- किठौर से पकड़ी गई थी तेंदुए की मादा शावक
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: किठौर के भगवानपुर बांगर गांव में अप्रैल में मिले तेंदुए के मादा शावक शिंभी को गोरखपुर भेजा गया था। जहां वह बेहद खुश है और उसने मां के बिना भी रहना सीख लिया है। निगरानी में लगे वनकर्मी और वाइल्ड लाइफ विशेषज्ञों की टीम उसका ख्याल रख रही है।
किठौर के भगवानपुर बांगर में मिले तेंदुआ शावक को मां से मिलाने के प्रयास काफी किए गए थे। मादा तेंदुआ शावक के आसपास कई बार पहुंचकर लौट गई थी। वनकर्मियों ने बताया था कि शावक दो-तीन सप्ताह का था। मेरठ से विशेष तौर पर मादा शावक को गोरखपुर भेजा गया था। वहां उसे अलग पिंजरे में रखा गया था।

शुरुआत में मादा शावक को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा और उसे मां के बिना रहने के लिए खुद को तैयार करने में परेशानी आई और बाद में उसने दुनिया में जीने की कला सीख ली। डीएफओ राजेश कुमार ने बताया कि उनकी अक्सर गोरखपुर चिड़ियाघर में बात होती है और मादा शावक के बारे में पूछताछ करते रहते हैं। उन्होंने बताया कि अब मादा तेंदुआ शिंभी आठ महीने की हो गई है और काफी एक्टिव हो गई है।
अभी उसे अकेले ही रखा जा रहा है बाद में उसे पिंजरे में रखा जाएगा। उन्होंने बताया की शावक की काफी देखभाल की जा रही है और उसने खुद को नई जगह में रहने के लिए ढाल लिया है। इस मादा शावक का मेरठ से नाता जुड़ा होने के कारण हर कोई उसको लेकर उत्सुक रहता है। गौरतलब है मेरठ का तेंदुओं से नजदीकी रिश्ता बन गया है। आए दिन तेंदुओं की दस्तक से दहशत फैल जाती है। सदर क्षेत्र में ही ज्यादा तेंदुए दिखाई देते हैं।

