Wednesday, October 20, 2021
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Homeसंवादकोरोना महामारी में दिव्यांगजनों का पुनर्वास

कोरोना महामारी में दिव्यांगजनों का पुनर्वास

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कोरोना महामारी में दिव्यांगजनों का पुनर्वास विषयक नई सुबह, मानसिक स्वास्थ व व्यवहार विज्ञान संस्थान, वाराणसी द्वारा आयोजित एक दिवसीय नि:शुल्क राष्ट्रीय वेवीनार का सफल आयोजन किया गया जिसमें मुख्य अतिथि के रुप में डॉ जितेंद्र यादव निदेशक, सीआरसी, राँची ने कहा कि मानसिक स्वास्थ पुनर्वास हेल्पलाइन किरण 1800 5990 019 पर दिव्यांगजन अपने मानसिक स्वास्थ संबंधी समस्याओं का निराकरण नि:शुल्क प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को प्रत्येक ग्राम सभा में पुनर्वास कर्मी की नियुक्ति करनी चाहिए जो बहुदिव्यांगता पर प्रशिक्षित हो ताकि सभी दिव्यांगजनों तक पुनर्वास सेवाएं पहुंचाई जा सके। वेबीनार को गेस्ट आँफ ऑनर के रूप में संबोधित करते हुए प्रगति पांडेय ने कहा कि कोरोना महामारी के कारण दिव्यांग चुनौतियों का सामना कर रहे हैं वे उपलब्ध सेवाओं एवं सुविधाओं का उपयोग करने में सक्षम नहीं हो पा रहे हैं सरकार अनेक ऐसे उपाय कर रही है जिसे दिव्यांगजनों को कम से कम यात्रा करने करना पड़े तथा अधिकांश सेवाएं उन्हें उनके स्थान पर ही प्राप्त हो जाए।

वेबीनार के चेयरपर्सन एवं नई सुबह संस्था के संस्थापक अध्यक्ष डॉ अजय तिवारी ने कहा कि कोरोना महामारी में दिव्यांगजन अनेक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं चुनौतियों से कैसे निपटा जाए इसके उपायों पर चर्चा करने के लिए विशेषज्ञ के बीच यह वेबीनार आयोजित किया गया है ताकि नए उपायों के माध्यम से कम से कम जोखिम की स्थिति में दिव्यांगजनों के पुनर्वास को सफल किया जा सके। वेबीनार के को-चेयरपर्सन व वाराणसी के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ मनोज तिवारी ने कहा कि कोरोना महामारी को ध्यान में रखकर भारतीय पुनर्वास परिषद को ऐसे सतत् पुनर्वास शिक्षा का आयोजन व्यापक रूप से पूरे देश में करना चाहिए, जिससे कोरोना महामारी के कारण उत्पन्न पुनर्वास के क्षेत्र में चुनौतियों से सफलतापूर्वक निपटा जा सके।

वेबीनार में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए डॉ भाग्यश्री कर, विभागाध्यक्ष, नैदानिक मनोविज्ञान, नई सुबह ने आकर्षक पीपीटी प्रस्तुति के माध्यम से दिव्यांगजनों के चुनौतियों से निपटने के उपायों पर विस्तृत व्याख्यान दिया। प्रीति बाजपेई, स्टेट मेंटल हेल्थ कंसलटेंट, बिहार ने कहा कि कोरोना महामारी में सरकारी व गैर सरकारी संस्थाओं को मिलकर उत्पन्न नई चुनौतियों को सामना करने में विशेषज्ञों का सहयोग करना चाहिए। दिव्या चौहान, सहायक प्रवक्ता, एमिटी यूनिवर्सिटी, मध्यप्रदेश ने बताया कि दिव्यांगजनों के अभिभावक विभिन्न चुनौतियों का सामना कर रहे हैं व उन चुनौतियों का सामना करने के उपायों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

 

वेबीनार में विभिन्न प्रदेशों से लगभग 200 नैदानिक मनोवैज्ञानिक, पुनर्वास मनोवैज्ञानिक, परामर्शदाता, सामाजिक कार्यकर्ताओ ने सहभागिता किया। वेबीनार के सफल संचालन में डॉ अमित, सुनीता तिवारी, अर्पिता मिश्रा, आजाद तिवारी व धर्मेंद्र सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। कार्यक्रम का संचालन व अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन वेबीनार की सचिव ज्योत्सना सिंह ने किया।

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