Sunday, April 19, 2026
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क्रांतिधरा पर कूड़े के पहाड़ बने बदहाली के सबब

  • आपने पथरीले-बर्फीले पहाड़ देखें होंगे, यहां कूड़े के पहाड़ देखिए
  • कूड़े के पहाड़ देखने हैं तो लोहियानगर के कूड़ा निस्तारण प्लांट आइये
  • कछुआ गति से भी कम गति से डंप किए गए कचरे की छटनी का कार्य
  • कोर्ट की फटकार के बाद भी लोहिया नगर में निगम द्वारा डलवाया जा रहा कूड़ा

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: देश विदेश में आपने अब तक बर्फीले एवं पथरीले पहाड़ देखे होंगे, लेकिन निगम की मेहरबानी से आपको मेरठ-हापुड़ मार्ग पर लोहिया नगर स्थित कूड़ा निस्तारण प्लांट में कूड़े के के पहाड़ देख सकते हैं। एनजीटी कोर्ट की फटकार के बाद भी कूड़े के ढेर रूपी पहाड़ों की ऊंचाई जेसीबी से और भी बढ़ाया जा रहा है। कूड़ा निस्तारण के लिये बनाए गये, इस प्लांट में कूड़ा निस्तारण कब तक होगा यह कहना तो मुश्किल है, लेकिन अब तक जितना कूड़ा वहां पर पड़ा है।

उसमें 15 से 20 वर्ष उसकी छटनी के कार्य में ही लग जायेंगे। कछुआ गति से भी कम गति से कूड़ा छटनी का कार्य चल रहा है। एनजीटी कोर्ट में बहस के दौरान नगरायुक्त पर जो तल्ख टिप्पणी की गई उसका भी निगम के अधिकारी एवं कर्मचारियों पर शायद कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है। तभी तो प्रतिदिन सैकड़ों टन कूड़ा प्रतिबंध के बावजूद वहां पर डाला जा रहा है। जिससे प्रतिदिन कूड़े के पहाड़ों की ऊंचाई को निगम के द्वारा बढ़ाया जा रहा है।

क्रांतिधरा की आबादी करीब 26 लाख पार हो चुकी है। जिसमें प्रतिदिन घरों से काफी मात्रा में गीला एवं सूखा कूड़ा कचरा भी निकलता है। जिस समय महानगर की आबादी कम थी तब कूड़ा सड़क किनारे या खुली जगह में कहीं भी डाला जा सकता था, लेकिन जैसे-जैसे आबादी बढ़ी तो ठीक वैसे-वैसे कूड़ा डालने की जगह निर्धारित करने के साथ ही उसके निस्ताण का भी कार्य किया जाने लगा, लेकिन जिस तरह से कूड़ा निस्तारण पर करोड़ों रुपये नगर निगम के द्वारा प्रतिवर्ष खर्च किया जा रहा है।

उसके बावजूद न तो महानगर की साफ-सफाई व्यवस्था पटरी पर दिखाई पड़ रही है। वहीं, कूड़ा निस्तारण स्थल पर भी उनका निस्तारण तो छोड़िए कूडेÞ की छटनी का कार्य कछुआ गति से भी कम गति से किया जा रहा है। निगम के द्वारा हापुड़ रोड़ स्थित लोहिया नगर में मई 2011 में कूड़ा निस्तारण स्थल के लिये जगह चिन्हित कर वहां पर कूड़ा डलवाया जाने लगा। कुछ समय तो कूड़ा डालने में नगर निगम को कोई परेशानी इसलिये नहीं हुई कि ग्राउंड में खाली जगह पड़ी थी तो कहीं पर भी कूड़ा डाल दिया जाता था,

लेकिन समस्या बढ़ी और कूड़ा निस्तारण के लिये एनजीटी के नियमों के चलते कूडेÞ के घरों से पृथक्करण के साथ अलग-अलग वाहनों के माध्यम से कूड़ा निस्तारण केंद्र तक पहुंचाने के लिये निगम के द्वारा बीबीजी कंपनी को ठेका देना पड़ा। जिसमें महानगर में इसके लिये हरा एवं नीले रंग के डस्टबिन भी करोड़ों रुपये खर्च कर रखवाए गये और वाहनों पर भी करोड़ों रुपये निगम के द्वारा खर्च किए गये। बावजूद उसके आज भी अलग-अलग गीला एवं सूखा कूड़ा कचरा एकत्रित नहीं किया रहा।

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दोनों तरह का कूड़ा एक ही वाहन में भरकर अवैज्ञानिक तरीके से निस्ताण के नाम पर कूडेÞ के ढ़ेर के नाम पर डाला जा रहा है। मई 2011 से मई 2023 तक यदि लोहिया नगर के डंपिंग ग्राउंड में कितने टन कूड़ा डाला गया और कितने कूड़े को छटनी किया गया तो कछुआ गति से भी कम कार्य चल रहा है। जिसमें यदि आज वहां पर कूड़ा डालना बंद कर दिया जाये तो करीब 15 से 20 वर्ष तो उस कूड़े की छटनी में ही बीत जायेंगे यदि सही तरह से निस्तारण करेंगे तो और भी कई साल लग सकते हैं।

लोहिया नगर स्थित कूड़ा निस्तारण प्लांट पर अब तक कितना कूड़ा डाला जा सका है, उसको देखें तो वह लाखों टन में है। प्रतिदिन 800 से 900 टन के करीब कूड़ा महानगर से लोहिया नगर पहुंचता है। 12 वर्षों में 800 से 900 टन प्रतिदिन के हिसाब से करीब 35 से 40 लाख टन कूड़ा अब तक वहां पर डाला जा चुका है और कूड़ा निस्तारण तो छोड़िए अगस्त 2021 से फरवरी 2023 तक दो वर्ष के अंदर तीन से चार लाख टन कूड़े का निस्तारण नहीं बल्कि छटनी का कार्य ही किया जा सका है।

30 से 35 लाख टन कूड़ा अभी बिना छटनी के ही कूड़े के पहाड़ के रूप में दिखाई दे रहा है। जबकि नियम यह है कि प्रतिदिन घरों से निकलने वाले कूड़े को ढेर के रूप मे एकत्रित नहीं करके उसका प्रतिदिन निस्तारण कराना होता है। जबकि यहां तो यदि कूड़े के छटनी के कार्य को देखा जाये तो 15 से 20 वर्ष लग सकते हैं। जो आगे कूड़ा डाला जा रहा है, उसको निस्तारण करने में कितना समय लगेगा।

जितना आंकड़ा लोहिया नगर स्थित कूड़ा निस्तारण प्लांट का बताया जा रहा है। वह सटीक नहीं है, उसमें कुछ अंतर है, मेरे पास अभी सटीक जानकारी उपलबध नहीं है। संबंधित लिपिक से जानकारी करके बताया जायेगा।
-डा. हरपाल सिंह, प्रभारी मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी एवं पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी नगर निगम मेरठ।

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