मयदानव की राजधानी थी। मयदानव की एक पुत्री थी, जिसका नाम मंदोदरी था। उसके नाम से ही इस नगर का नाम मयराष्ट्र पड़ा था।

मंदोदरी शिव की बहुत बड़ी भक्त थी। मंदोदरी ने अपने पिता से ही श्री बिल्लेश्वर शिव मंदिर में भंडारा कराने की बात कही थी। मयदानव ने लोगों को मंदिर में एकत्रित कर भंडारा किया था।

ऐसे प्रसन्न होते है भोलेनाथ

ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर को भगवान भोलेनाथ का आर्शीवाद प्राप्त हैं, जो कोई भी इस मंदिर में सच्चे मन और श्रद्धा से भगवान शिव की अराधना करता है और 40 दिन तक शिवलिंग के पास दीपक जलाता है उसकी मनोकामना पूरी होती है। मंदोदरी ने भी 40 दिन इस मंदिर में दीपक जलाकर भगवान को प्रसन्न किया था।

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