- राकेश टिकैत का विरोध, धक्का-मुक्की के दौरान उतरी किसान नेता की पगड़ी
- पुलिस ने सुरक्षा घेरा बनाने ने बाद दूसरे गेट का ताला तोड़कर निकाला बाहर\
- किसान नेता ने मंच से ही विरोधियों का दिया जवाब, कहा-इससे बड़ा निकालेंगे ट्रैक्टर मार्च
जनवाणी संवाददाता
मुजफ्फरनगर: कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 25 निर्दोष लोगों की निर्मम हत्या ने जहां पूरे देश को झकझोर दिया, वहीं मुजफ्फरनगर की सड़कों पर शुक्रवार को इसका जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला। 168 हिंदू संगठनों के आने पर आयोजित जन आक्रोश रैली में हजारों की भीड़ उमड़ी, व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे और भगवा झंडों के साथ शहर में जुलूस निकाला गया। लेकिन यह रैली तब राजनीतिक भूचाल में बदल गई जब भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत का विरोध शुरू हो गया। राकेश टिकैत के विरोध के दौरान उनके साथ धक्का-मुक्की की गई और उन्हें मंच से उतारने का प्रयास किया गया। धक्का-मुक्की के दौरान राकेश टिकैत की पगड़ी भी उतर गई।

आक्रोशित भीड़ के इरादे भांप कर पुलिस ने टिकैत को सुरक्षा घेरे में लेते हुए दूसरे गेट का ताला तोड़कर सुरक्षित बाहर निकाला, परन्तु इससे पहले राकेश टिकैत ने मंच से ही विरोधियों को जवाब दिया कि वह इससे बडी भीड़ इसी मैदान में इकट्ठा करेंगे और नफरती सोच के लोगों को करारा जवाब देंगे।
पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पूरे देश में आक्रोश है। इसी के चलते शुक्रवार को 168 हिन्दू संगठनों ने एक विरोध रैली का आह्वान किया था, जिसे व्यापारियों संगठनों का भी पूर्ण समर्थन मिला था। शुक्रवार को टाऊन हॉल के प्रांगण में भारी संख्या में लोग एकत्रित हुए और यहां से एक जुलूस के रूप में निर्धारित मार्ग पर रैली के रूप में मार्च किया जाना था।

मार्च से पहले नेताओं द्वारा भीड़ को सम्बोधित किया जा रहा था। मंच पर किसान नेता व भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत भी मौजूद थे। इस दौरान जब राकेश टिकैत ने सम्बोधित करने का प्रयास किया, तो भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने उनका विरोध शुरु कर दिया और राकेश टिकैत वापस जाओ के नारे लगाने शुरु कर दिये। देखते ही देखते विरोध बढता गया और नौबत धक्का मुक्की तक आ गई। इसी दौरान राकेश टिकैत के सिर की पगड़ी भी नीचे गिर गई, जिसे उनके किसी समर्थक ने उठाकर वापस उनके सिर पर रखा। भीड़ को आक्रामक होता देख पुलिस ने राकेश टिकैत को सुरक्षा घेरे में ले लिया। इस दौरान राकेश टिकैत के समर्थकों ने भी राकेश टिकैत के चारो ओर सुरक्षा घेरा बना लिया था।
इसी बीच राकेश टिकैत दोबारा मंच पर पहुंचे और भारत माता की जय का नारा लगाने के साथ ही उन्होंने विरोध कर रही भीड़ को चेतावनी दी। उन्होंने यहां तक कह डाला कि यहां पर जो भीड़ है, वह हिन्दुस्तानी नहीं, बल्कि नागपुरिया है। उन्होंने कहा कि आज यहां पर सभी लोग आतंकी हमले के खिलाफ और मारे गये लोगों के प्रति शोक संवेदना व्यक्त करने के लिए इकटठा हुए थे, परन्तु कुछ लोग अपनी गंदी मानसिकता के चलते यहां पर भी नफरती सोच को अंजाम दे रहे है। उन्होंने चेतावनी दी कि वह इससे भी भीड़ इसी मैदान में फिर इकटठा करेंगे और विरोधियों को मुंहतोड़ जवाब देंगे।

