जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: लोकसभा में महिला आरक्षण कानून में संशोधन और परिसीमन आयोग के गठन से जुड़े तीन विधेयक पेश होने के बाद सियासी माहौल गरमा गया है। इन प्रस्तावित विधेयकों को लेकर संसद में जोरदार हंगामा देखने को मिला, जहां विपक्ष ने इन्हें असंवैधानिक बताते हुए कड़ा विरोध जताया।
कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने इस मुद्दे पर संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी पार्टी पहले ही अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुकी है और अब इसमें कुछ और जोड़ने की जरूरत नहीं है।
इन विधेयकों को केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सदन में पेश किया। प्रस्तावों को लेकर विपक्षी दलों ने एकजुट होकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खर्गे ने साफ कहा कि विपक्ष परिसीमन बिल का एकजुट होकर विरोध करेगा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि विपक्ष संसद को “खराब परिसीमन विधेयकों” के जरिए हाईजैक नहीं होने देगा और लोकतंत्र पर किसी भी हमले के खिलाफ पूरी ताकत से लड़ेगा।
वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण का पूर्ण समर्थन करती है। उन्होंने याद दिलाया कि यह विधेयक 2023 में संसद से सर्वसम्मति से पारित होकर संविधान का हिस्सा बन चुका है।
राहुल गांधी ने सरकार के मौजूदा प्रस्ताव पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह महिला आरक्षण से जुड़ा मुद्दा नहीं, बल्कि परिसीमन और ‘गेरीमैंडरिंग’ के जरिए सत्ता हासिल करने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि गेरीमैंडरिंग का मतलब चुनावी क्षेत्रों की सीमाओं में इस तरह बदलाव करना है, जिससे किसी खास राजनीतिक दल को फायदा मिले।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार जातिगत जनगणना के आंकड़ों को नजरअंदाज कर रही है। कांग्रेस ने साफ किया कि वह ओबीसी, दलित और आदिवासी समुदायों के अधिकारों में किसी भी तरह की कटौती नहीं होने देगी। साथ ही दक्षिण, पूर्वोत्तर, उत्तर-पश्चिम और छोटे राज्यों के साथ किसी भी भेदभाव का विरोध किया जाएगा।
क्या है प्रस्तावित विधेयक?
प्रस्तावित संविधान संशोधन के अनुसार, 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले परिसीमन के बाद लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 तक की जा सकती है। इसका उद्देश्य महिला आरक्षण को प्रभावी ढंग से लागू करना बताया गया है।
इसके अलावा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी 33 प्रतिशत महिला आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए सीटों में बढ़ोतरी का प्रावधान किया गया है। विधेयक में यह भी कहा गया है कि महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में रोटेशन के आधार पर तय की जाएंगी।
फिलहाल, इन विधेयकों को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है और आने वाले दिनों में संसद में इस मुद्दे पर और भी तीखी बहस होने के आसार हैं।

