Sunday, June 21, 2026
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Tag: अमृतवाणी

महल या धर्मशाला

एक संन्यासी राजमहल के दरवाजे पर पहुंचा और द्वारपाल से बोला, ‘मैं इस मकान में रहना चाहता हूं।’ द्वारपाल ने समझा कि कोई सिरफिरा...

हिंसा-अहिंसा

हिंसा चाहे कितने ही उचित कारणों से की जाए कहलाती हिंसा ही है। उसका किसी भी काल, कारण, स्थिति, के कारण ‘अहिंसा’ में परिवर्तन...

अहिंसा और बंदूक

कस्बे में एक महात्मा थे। सत्संग करते और लोगों को धैर्य, अहिंसा, सहनशीलता, संतोष आदि के सदुपदेश देते। एक बार भक्तों ने कहा, महात्मा...

अनासक्त बनिए

एक बुढ़िया बहुत भुलक्कड़ थी। घर का कोई काम करना होता, उसे वह भूल जाती। बड़ी समस्या थी। एक दिन उसने यह समस्या अपने...

बकरी और चतुराई

एक बकरी के पूरे शरीर पर नर्म-मुलायम लंबे बाल थे। वह खुद को बहुत होशियार समझती थी। एक दिन वह घास चर रही थी,...

प्रसिद्धि की वजह

संस्कृत साहित्य में एक कथा है। एक व्यक्ति ने पूछा, ‘मैं प्रसिद्ध कैसे बनूं’ उससे पूछा गया, ‘अच्छे तरीके से या बुरे तरीके से?’...
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