Thursday, May 14, 2026
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जनपद में नजर आएंगे आधुनिक शिक्षा और आदर्श गांव के मॉडल

  • साफ-सफाई की उन्नत व्यवस्था के साथ लाइब्रेरी और सरकारी स्कूलों में आधारशिला लैब का हो रहा निर्माण

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: जैसा पुराने किस्से कहानियों में जिक्र किया गया है, अब वो गांव अब बदल रहे हैं। ग्रामीणों के रहन-सहन में बदलाव की दिशा में किए गए प्रयासों के सुखद परिणाम मेरठ जनपद में शुरू किए गए हैं। जिसके अंतर्गत गांवों में साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था कराते हुए कूड़े के सही निस्तारण के साथ आय का जरिया बनाया जा रहा है। ग्राम स्तर पर अब तक 170 लाइब्रेरी और सरकारी स्कूल में एक आधारशिला लैब की स्थापना कराकर बच्चों को शहर जैसी आधुनिक शिक्षा का माहौल दिया जा रहा है।

परिवर्तन प्रकृति का नियम है, यह एक शास्वत सत्य है। आज गांवों में पहले जैसे हालात नहीं रह गए हैं। गांवों के लिए सरकारी स्तर पर विभिन्न योजनाओं ने इनके स्वरूप को आधुनिक रंग में ढाला है, लेकिन इसमें भी कोई संदेह नहीं कि गांवों को शहरों के नजदीक ले जाने के लिए अभी बहुत से प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। जिला पंचायत राज अधिकारी रेनू श्रीवास्तव ने कुछ नए कदम उठाने का प्रयास मेरठ जनपद में किया है।

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इसके अंतर्गत सबसे पहले बात सफाई की दिशा में की गई पहल के बारे में करते हैं। रेनू श्रीवास्तव बताती हैं कि सोलिड-लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट योजना को मॉडल के तौर पर मेरठ ब्लॉक के ग्राम मोहिउद्दीनपुर और रजपुरा ब्लॉक के ग्राम इंचौली में गीले और सूखे कूड़े के अंतर और स्वभाव के बारे में ग्रामीणों को जागरूक किया गया है। सबसे पहले डोर-टू-डोर कूड़ा उठवाने की व्यवस्था की गई है।

जिसके लिए स्व रोजगार योजना के अंतर्गत 10 लोगों की टीम को एक गांव में लगाया गया है। टीम हर घर से प्रतिदिन एक से दो रुपये की एवज में सेवा देती है। यह टीम घर-घर से कूड़ा उठाने का काम करती है। इसमें सूखे कूड़े को बिजली बनाने वाली कंपनी खरीद रही है। जो 60 टन प्रतिदिन कूड़ा खरीदने की क्षमता रखती है। वहीं गीले कूड़े से जैविक खाद बनाने की प्रक्रिया शुरू कराई गई है। इसके लिए गड्ढे बनाकर उनके ऊपर शेड लगाया गया है।

इस प्रक्रिया से जैविक खाद बनाकर उसकी बिक्री की जा सकेगी। रेनू श्रीवास्तव बताती हैं कि जनपद की हर ग्राम पंचायत में लाइब्रेरी बनाने का उनका सपना है। अब तक जिले के 170 ग्राम पंचायत भवनों में एक कक्ष लेकर वहां लाइब्रेरी बनाई जा चुकी है। इन लाइब्रेरी में सदस्यता शुल्क देकर बच्चे विभिन्न विषयों से संबंधित पुस्तकें पढ़ रहे हैं। इससे ग्राम पंचायत की आय में भी थोड़ी वृद्धि हो रही है।

सिवाया, मटौर, कैली आदि की लाइब्रेरी काफी विकसित हुई हैं, जिनमें विभिन्न संस्थाओं ने पुस्तकें उपलब्ध कराई हैं। इंचौली स्थित प्राइमरी पाठशाला में आधारशिला लैब की स्थापना की गई है। लैब में मौजूद विज्ञान की सामग्री और माहौल को देखने के लिए कई पब्लिक स्कूल के बच्चे भी भ्रमण कर चुके हैं। रेनू श्रीवास्तव का कहना है कि उन्होंने आधुनिक शिक्षा की दिशा में अलख जगाने का प्रयास किया है। जिसे ग्राम प्रधानों से लेकर जनप्रतिनिधियों के स्तर से संचित किए जाने की आवश्यकता है।

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