जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनता से किफायती जीवनशैली अपनाने की अपील के बाद सोमवार को घरेलू शेयर बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 845 अंक गिरकर 76,482.51 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 237.90 अंक की गिरावट के साथ 23,936.85 पर कारोबार कर रहा था। वहीं, रुपया डॉलर के मुकाबले 145 पैसे टूटकर 94.96 पर आ गया।
वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी मुद्रा भंडार की सुरक्षा को लेकर पीएम मोदी की अपील का असर शेयर बाजार पर स्पष्ट दिखा। सप्ताह के पहले दिन ही सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में रहे। प्रधानमंत्री की गैर-जरूरी सोने की खरीद पर लगाई गई सलाह के बाद ज्वैलरी सेक्टर के शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई।
सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट
वॉल स्ट्रीट से मिले कमजोर संकेतों और विदेशी मुद्रा निकासी की चिंताओं ने निवेशकों का मनोबल गिराया। सोमवार को ओपनिंग बेल पर बीएसई सेंसेक्स 950.16 अंक (1.23%) की गिरावट के साथ 76,378.03 पर खुला। निफ्टी 50 भी 275.90 अंक (1.14%) टूटकर 23,900.25 पर आया।
पीएम मोदी की अपील और ज्वैलरी शेयरों पर असर
रविवार को पीएम मोदी ने विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने के लिए जनता से अनावश्यक विदेश यात्राओं और डेस्टिनेशन वेडिंग से बचने की अपील की। साथ ही उन्होंने घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने और एक साल तक गैर-जरूरी सोने की खरीद से बचने का अनुरोध किया। इसके बाद ज्वैलरी सेक्टर में भारी गिरावट आई:
- सेन्को गोल्ड लिमिटेड: 8.98% गिरकर 332.60 रुपये
- कल्याण ज्वैलर्स इंडिया लिमिटेड: 7.43% गिरकर 393 रुपये
- टाइटन कंपनी लिमिटेड: 5.34% गिरकर 4,268.10 रुपये
- पीसी ज्वैलर लिमिटेड: 3.89% गिरकर 9.13 रुपये
कच्चे तेल और महंगाई की चिंता
बैंकिंग और बाजार विशेषज्ञ के अनुसार, ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों को लेकर चुनौतियां बढ़ रही हैं। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (ओएमसी) का मासिक घाटा 30,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जिससे पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ गई है।
वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और अर्थव्यवस्था
इस्राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से वैश्विक अनिश्चितता बढ़ी है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव, साथ ही आगामी ट्रंप-शी जिनपिंग शिखर सम्मेलन ने बाजार की उम्मीदों को कमजोर किया है।
आनंद राठी के मुख्य अर्थशास्त्री के अनुसार, भारत की मैक्रोइकॉनॉमी मजबूत है, पीएमआई और घरेलू मांग लगातार बनी हुई है। बावजूद इसके, होर्मुज जलडमरूमध्य के पास तनाव, लॉजिस्टिक बाधाएं और उच्च तेल कीमतें महंगाई की चिंता को बढ़ा रही हैं।
केंद्रीय बैंक वैश्विक मूल्य दबावों के कारण ब्याज दरों में कटौती को लेकर सतर्क हैं। ऑटो और आईटी सेक्टर ने कुछ हद तक निवेशकों का मनोबल बनाए रखा, जबकि बैंकिंग और मेटल सेक्टर कमजोर आय के चलते संघर्ष कर रहे हैं।
रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले शुरुआती कारोबार में 139 पैसे टूटकर 94.90 पर खुला। अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने और विदेशी निवेशकों के भारी बहिर्वाह ने भी स्थानीय मुद्रा पर दबाव डाला। शुक्रवार को रुपया 71 पैसे मजबूत होकर 93.51 पर बंद हुआ था।

