Tuesday, July 27, 2021
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हर सुबह आते हैं, लौटते है शाम को खाली हाथ

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  • लॉकडाउन के कारण गरीब परिवारों के सामने उत्पन्न हुआ आर्थिक संकट का दौर

विशाल भटनागर |

मेरठ: हालात ऐ बयां क्या करें अपनी मजबूरी का, लॉकडाउन में घंटों काम की तलाश में हर रोज यही पर घंटों का समय काट देते है, लेकिन काम नहीं मिलता। जिससे अब घर का खर्चा चलाना भी मुश्किल हो गया है। वहीं, जिस दुकान से सामान खरीदते थे, उसने भी यह कहकर सामान देने से मना कर दिया है।

जब काम नहीं चल रहा तो उधारी कहा से चुकागेंगे। यह बात मंगलवार को एल-ब्लॉक स्थित मजदूर चौपले पर दिहाड़ी मजदूरों ने जनवाणी की टीम से अपना दर्द बयां करते हुए कही। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा भले ही फ्री में राशन उपलब्ध कराया जा रहा हो, मगर सिर्फ राशन से काम नहीं चलता।

क्योंकि बढ़ती महंगाई एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। सरसों के तेल से लेकर दालों तक के दाम आसमान छू रहे हैं। ऐसे घर का खर्चा कैसे चलाएं। इतना ही नहीं मजदूरों ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति काम पर भी ले जाता है, तो पैसे बहुत कम देता है। क्योंकि बेरोजगारी इतनी है कि सैकड़ों लोग काम के लिए यहां पर इंतजार करते हैं।

राशन कार्ड नहीं, कहा से मिले राशन

दिहाड़ी मजदूर धर्मपाल ने कहा कि कई बार राशन कार्ड के लिए अप्लाई कर दिया। मगर उनका राशन कार्ड भी बनकर नहीं आया ऐसे में वह घर में खाने का इंतजाम कैसे करे। हर रोज इसी आस में मजदूर चौपले पर समय बिताते हैं कि कोई तो उनको काम देने के लिए आएगा।

दरअसल मजदूर चौपले पर दिहाड़ी मजदूरों की लाइन लगी रहती है। लॉकडाउन से मजदूर चौपले पर काफी लोग आते थे, जो मजदूरों को अपने साथ काम पर ले जाते थे। मगर लॉकडाउन के बाद से एक-दो ही मजदूर चौपले पर आते हैं, जो काम पर ले जाने के लिए कहते हैं। जैसे ही कोई आता है तो सभी मजदूर उसी व्यक्ति को घेरकर खड़े हो जाते हैं। कई मजदूर निराश होकर शाम को घर लौट जाते हैं।

लाभ सिर्फ पंजीकृत को

शासन द्वारा गत वर्ष लॉकडाउन के दौरान राहत राशि के रुप में पैसे आवंटित किए थे। जिसमें प्रत्येक मजदूर को एक हजार रुपये दिए गए थे। इसके लिए भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रत्येक मजदूर के फार्म भरवाएं थे। जिसमें से बहुत को ही लाभ मिल पाया था। क्योंकि शासन द्वारा सिर्फ पंजीकृत मजदूरों को लाभ दिया जाता है। बिना पंजीकृत मजदूरों की गिनती नहीं होती।

जिस वजह से काफी बड़ा तबका योजना के लाभ से वचिंत रह जाता है। बता दें कि लॉकडाउन के कारण अधिक्तर कार्य बंद चल रहे हैं। जिसमें सभी मजदूर काम करके अपनी रोजी रोटी का इंतजाम करते थे। ऐसे में सवाल उठता है कि जब शासन द्वारा मनरेगा एवं अन्य प्रकार की योजनाएं मजदूरों के लिए लांच की जाती है। इतना हीं नहीं अलग से सरकार द्वारा राशि भी उपलब्ध करायी जाती है।

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