Wednesday, January 19, 2022
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सरिया की कीमत छू रहा आसमान

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  • मकान का निर्माण करना हुआ महंगा, आम आदमी की पहुंच से बहुत दूर हुआ घर का सपना

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मकान निर्माण की सामग्री के भाव आसमान छू रहे हैं। सरिया का मूल्य एकाएक बढ़ गया है, जिसके चलते मकान निर्माण की कोस्ट बढ़ गयी है। सरिया दो माह पहले तक 3600-3700 रुपये प्रति कुंतल तक बिक रहा था। अब उसका मूल्य बढ़कर 6500 रुपये प्रति कुंतल पर पहुंच गया है। एकाएक बढ़े सरिया के दाम ने लोगों की कमर तोड़ दी है।

अब मकान का निर्माण करना आसान नहीं है। गरीब के लिए मकान बनाना आसान नहीं है। महंगाई की मार सरिया पर ही नहीं है, बल्कि सीमेंट, रोड़ी-डस्ट व ईट के रेट भी लगातार बढ़ रहे हैं। रेत भी उछाल खा गया हैं। इस तरह से मकान निर्माण की कोस्ट लगातार बढ़ रही है, जिसके चलते रियल एस्टेट में भी मकानों की कीमत बिल्डरों ने बढ़ा दी हैं। इस वजह से मकान भी नहीं बिक पा रहे हैं।

बिल्डरों ने नवरात्र में उम्मीद लगाई थी कि रियल एस्टेट में उठान आएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। प्रॉपर्टी की मांग नहीं बढ़ रही है। इक्का-दुक्का ही प्लाट व मकानों के खरीदार आ रहे हैं।

पहले जो मांग मकानों की होती थी, वो धड़ाम हो गयी है। प्राइवेट बिल्डरों के तो मकान बिक ही नहीं रहे, बल्कि मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए) के मकान भी नहीं बिक पा रहे हैं। शताब्दीनगर में समाजवादी आवास निर्माण पर डेढ़ अरब रुपये एमडीए ने खर्च किये थे, जो मकान वर्तमान में नहीं बिक पा रहे हैं।

ये मकान एक तरह से सफेद हाथी साबित हो रहे हैं। ये तो समाजवादी आवासों की हालत है, लेकिन इसी तरह से सैनिक विहार योजना में भी फ्लैट बने हुए हैं, जो नहीं बिक पा रहे हैं। एमडीए बार-बार इनकी नीलामी लगा रहा हैं, लेकिन कोई भी खरीदार नहीं मिल रहे हैं। कहा जा रहा है कि मकानों की ज्यादा कीमत हैं। इसकी वजह निर्माण सामग्री व जमीन की ज्यादा कीमत के चलते मकान की ज्यादा कीमत रखी हैं।

इसी वजह से मकान के खरीदार नहीं मिल रहे हैं। वर्तमान में डस्ट की दर प्रति कुंतल 120 रुपये हैं, जबकि रोड़ी प्रति कुंतल 112 रुपये हैं, जबकि दो वर्ष पहले का रिकॉर्ड उठाकर देखा गया तो डस्ट 70 रुपये प्रति कुंतल बिकी थी। इस तरह से डस्ट की कीमत आसमान छू गई हैं, जो आम आदमी की कमर तोड़ने के लिए काफी हैं।

सरिया जो दो माह पहले तक 3600 रुपये प्रति कुंतल तक बिका है, वो वर्तमान में 6500 रुपये प्रति कुंतल पर पहुंच गया है। निर्माण सामग्री की बढ़ती कीमत आम आदमी को झकझोंर रही है, जिसके चलते मकान का निर्माण करना मुश्किल पैदा कर रहा है और आम आदमी की पहुंच से मकान दूर होता जा रहा है।

एक तरफ तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी प्रत्येक व्यक्ति को घर की छत देने की बात करते हैं, लेकिन जब निर्माण सामग्री मंहगी हो जाएगी तो आम आदमी कैसे मकानों का निर्माण कर पाएगा। रेत के रेट भी बढ़े हैं। दो वर्ष पहले रेत 30 रुपये कुंतल रहा हैं, लेकिन वर्तमान में 60 रुपये प्रति कुंतल बिक रहा है।

इस तरह से महंगाई की मार सर्वाधिक मकान निर्माण सामग्री पर पड़ रही है। फिर डीजल के दाम बढ़ने से भी सामग्री ढुलाई का भाड़ा बढ़ा हैं, जिसके चलते भी सामग्री मंहगी हुई है। फिर रेत की खनन वेस्ट यूपी में ज्यादातर बंद पड़ी हैं। हरियाणा की तरफ की यमुना में रेत खनन चल रही है, बाकी बंद हैं।

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