Tuesday, June 15, 2021
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फरियादियों ने सीएम के काफिले में घुसने का किया प्रयास, पुलिस ने रोका

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जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: साहब! एक बार उन्हें सीएम योगी आदित्यनाथ से मिलने दो…उनसे मिलेंगे तो उनका दर्द कुछ कम हो जाएगा। सीएम को पीड़ा सुनाने के लिए ही वो यहां पर आई है। इस बीच पुलिस लाइन की तरफ से सीएम की गाड़ियों का काफिला जैसे ही सर्किट हाउस में एंट्री कर रहा था, तभी महिलाएं गाड़ियों के काफिले की तरफ दौड़ने लगी, लेकिन पुलिस ने रस्सा लगाकर रास्ता रोक रखा था।

महिलाएं चीखती रही, साहब एक बार सीएम से मिलने दो। महिला खूब चिल्लाई, लेकिन उनकी आवाज सीएम तक नहीं पहुंची। पुलिस का बंदोबस्त इतना जबरदस्त था कि महिला पुलिस कर्मियों ने फरियाद लेकर आयी महिलाओं को सर्किट हाउस में नहीं जाने दिया।

इस तरह से महिलाएं विरोध जताने के लिए सड़क पर लेट गई और सिर व पैर सड़क में पटक-पटक कर मारने लगी, जिसके बाद पुलिस कर्मी घबरा गए। अचानक चीख रही थी, तभी माहौल शांत करने के लिए पीड़ित महिलाओं के पास एडीएम सिटी अजय तिवारी पहुंचे और महिलाओं को समझाया। फिर इंस्पेक्टर गंगानगर ऋषिपाल सिंह भी वहां पहुंचे, क्योंकि मामला गंगानगर थाने से संबंधित था।

केस-1: पुलिस लाइन में सीएम से मिलने के लिए पहुंचा मृतक ठेकेदार का परिवार

चार दिन पहले मवाना रोड स्थित नेहरू नगर निवासी पुनित गर्ग ने अपने काम के रुपये मांगने पर पत्थर लगाने वाले ठेकेकदार विपिन कुमार निवासी मुजफ्फरनगर सैनी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। हालांकि शनिवार को गंगानगर पुलिस ने हत्यारोपी पुनित गर्ग को गिरफ्तार कर लिया था और रविवार को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

इसके बावजूद रविवार को पुलिस लाइन पहुंचे सीएम योगी आदित्यनाथ से मिलने के लिए मृतक की पत्नी नीलम अपनी सास संतोष व तीन बच्चों के साथ पहुंची। नीलम ने सीएम से मिलने के लिए खूब हंगामा किया और उसकी सास सड़क पर भी लौट गई, लेकिन पुलिस ने पीड़िता को सीएम से मिलने तक नहीं दिया।

वहीं पीड़िता की मांग थी कि उसे अपने बच्चों का पालन-पोषण करने के लिए एक सरकारी नौकरी व 50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। पीड़िता के पुलिस लाइन गेट के सामने काफी देर तक हंगामा करने के बाद सीएम योगी अपने काफिले के साथ निकल गए। इसके बाद गंगानगर इंस्पेक्टर ऋषिपाल ने किसी तरह पीड़ित परिवार को समझाकर वहां से टरका दिया।

केस-2: नौकरी में बहाली को लेकर सीएम से मिलने पहुंचा युवक, एडीएम सिटी को ज्ञापन सौंपा

गांव रसूलपुर जाहिद निवासी दिनेश कुमार भी सीएम से मिलने के लिए पुलिस लाइन पहुंचा, लेकिन उसे भी सीएम के सुरक्षा घेरे के अंदर तक नहीं जाने दिया गया। हालांकि दिनेश ने सीएम से मिलने का काफी प्रयास किया, लेकिन पुलिस की सख्ती के सामने उसकी एक नहीं चली। अंत में उसने एडीएम सिटी अजय तिवारी को ज्ञापन सौंपकर अपनी बहाली की गुहार लगाई।

पीड़ित दिनेश का कहना था कि वह पीलीभीत में सशस्त्र सीमा बल में तैनात था, लेकिन उस पर झूठे डेलीगेशन लगाकर सस्पेंड किया हुआ था। चार माह से वह लगातार विभागीय अधिकारियों समेत सीएम से मिलने के लिए कई बार प्रयास कर चुका है, लेकिन अभी तक उसे निराशा ही हाथ लगी है।

दिनेश ने बताया कि उसके साथी सभी इंस्पेक्टर बन चुके हैं, लेकिन उसे बहाल तक नहीं किया जा रहा है। जिस कारण उसके सामने अब आर्थिक संकट गहराने लगा और भूखों मरने की नौबत आ गई है। दिनेश के काफी देर तक चिल्लाने के बाद जब उसकी कोई सुनवाई नहीं हो सकी तो एडीएम सिटी वहां पहुंचे और उसका ज्ञापन लेकर सरकार तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।

केस-3: कोरोना संक्रमण से सास की मौत पर सीएम से मिलने पहुंची पीड़िता

सोनी सिंह नाम की एक महिला स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ पुलिस लाइन पर सीएम योगी आदित्यनाथ से शिकायत करने पहुंची, लेकिन पीड़िता को महिला पुलिस ने अपने कब्जे में लेकर महिला थाने में बैठा दिया। जबकि पीड़िता सीएम से मिलकर न्याय की गुहार लगाने के लिए फूट-फूटकर रोती रही। पीड़ित सोनी सिंह का आरोप था कि स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के चलते उसकी सास की मौत हो गई।

उसने शहर के निजी अस्पतालों में भी अपनी सास को बचाने के लिए गुहार लगाई, लेकिन उसकी कोई सुनवाई नहीं हो सकी और न ही उसकी सास को समय पर आॅक्सीजन उपलब्ध कराई गई। पीड़िता स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ शिकायत करने के लिए पुलिसकर्मियों के सामने काफी देर तक गिड़गिड़ाती रही, लेकिन उसे किसी भी अधिकारी से मिलने तक नहीं दिया। सीएम योगी के बिजौली जाने के बाद ही पीड़िता को महिला थाने से छोड़ा गया।

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