Saturday, December 4, 2021
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HomeUttar Pradesh NewsMeerutडिमांड नहीं, टूट सकती है कारोबार की सप्लाई चेन

डिमांड नहीं, टूट सकती है कारोबार की सप्लाई चेन

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  • आने वाले 15 दिन उद्यमियों के लिए बेहद ही नाजुक
  • लगातार झटकों से सहमे मोहकमपुर औद्योगिक क्षेत्र के कारोबारी
  • लॉकडाउन के बाद से तमाम कोशिशों के बाद भी अभी बेपटरी हालात
  • जो कुशल श्रमिक लौट गए, अनिश्चितता की स्थिति के चलते वो वापसी को तैयार नहीं

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: डिमांड न होने से छोटे व मझौले उद्योगों के कारोबार की सप्लाई चेन टूट कसती है। परतापुर इंडस्ट्रीयल एरिया व मोहकमपुर स्थित आईआईए से संबंध करीब 700 ऐसे उद्योग हैं जिन पर कारोबारी लिहाज से संकट के बादल मंडराने की आशंका जतायी जा रही है। अगले 15 दिसंबर के बाद का समय ऐसे उद्योगों के लिए बेहद नाजुक समझा जा रहा है। लंबे चले लॉकडाउन के बाद किसी प्रकार कारोबारी गाड़ी को पटरी पर लाने की कोशिश में लगे ऐसे कारोबारियों के लिए मुश्किल भरा समय हो सकता है।

छोटे व मझौले उद्योगों की यदि बात की जाए तो कुछ नीतियों या गैर जरूरी फैसलों के चलते लगातार झटके लगते रहे हैं। किसी प्रकार उबरते हैं तो फिर दूसरा झटका लग जाता है। नोटबंदी के झटके से उबरे तो फिर जीएसटी लागू किए जाने के बाद कारोबारी रफ्तार में कुछ ब्रेक लगा। जैसे-तैसे कारोबार ने रफ्तार पकड़नी शुरू ही की थी कि अचानक कोरोना का बड़ा संकट पूरे राष्ट्र पर आ गया। लंबे लॉकडाउन से काम धंधे चौपट हो गए।

सबसे बड़ी समस्या तो सरकार की क्रय शक्ति घट जाना है। क्रय शक्ति ही नहीं घटी सरकार से जो भुगतान मिलना है वो भी रुका है। आईआईए के मेरठ चैप्टर के चेयरमैन अनुराग अग्रवाल का कहना है कि लॉकडाउन के बाद यदि अभी की बात की जाए तो यूं तो कहने को इंडस्ट्रीज में 50 फीसदी रनिंग पोजिशन में आ गयी हैं, लेकिन इसको लेकर कुछ अधिक उत्साहित होने की जरूरत नहीं। पिछले जो कारोबारी चमक दिखाई दे रही थी वो क्षणिक थी। पिछली डिमांड, फिर त्योहारी व शादियों के सीजन उससे थोड़ी डिमांड बढ़ी थी, लेकिन एमएसएमई के लिए जो रुटीन डिमांड चाहिए वो अभी नजर नहीं आती। आने वाले एक पखवाडे के बाद हालात ज्यादा खराब हो सकते हैं।

आशंका के चलते श्रमिक भी नहीं लौटे

एमएसएमई हो या अन्य कारोबार, श्रमिकों को यदि शत-प्रतिशत रोजगार की गारंटी हो तो वो तमाम बाधाएं पार कर भी अपने काम पर लौट आते हैं, लेकिन मेरठ के ही संदर्भ में यदि बात करें तो अनलॉक के बाद लौटने वाले श्रमिकों की संख्या बेहद नगण्य है। श्रमिकों की बापसी को लेकर उत्साहित होने जैसी कोई बात नहीं। वैसे भी फिलहाल कारोबार की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है।

सरकारी मदद का इंतजार

एमएसएमई खासतौर से मेरठी इंडस्ट्रीज की बात की जाए तो यहां का एक बड़ा वर्ग सरकारी आर्डर पर आश्रित है, लेकिन वो पूरी तरह से बंद हैं। इसके अलावा जो सरकार पर बकाया है उसका भी भुगतान नहीं किया जा रहा है। ऐसे में भला कैसे अस्तित्व बचा रह सकता है।

मदद नहीं कर्जदार बनाने की कोशिश

लॉकडाउन के बाद सरकार चाहती तो एमएसएमई सेक्टर का जो बकाया है उसका तत्काल भुगतान व नए आर्डर जारी कर बड़ी राहत दे सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। बजाय मदद के एमएसएमई सेक्टर को कर्जा आफर किया गया। जब काम ही नहीं तो कर्जा लेकर क्या करेंगे।

अफसरों का कागजी खानापूर्ति पर जोर

एमएसएमई सेक्टर को राहत को लेकर यूं तो तमाम घोषणाएं की गयीं, लेकिन जिन अफसरों पर इसकी जिम्मेदारी है वो ही जानकारी के अभाव में फिलहाल कागजी खानापूर्ति पर अधिक जोर दे रहे हैं। आईआईए के नेशनल चेयरमैन का कहना है कि अफसरों को लेश मात्र भी एमएसएमई सेक्टर की परेशानियों का आभास नहीं।

एक्सप्रेस-वे व रैपिड ट्रेन से नहीं कोई मदद

मेरठ-दिल्ली एक्सप्रेस-वे व रैपिड ट्रेन को लेकर एमएसएमई सेक्टर से जुड़े कारोबारी कोई अच्छा उम्मीद नहीं लगाए हैं। उनका कहना है कि मेरठ में कोई बड़ी सीमेंट या फिर सरिया फैक्ट्री नहीं है। जबकि जो काम चल रहे हैं वो पुराने हैं नया प्रोजेक्ट नहीं। दूसरे मेरठी एमएसएमई को उससे कोई फायदा होता नजर नहीं आ रहा है।

आईआईए के मेरठ चेप्टर के चेयरमैन अनुराग अग्रवाल बताते हैं कि 15 दिसंबर के बाद का समय एमएसएमई कारोबारियों के लिए अग्नि परीक्षा के समान होगा। सरकार की ओर से मदद के लिए हाथ बढ़ाने के बजाए हाथ बांध लेने सरीखी स्थिति है। ऐसे में भला कैसे खुद को बचाए रखा जा सकता है।

आईआईए के नेशनल प्रेसीडेंट पंकज गुप्ता का कहना है कि एमएसएमई सेक्टर बेहद नाजुक दौर से गुजर रहा है। सरकार को बगैर किसी देरी के बड़े प्रोजेक्ट शुरू करन चाहिए। इतना ही नहीं उनका काम खुद ही अपने हाथ में लेना होगा। एमएसएमई सेक्टर मुख्यत सरकारी खरीद पर आधारित होता है। इसके अलावा कोरोना के यूटर्न से इस सेक्टर में दहशत का माहौल है।
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