- शहर के मंदिरों में अभी भी श्रद्धालुओं के पहुंचने की संख्या में है कमी
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: लॉकडाउन के बाद शुरु हुई अनलॉक प्रक्रिया के तहत शहर के सभी मंदिरों को करीब डेढ़ महीने पहले खोल दिया गया था। जिसमें शुरुआत में श्रद्धालुओं का मंदिरों में पहुंचना न के बराबर ही रहा, लेकिन अभी भी मंदिरों में स्थिति सामान्य नहीं हो पाई है। मंदिरों में इन दिनों कुछ ही लोग पहुंच रहे हैं। हालांकि मंदिरों के कपाट समय से रोजाना खोले जा रहा हैं।
वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण के चलते लॉकडाउन में सभी धार्मिक स्थलों को भी बंद किया गया था। जिसके बाद से काफी समय में श्रद्धालु मंदिरों के दर्शन करने के लिए तरस रहे थे। जिला प्रशासन द्वारा 22 सितंबर को गाईडलाइंस जारी करते हुए सभी धार्मिक स्थलों को खोलने की अनुमति दे दी गई थी। जिसमें मंदिर में एक समय में सिर्फ सौ लोगों को प्रवेश और किसी भी मूर्ति या धार्मिक ग्रंथ को छूने की मनाही की शर्त भी रखी थी।

मंदिरों को खुले अब करीब दो महीने पूरे होने जा रहे हैं, लेकिन अब भी स्थिति सामान्य की तरह नहीं हो पाई है। मंदिर पुजारियों का कहना है कि पिछले दिनों त्योहार के चलते मंदिर में भक्तों की संख्या अधिक दिखाई दी। लेकिन रोजाना की बात करें तो सिर्फ कुछ ही श्रद्धालु मत्था टेकने आते हैं। अभी पहले जैसा माहौल नहीं हो पाया है।
मंदिरों के पुजारियों ने कहा
श्री बिल्वेश्वर नाथ महादेव मंदिर, पंडित हरीशचंद्र जोशी का कहना है कि अभी मंदिर में कुछ लोग ही दर्शन करने के लिए आ रहे हैं। शिवलिंग पर जलाभिषेक की अनुमति दे दी गई है, लेकिन मंदिर में मूर्तियों को छूने की अनुमति अभी नहीं दी गई है। सिर्फ रोजाना आने वाले कुछ ही भक्त ही दर्शन करने पहुंच रहे हैं। उधर, मां मंशा देवी मंदिर, पंडित भगवत गिरी का कहना है कि मंदिर में दर्शन करने के लिए कम ही श्रद्धालु आ रहे हैं।

सिर्फ लड़का-लड़कियों के रिश्ते दिखाने वाले ही लोग आ रहे हैं। कोरोना के चलते मंदिर में सावधानियों बरती जा रही हैं। श्रद्धालुओं की पहले जैसी संख्या अभी तक नहीं हो पाई है। वहीं, प्रबंधक बाबा औघड़नाथ मंदिर, दिनेश शर्मा ने बताया कि मंदिर में अभी ज्यादा भक्तों को प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। वहीं, आम दिनों के मुकाबले दर्शन करने के लिए श्रद्धालु अब भी कम ही आ रहे हैं। गर्भ ग्रह में शिवलिंग को छूने की अनुमति भी अभी नहीं दी गई है। जिससे श्रद्धालुओं में मासूसी छाई हुई है।

