Wednesday, January 19, 2022
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प्रोत्साहन बिना सिसक रहा कैंची कारोबार

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  • क्रांतिधरा की कैंची पर महंगाई की पड़ रही मार
  • मजदूरी और कैंची के बनाई में भी हो रहा अतिरिक्त खर्च
  • सरकार की ओर से नहीं दी गई कोई राहत

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: लावड़ में कंबल उद्योग, सरधना व मेरठ का हैंडलूम उद्योग का पूरी दुनिया में डंका बजता था। बैंडबाजे उद्योग भी कम नहीं था। विदेशा में इसके पार्ट जाते थे। कैंची उद्योग मेरठ का गौरव था। अब यह कैंची उद्योग सिसक रहा है। आखिर इन उद्योग की दुर्गति के लिए कौन जिम्मेदार हैं? ये उद्योग आगे बढ़ने चाहिए थे, मगर अब दम तोड़ रहे हैं।

इनको क्या कागजों में प्रोत्साहन दिया जा रहा है, धरातल पर कुछ भी दिखाई नहीं देता। वास्तविकता क्या हैं? इसी को जानने के लिए जनवाणी ने ग्राउंड स्तर पर इसको लेकर तहकीकात की। देश में आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है।

इसके तहत मेरठ में डाक विभाग की ओर से एक लिफाफा लॉच किया गया। जिस पर मेरठ की कैंची का इतिहास छपा है। शुभारंभ भी सांसद राजेन्द्र अग्रवाल ने किया, लेकिन प्रदेश सरकार शायद वर्तमान में कैंची निर्माताओं की समस्याओं का समाधान करना भूल गई है। आज के हालातों में कैंची बनाने में इस्तेमाल होने वाले उत्पाद महंगे हो चुके हैं।

कैंची निर्माताओं की मांग है कि उन्हें नुकसान से उभरने के लिये जीएसटी में छूट दी जाये, लेकिन उनकी मांगों को अनसुना किया जा रहा है। कैंची निर्माताओं की हकीकत से लगता है सरकार ने भी मुंह फेर लिया है।

मेरठ में सैकड़ों वर्षों से कैंची का निर्माण होता है। मेरठ की कैंची देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी मशहूर है, लेकिन जितनी कैंची मशहूर है, उसकी इतनी ही अनदेखी की जा रही है। देश में आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है, लेकिन बढ़ती महंगाई से किसी को सरोकार नहीं है।

आज कैंची के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले पीतल समेत सभी चीजों के दाम आसमान पर पहुंच चुके हैं, लेकिन प्रदेश सरकार इस उद्योग की ओर ध्यान नहीं दे रही है। जीएसटी भी उद्यमियों के लिये मुसीबत बनी हुई है। जीएसटी की जटिलता के कारण व्यापारी व्यापार नहीं कर पा रहे हैं।

महंगाई का असर इस कदर कैंची उद्योग पर पड़ा है कि जो कैंची पहले 100 रुपये के खर्चे पर तैयार होती थी। वह आज 125 रुपये में खर्च हो रही है ऐसे में मार्किट में कैंची किस दाम में बेची जा रही है इसका अंदाजा आप खुद लगा सकते हैं।

लगातार बढ़ रहा भाड़ा

कैंची निर्माताओं की मानें तो बढ़ती महंगाई का सबसे अधिक असर इन उद्योगों पर पड़ा है। कैंची मेरठ से महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों में भेजी जाती है। इसके अलावा विदेशों में भी इसकी सप्लाई होती है, लेकिन बढ़ती महंगाई के कारण कैंची के दाम भी दिन ब दिन बढ़ते जा रहें है।

दाम बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण महंगाई है। डीजल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। जिस कारण माल भाड़ा बढ़ जाता है और कैंची को दूसरे राज्यों में भेजने के लिये अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है। पहले जो कैंची 180 रुपये में बेची जा रही थी वो अब 230 रुपये से शुरू हो रही है। यह कुछ माह का ही अंतर है। अगर यही हालात रहे तो कैंची और महंगी होगी।

100 रुपये किलो बढ़े पीतल के दाम


मेरठ स्थित केके सीजर्स के संचालक आदिल ने बताया कि कैंची उद्यमियों को अब अपना व्यापार करने में बहुत सी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कैंची देश का नाम रोशन कर रही है, लेकिन उतना ही कैंची निर्माताओं को अनदेखा किया जा रहा है। कोई सहूलियत सरकार की ओर से निर्माताओं को नहीं दी जा रही है ऊपर से बढ़ती महंगाई ने सारी कसर पूरी कर दी है। उन्होंने बताया कि कोरोना के कारण व्यापार पूरी तरह से चौपट हो चुका था, इस साल कुछ आर्डर आये तो महंगाई के कारण आॅर्डर पूरे करने में मुश्किलें पैदा हो रही है। आर्डर पूरे भी किये जो उनमें इतना प्रोफिट नहीं की हम व्यापार को आगे बढ़ा सकें। उन्होंने बताया कि कोरोना से पहले पीतल 460 रुपये किलो पड़ रहा था, लेकिन अब उन्हें यह पीतल 560 रुपये किलो पड़ रहा है। ऊपर से साढ़ रुपये इसकी ढलाई में चले जाते हैं। जिस कारण कीमत और बढ़ रही है। सरकार कोई छूट करने को तैयार नहीं है। पहले आठ इंच में जो कैंची 100 रुपये के खर्च पर तैयार हो रही थी। अब वह 125 रुपये के खर्च में तैयार हो रही है। जैसे-जैसे साइज बढ़ेगा वैसे-वैसे खर्चा बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि उनके पास दुबई समेत कई जगहों से आर्डर आते हैं, लेकिन आर्डर को पूरा करने में परेशानी होती है सरकार कोई प्रोत्साहन नहीं कर रही है।

जीएसटी में नहीं दी जा रही कोई छूट


कैंची निर्माता आमिर सैफी ने बताया कि जीएसटी की जटिलता के कारण भी उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार से लगातार मांग की जा रही है कि कैंची उद्योग में जीएसटी में छूट दी जाये, लेकिन उनकी मांग को नहीं सुना जा रहा है। मेटिरियल की खरीद पर भी जीएसटी में कोई छूट नहीं है। व्यापार के सिलसिले में कई छोटे बड़े शहरों में जाना होता है, लेकिन जहां लोग बिना जीएसटी दिये कैंची खरीदना चाहते हैं वहां समस्याएं आ जाती हैं और आर्डर कैंसिल हो रहे हैं। उन्होंने कैंची निर्माताओं को कैंची और मेटिरियल में जीएसटी में छूट दिये जाने की मांग की है।

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