- महामंडलेश्वर ने कहा-मदिरालय खुले हैं और मंदिर बंद
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: कोरोना वायरस की दूसरी लहर के चलते सभी धार्मिक स्थलों को बंद करने के निर्देश शासन द्वारा दिए गए थे। ऐसे में लॉकडाउन की शुरुआत से सभी मंदिरों को बंद किया जा चुका है। जिसके चलते श्रद्धालुओं को भी दर्शन नहीं हो रहे हैं। आस्था के द्वार इन दिनों सूने पड़े हैं। जिन मंदिरों में सुबह से शाम तक भक्तों की कतारें देखने को मिलती थीं। उनके सामने में एक भी श्रद्धालु अब दिखाई नहीं देता है।
शहर में कोरोना संक्रमण के हालांत अभी तक सुधरते नजर नहीं आ रहे हैं। वहीं, अन्य बीमारियों ने लोगों को जकड़ लिया है। इस साल लगे लॉकडाउन की शुरुआत में ही शासन द्वारा निर्देश दिए गए थे कि धार्मिक स्थलों में पांच से अधिक श्रद्धालुओं को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। वहीं, इसके कुछ दिनों बाद ही बढ़ते संक्रमण को देखते हुए धार्मिक स्थलों को पूर्णत: बंद करने कर दिया गया था।
ऐसे में शहर के बड़े मंदिर जिनके बाहर तक लंबी कतारे लगी रहती थीं, वहां आज के समय सुनसान खाली पड़ी सड़के ही नजर आती हैं। कैंट स्थित बाबा औघड़नाथ मंदिर, वेस्ट एंड रोड स्थित श्रीबालाजी मंदिर, शास्त्रीनगर स्थित गोल मंदिर, जागृति विहार मंशा देवी मंदिर, सदर स्थित मां काली मंदिर ऐसे मंदिर में जिनमें हर समय श्रद्धालु की भीड़ देखी जाती थी, लेकिन संक्रमण ने आस्था के इन द्वारों को सूना कर दिया है। इन दिनों लोग घर पर बैठकर ही प्रार्थना कर रहे हैं।

मदिरालयों को छूट, मंदिरों को बंद के आदेश: महामंडलेश्वर
अखिल भारतीय पंथ निर्मोही अखाड़े के श्रीश्री 108 महामंडलेश्वर महेंद्रदास ने दैनिक जनवाणी से बात करते हुए कहा कि सरकार द्वारा मदिरालयों को पूरी तरह से छूट दी गई है, लेकिन मंदिरों को बंद करने के निर्देश दिए चुके हैं। कोरोना महामारी को देखते हुए धार्मिक स्थलों को बंद करने के निर्णय को गलत तो नहीं कहा जा सकता है, लेकिन मदिरालयों को खोलकर देवालय बंद किए गए हैं, यह नाइंसाफी है।
शराब के ठेकों पर गाइडलाइन का पालन नहीं होता है और महामारी फैलने का भी खतरा रहता है। जबकि मंदिरों में पूरी व्यवस्था के साथ दर्शन कराए जाते हैं। यदि मंदिरों को खोल दिए जाए और प्रार्थनाएं की जाएं तो महामारी से जल्द ही छुटकारा पाया जा सकता है।

