Wednesday, April 22, 2026
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पाकी का कंपाउंडिंग मानचित्र निरस्त, गिरेगी बिल्डिंग

  • शताब्दीनगर डिवाइडर रोड पर हुआ है अवैध फैक्ट्री का निर्माण

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: पाकी इंटरप्राइजेज की शताब्दीनगर स्थित बिल्डिंग का कंपाउंडिंग मानचित्र मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए) ने निरस्त कर दिया है। प्राधिकरण में पाकी इंटरप्राइजेज की बिल्डिंग का कंपाउंडिंग मानचित्र दाखिल किया गया था, जिसकी जांच पड़ताल के बाद प्राधिकरण इंजीनियरों ने इसे रिजेक्ट कर दिया है।

दरअसल, तीन हजार वर्ग मीटर जमीन में शताब्दीनगर स्थित डिवाइडर पर अचार की फैक्ट्री बनाई जा रही है। यह फैक्ट्री पंकज गोयल की बताई गई है। इंजीनियरों की टीम ने जो कंपाउंडिंग मानचित्र मेरठ विकास प्राधिकरण में दाखिल किया गया था, उसकी मौके पर जाकर जांच पड़ताल की, जिसमें लिंटर के आगे निकाले गए छज्जे पर तीन मंजिल तक बिल्डिंग उठा दी गई है, जो नियमविरुद्ध है।

इसी वजह से पूरी बिल्डिंग को कंपाउंडिंग के दायरे से बाहर कर दिया गया हैं। यही नहीं, सर्विस रोड पर फैक्ट्री मालिक ने टॉयलेट के टैंक बना दिए। इसका उल्लेख भी इंजीनियरों ने अपनी रिपोर्ट में किया हैं। इस वजह से भी कंपाउंडिंग के मानचित्र को निरस्त करना बताया जा रहा है। फिर फैक्ट्री के चारों दिशाओं में दमकल विभाग की गाड़ी के घूमने का भी कोई व्यवस्था नहीं है।

बेसमेंट बनाया गया है, लेकिन उसके अनुसार पूरी बिल्डिंग को कवर कर दिया गया है। इन तमाम बिंदुओं को देखते हुए मेरठ विकास प्राधिकरण की टीम ने कंपाउंडिंग मानचित्र पर सवाल उठाते हुए निरस्त कर दिया गया है। अब पाकी इंटरप्राइजेज के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई है। अब प्राधिकरण की तरफ से बिल्डिंग को गिराने के आदेश कभी भी किए जा सकते हैं।

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क्योंकि बिल्डिंग की कंपाउंडिंग नियमानुसार नहीं हो सकती। इस वजह से फैक्ट्री मालिक को बड़ा झटका लगा है। अब देखना यह है कि मेरठ विकास प्राधिकरण इंजीनियरों की टीम इस फैक्टरी पर बुलडोजर कब चलाती हैं। जो मानचित्र स्वीकृत हैं, उसको भी एमडीए निरस्त कर सकता हैं।

पूरी बिल्डिंग ही एमडीए की दृष्टि से गलत बना दी गई हैं। जिसको लेकर प्राधिकरण सचिव ने रिपोर्ट तलब कर ली हैं। क्योंकि इस बिल्डिंग को लेकर कुछ लोगों ने शिकायत की थी, जिसके बाद ही इसकी जांच पड़ताल आरंभ हुई, तभी इसकी कंपाउंडिंग मानचित्र को निरस्त करने की बात एमडीए के अधिकारियों ने बतायी हैं।

कंपाउंडिंग के नाम पर इंजीनियरों ने की लीपापोती

कंपाउंडिंग मानचित्र को लेकर एमडीए के इंजीनियर लापापोती करने में जुटे थे। कंपाउंडिंग मानचित्र एक वर्ष पहले दिया गया था, जिसे जेई ने लटका कर रखा। जेई जानते थे कि बिल्डिंग गलत बनी हुई हैं। इसके बाद भी कंपाउंडिंग के नाम पर पूरे प्रकरण को लंबा खींच दिया। अभी भी कंपाउंडिंग मानचित्र निरस्त होने के बाद ही फाइल को दबाकर रखा गया हैं, जिस पर कोई कार्रवाई आगे नहीं की जा रही हैं। इसके बाद बिल्डिंग तोड़ने की जो प्रक्रिया होनी चाहिए थी, वो नहीं की गई।

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