नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। सावन का पावन महीना चल रहा है और इस बार सावन का दूसरा सोमवार 10 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के सोमवार के दिन भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से भक्तों को विशेष फल की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि सावन में महादेव अपने भक्तों की सच्ची श्रद्धा से शीघ्र प्रसन्न होते हैं और उन्हें सुख, समृद्धि, सौभाग्य एवं स्थिरता का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस बार सावन के दूसरे सोमवार पर आर्द्रा नक्षत्र और वज्र योग का संयोग बन रहा है। ऐसे शुभ अवसर पर भगवान शिव की आराधना के साथ श्री शिव रुद्राष्टकम का पाठ करना विशेष फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि रुद्राष्टकम के नियमित पाठ से जीवन में सकारात्मकता आती है और करियर, कारोबार तथा पारिवारिक जीवन से जुड़ी परेशानियों में राहत मिल सकती है।
श्री शिव रुद्राष्टकम पाठ
नमामीशमीशान निर्वाणरूपं
विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम्।
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं
चिदाकाशमाकाशवासं भजेहम्॥
निराकारमोङ्कारमूलं तुरीयं
गिराज्ञानगोतीतमीशं गिरीशम्।
करालं महाकालकालं कृपालं
गुणागारसंसारपारं नतोहम्॥
तुषाराद्रिसंकाशगौरं गभीरं
मनोभूतकोटिप्रभाश्री शरीरम्।
स्फुरन्मौलिकल्लोलिनी चारुगङ्गा
लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा॥
चलत्कुण्डलं भ्रूसुनेत्रं विशालं
प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम्।
मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं
प्रियं शङ्करं सर्वनाथं भजामि॥
प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं
अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशम्।
त्र्यःशूलनिर्मूलनं शूलपाणिं
भजेहं भवानीपतिं भावगम्यम्॥
कलातीतकल्याण कल्पान्तकारी
सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी।
चिदानन्दसंदोह मोहापहारी
प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी॥
न यावद् उमानाथपादारविन्दं
भजन्तीह लोके परे वा नराणाम्।
न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं
प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासम्॥
न जानामि योगं जपं नैव पूजां
नतोऽहं सदा सर्वदा शम्भुतुभ्यम्।
जराजन्मदुःखौघ तातप्यमानं
प्रभो पाहि आपन्नमामीश शम्भो॥
रुद्राष्टकम पाठ करने के नियम
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रुद्राष्टकम का पाठ करने के लिए कुछ नियमों का पालन करना शुभ माना जाता है।
- प्रातःकाल स्नान करने के बाद भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करें और उसके पश्चात रुद्राष्टकम का पाठ करें।
- स्वच्छ एवं सफेद आसन पर बैठकर एकाग्र मन से पाठ करना शुभ माना जाता है।
- संभव हो तो खाली पेट और शांत एवं शुद्ध मन से रुद्राष्टकम का पाठ करें।
- शिवलिंग का जलाभिषेक करने के बाद रुद्राष्टकम का पाठ करना विशेष फलदायी माना जाता है।
- पाठ के दौरान मन को शांत रखें और पूरी श्रद्धा एवं भक्ति के साथ भगवान शिव का स्मरण करें।
रुद्राष्टकम पाठ के धार्मिक लाभ
शिव रुद्राष्टकम भगवान शिव की स्तुति का एक महत्वपूर्ण स्तोत्र माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसके पाठ से मन को शांति मिलती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
मान्यता है कि रुद्राष्टकम के पाठ से सुख-समृद्धि, सम्मान और सफलता की प्राप्ति के मार्ग प्रशस्त होते हैं। वहीं, विवाह योग्य लोगों को योग्य एवं मनचाहा जीवनसाथी मिलने का आशीर्वाद प्राप्त होने की भी मान्यता है।
इसके अलावा, करियर और कारोबार से जुड़ी परेशानियों में राहत मिलने तथा कार्यों में सफलता प्राप्त होने की भी धार्मिक मान्यता है। सावन के पावन सोमवार पर श्रद्धापूर्वक भगवान शिव का पूजन और रुद्राष्टकम का पाठ भक्तों को आध्यात्मिक शांति एवं शिव कृपा का अनुभव करा सकता है।

