Saturday, January 22, 2022
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मेरठ-करनाल हाइवे पर गड्ढे बने मुसीबत

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गहरे गड्ढों में गिरकर राहगीर हो रहे चोटिल, बारिश से हालात और भी खराब, शासन के दावों की खुली पोल

जनवाणी संवाददाता |

कंकरखेड़ा: सरकार सड़कों को गड्ढामुक्त बनाने का दावा तो कर रही है, लेकिन कंकरखेड़ा क्षेत्र की कई सड़कें ऐसी हैं, जो गड्ढों से भरी हैं। इन पर चलना बेहद खस्ताहाल हैं। ये सड़कें शासन के दावों की पोल खोल रही हैं। खास बात यह है कि गड्ढों में तब्दील हो चुकीं इन सड़कों के निर्माण के लिए ठोस कदम नहीं उठाया गया। जनप्रतिनिधि हों या अधिकारी! उनकी गाड़ियां इन्हीं सड़कों में बने गड्ढों से होकर निकलती हैं।

यह हाल तब है, जब योगी सरकार सभी सड़कों को गड्ढामुक्त करने का दावा कर रही है। क्षेत्र में आमजन के सुहाने सफर का सपना यहां की सड़कों पर बने अनगिनत गड्ढों में हिचकोले खा रहा है। विभाग एवं जनप्रतिनिधियों का सड़कों के चकाचक और गड्ढामुक्त होने का दावा कंकरखेड़ा में धूल फांक रहा है। अत्यंत क्षतिग्रस्त सड़कों पर सफर कर रहे लोग आये दिन दुर्घटना के शिकार हो रहे हैं।

जी हां! मेरठ-करनाल हाइवे की सड़कें गड्ढामुक्त नहीं गड्ढायुक्त हो चली हैं। कुछ एक सड़कों को छोड़ अधिकांश सड़कों की दयनीय दशा से लोगों का आवागमन खतरनाक हो गया है। आलम यह है कि कंकरखेड़ा क्षेत्र की क्षतिग्रस्त सड़कों में गड्ढों के भरमार के चलते लोग रास्ता बदलकर आ जा रहे हैं। सड़क पर हजारों गड्ढे मुख्यमंत्री के गड्ढामुक्त अभियान की पोल खोल रहे हैं। यह सड़क अपने हाल पर आंसू बहा रही है।

हाइवे पर घुटने तक कौन कहे लगभग कमर तक गहरे गड्ढे हो गए हैं, जिसमें आये दिन राहगीर गिरकर घायल हो रहे हैं। मेरठ-करनाल मार्ग पर नंगलाताशी और सैनिक विहार डिवाइडर रोड के निकट सड़क के गड्ढे वाहन चालकों के लिए बड़ी मुसीबत बन चुके हैं। यहां से गुजरने वाले लोगों को बड़ा खतरा है। आए दिन दुर्घटना होती रहती है, लेकिन प्रशासन लोगों की समस्या का समाधान नहीं कर रहा।

दरअसल सैनिक विहार सी ब्लॉक कॉलोनी के सामने धर्मकांटा बना है। यहां पर ओवरलोडेड ट्रक और डंपर आते रहते हैं। जिन्होंने मुख्य हाइवे को तोड़कर क्षतिग्रस्त कर दिया है। अब हालात इस कदर बदतर हो गए हैं कि यहां से वाहन चलना तो मुश्किल है ही, पैदल चलना भी बड़ा कठिन हो गया है।

यह मेरठ-करनाल राज्य मार्ग है, लेकिन हालात देहात क्षेत्र से भी बदतर हो गए हैं। लोगों की शिकायत के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही। हालांकि यह हाइवे सरधना की तरफ से बनता हुआ आ रहा है, लेकिन यहां के हालात ज्यादा बदतर है। लोगों का कहना है यदि समस्या का जल्द समाधान नहीं होता तो है आंदोलन करने को मजबूर हो जाएंगे।

इन सड़कों पर चलना मुश्किल

मेरठ-करनाल हाइवे पर भी जगह जगह गड्ढे मुसाफिरों का इस्तकबाल करते हैं। इन सड़कों से होकर गुजरने वाले यात्री मजबूरी में भी दुबारा यात्रा न करने की दुहाई देते हैं। हाइवे पर गहरे गड्ढे लोगों के धैर्य का इम्तिहान लेते हैं। जगह जगह गड्ढे लोगों की परेशानी बढ़ा रहे हैं। सड़क की दयनीय दशा यात्रियों को रुला रही है।

सफर की डगर भी कठिन

क्षेत्र में सड़कों की बदहाली की सूरत यह है कि यहां पर जीवन के अंतिम सफर की डगर भी काफी कठिन है। हाइवे पर चलने के लिए क्षेत्रीय नागरिकों को लोहे के चने चबाने पड़ते हैं। लगभग दो किमी की सड़क गड्ढे में है या सड़क में गड्ढे हैं। इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। इसके बावजूद प्रशासन और जनप्रतिनिधि मेरठ-करनाल हाइवे की मरम्मत के लिए उदासीन हैं, जिसके चलते लोगों के लिए सफर की डगर काफी कठिन हो गई है।

सरकार का विकास का दावा झूठा

भाजपा सरकार केवल विज्ञापन में सड़कों को बना रही है। गड्ढामुक्त सड़कों के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर बंदरबांट की गई। धरातल पर सड़कों की दशा और दिशा बदलने के लिए चार साल में भाजपा ने कुछ नहीं किया है। जिले में तमाम सड़कें बदहाल हैं। मगर दुरुस्त करने के बजाय सरकार विज्ञापन के जरिये विकास का झूठा दावा कर रही है।

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