- बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं बुखार के मरीज, पर्चा व दवा काउंटर पर लंबी कतारें
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: मेडिकल की ओपीडी पर बुधवार को उमड़ी मरीजों की भीड़ ने डेंगू के बेकाबू होने के सबूत दिए। ओपीडी के अलावा पर्चा काउंटर और दवा काउंटर पर भी मारमारी मची रही। वहीं दूसरी ओर दवा काउंटर पर उमस से लोग बेहाल नजर आए। इस दौरान कुछ महिलाएं जो घंटों से दवा के लिए कतार में लगी थीं, बेहोश हो गयीं।
सबसे बुरा हाल उन बच्चों का था जिनको बहुत छोटे होने की वजह से घर नहीं छोड़ सकते थे और साथ ले आए थे। उमस में ऐसे मासूम बुरी तरह बिखल रहे थे। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भले ही स्वीकार न करें, लेकिन मेडिकल की ओपीडी में नजर आ रही बुखार के मरीजों की भीड़ सबूत है कि डेंगू बेकाबू हो चला है।
अधिकारी भले ही कुछ भी दावें करते रहे, लेकिन हकीकत यह है कि बुखार के मरीज जिसमें बड़ी संख्या में वायरल के केस भी शामिल हैं, लगातार बढ़ रहे हैं। लेकिन स्वास्थ्य विभाग बुखार के बढ़ रहे केसों को डेंगूु की श्रेणी में गिनने को तैयार नहीं। इसको बुखार ही मानकर चल रहे हैं। हालांकि यदि आंकड़ों की बात की जाए तो कोई दिन ऐसा नहीं जब डेंगू के केस न मिल रहे हों। मंगलवार को भी 28 नए केस मिले थे।
वहीं दूसरी ओर डेंगू की जांच कील बात की जाए तो संक्रमितों के सैंपल लेने से लेकर जांच रिपोर्ट आने तक सरकारी लैब की दशा शोचनीय और प्राइवेट पैथ लैब की जांच को ना या फिर अनाप शनाप वसूली से साफ है कि दावे हकीकत से कोसों दूर हैं। हालांकि सीएमओ ने जांच के लिए रेट भी तय कर दिए हैं। लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे मामले हैं जिनमें अनाप शनाप वसूली जांच के नाम पर की जा रही है।
इसके अलावा सबसे बड़ी मुसीबत डेंगू व वायरल पीड़ितों को भर्ती कराना है। प्राइवेट अस्पताल तो पहले से ही डेंगू के मरीजों से कन्नी काटते दिखते है। उधर दवा को लेकर भी संकट है। बताया गया है कि बाजार में डेंगू की दवा मुनासिब दामों पर मिल रही है और ना ही लैब में टेस्ट की सुविधा माकूल है या यूं कहें उनकी कालाबाजारी की जा रही है। यदि मिल भी रही है तो महंगे दामों पर खरीदने की मजबूरी है।

