जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: पटना में सोमवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जनसुराज अभियान के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर एक के बाद एक गंभीर आरोपों की बौछार कर दी। उन्होंने सम्राट चौधरी को शिल्पी-गौतम हत्याकांड का “संदिग्ध अभियुक्त” बताते हुए दावा किया कि उस समय चौधरी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) से जुड़े थे और सीबीआई ने उनसे इस मामले में पूछताछ भी की थी।
प्रशांत किशोर ने क्या कहा ?
प्रशांत किशोर ने कहा, “सम्राट चौधरी उर्फ राकेश कुमार का नाम शिल्पी हत्याकांड में था। उस केस की सीबीआई जांच भी हुई थी। उनका सैंपल लिया गया, पूछताछ हुई, लेकिन लालू यादव सरकार ने साधु यादव को बचाने के लिए पूरा केस खत्म करवा दिया। आज जनता के सामने सबकुछ लाना जरूरी है।”
“हत्या का आरोपी है राज्य का उपमुख्यमंत्री” – पीके
प्रशांत किशोर ने कहा कि सम्राट चौधरी पर एक नहीं, बल्कि कुल छह लोगों की हत्या का आरोप है। उन्होंने दावा किया कि 1998 में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सदानंद सिंह की हत्या में भी सम्राट चौधरी का नाम सामने आया था।
“बम विस्फोट कर सदानंद सिंह समेत छह लोगों की हत्या की गई थी। सम्राट चौधरी इस मामले में जेल गए और छह महीने बाद नाबालिग होने का दावा कर रिहा हो गए। क्या बिहार की जनता को यह नहीं जानना चाहिए कि उसका डिप्टी सीएम हत्या का आरोपी रहा है?” – प्रशांत किशोर ने सवाल उठाया।
इस्तीफे की मांग और सीएम-प्रीम को घेरा
पीके ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी सवाल पूछते हुए कहा, “क्या ऐसे व्यक्ति को बिहार का उपमुख्यमंत्री बनाना तर्कसंगत है? हत्या के आरोपों से घिरे व्यक्ति से तुरंत इस्तीफा लिया जाना चाहिए। अगर सम्राट चौधरी निर्दोष हैं, तो खुद सामने आकर बताएँ कि क्या सीबीआई ने उनसे पूछताछ नहीं की?” उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सम्राट चौधरी चुप्पी नहीं तोड़ते, तो अगली बार वह सीबीआई रिपोर्ट को सार्वजनिक कर देंगे।
पहली बार मंत्री बने तो लगा उम्र घोटाले का आरोप
प्रशांत किशोर ने यह भी दावा किया कि जब सम्राट चौधरी पहली बार मंत्री बने, तो उम्र घोटाले का मामला सामने आया था। इसके चलते उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ा था। उन्होंने सवाल किया कि आखिर एक व्यक्ति पर इतने गंभीर आरोपों के बावजूद उसे सत्ता में कैसे रखा जा सकता है?
राजनीतिक तापमान बढ़ा
प्रशांत किशोर के इन बयानों से बिहार की राजनीति में एक बार फिर उबाल आ गया है। अब देखना यह है कि सम्राट चौधरी या सरकार की तरफ से क्या प्रतिक्रिया आती है और क्या यह मुद्दा आगामी चुनावों में कोई बड़ा मोड़ लाता है।