जब राकेश टिकैत अपनी बात रख रहे थे, उस समय भी भीड़ द्वारा योगी-मोदी के नारे लगाये जा रहे थे। पुलिस ने अपने सुरक्षा घेरे में राकेश टिकैत को मैदान के दूसरे दरवाजे का ताला तोड़कर वहां से बाहर निकाला और उन्हें सुरक्षित उनके आवास तक पहुंचाया। इस घटना के बाद हालांकि भीड़ द्वारा निर्धारित मांर्गोें पर मार्च निकाला गया। इस दौरान भीड़ के हाथों में मशाल, भगवा झंडे व तिरंगे देखने को मिले। जुलूस में शामिल भीड़ द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ नारेबाजी की गई। साथ ही जगह-जगह पर पाकिस्तान के झंडे को पैरों तले रौंदा गया। शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए भीड़ वापस टाउन हॉल पहुंची, जहां पर भीड़ ने देशभक्ति नारे लगाये और इसी के साथ कार्यक्रम का समापन किया।बोले टिकैत : अपमान का दिया जायेगा करारा जवाब
टाउन हॉल मैदान में विरोध व धक्का-मुक्की के बाद राकेश टिकैत ने पत्रकारों से कहा कि मुजफ्फरनगर में भी नागपुर से प्रेरित कुछ लोग यहां के लोगों को मजहब व जात-पात में बांटना चाहते है, जिसे किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने दिया जायेगा। टाउन हॉल मैदान में हुई धक्का-मुक्की ऐसे ही लोगों की सोच है। उन्होंने कहा कि टाउन हॉल में किया गया कार्यक्रम यदि किसी पार्टी विशेष का था, तो उसे पहले ही घोषित किया जाना चाहिए था। पहलगाम मृतकों के नाम पर राजनीति किया जाना कतई ठीक नहीं है। इस तरह की राजनीति करने वालों को भारतीय किसान यूनियन करारा जवाब देना जानती है, जितनी भीड़ इन 168 कथित हिन्दू संगठनों ने मिलकर की है, उससे ज्यादा भीड़ किसान इसी मैदान में करके दिखायेंगे और इस तरह की नफरती सोच के लोगों को करारा जवाब देेंगे।
टिकैत आवास पर बुलाई गई आपात किसान बैठक
मुजफ्फरनगर। इस घटनाक्रम के तुरंत बाद राकेश टिकैत ने अपने आवास पर भारतीय किसान यूनियन के वरिष्ठ पदाधिकारियों और क्षेत्रीय किसानों की एक आपात बैठक बुलाई, जिसमें टाउन हॉल मैदान में हुए पूरे घटनाक्रम को लेकर चर्चा की गई। बैठक में शामिल लोगों का कहना था कि कुछ लोग अपनी राजनीति चमकाना चहाते है, जिसके चलते वह शहर का माहौल खराब करना चाहते है। 2013 के दंगों में भी इसी तरह के लोगों ने अपनी राजनीतिक चाह के चलते जनपद को दंगों का दंश दिया था।
आज जब पूरा देश पहलगाम घटना को लेकर शोकजदा है, ऐसे में भी लोग अपनी राजनीति चमका रहे है और वोट बैंक इकटठा करने की लालसा रखते है, परन्तु आज का नागरिक समझदार है, वह हर चाल समझता है। टाउन हॉल् में राकेश टिकैत के साथ हुआ घटनाक्रम एक सोची-समझी साजिश थी, ताकि लोकप्रिय किसान नेता की छवि को खराब किया जाये और उन्हें अपमानित किया जाये। उन्होंने कहा कि राकेश टिकैत किसानों की शान है। टाउन हॉल में हुआ राकेश टिकैत का अपमान पूरे किसान समाज का अपमान है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जायेगा और इसका मुंहतोड़ जवाब दिया जायेगा।
सियासत गरमाई: नेताओं का टिकैत आवास पर लगा जमावड़ा
मुजफ्फरनगर। टाउन हॉल प्रकरण के बाद एक बार फिर जिले की सियासत गरमाना शुरु हो गई है। एक पक्ष जहां टाउन हॉल में हुए प्रकरण को लेकर आश्वस्त है और राकेश टिकैत के विरोध को सही करार दे रहे है, वहीं दूसरी ओर बड़ा तबका ऐसा भी है, जो इस घटनाक्रम अफसोसजनक बता रहा है। दूसरे पक्ष की माने तो नरेश टिकैत द्वारा पाकिस्तान के पानी बंद करने को लेकर जो बयान दिया गया था, वह मात्र किसानों के प्रति एक सहानुभूति थी, जिसके लिये उन्होंने बाद में माफी भी मांग ली थी।
इसको लेकर टिकैत परिवार की देशभक्ति पर सवाल नहीं उठना चाहिए था। टाउन हॉल के घटनाक्रम के बाद भाकियू अध्यक्ष राकेश टिकैत सरकुलर रोड स्थित राकेश टिकैत के आवास पर पहुंच गये थे। इसी के साथ विभिन्न पार्टियों के राजनेताओं ने भी टिकैत आवास पर पहुंचकर इस पूरे घटनाक्रम की निंदा करते हुए इस सम्मान की लड़ाई में उनका पूरा साथ देने का आश्वासन दिया। टिकैत आवास पहुंचने वालों में सबसे पहले सपा सांसद हरेन्द्र मलिक व सपा जिलाध्यक्ष जिया चौधरी रहे। इसके बाद रालोद विधायक राजपाल बालियान समेत रालोद, सपा व अन्य राजनीतिक दलों के विभिन्न नेताओं ने टिकैत आवास पहुंचकर अपना समर्थन दिया। इसी के साथ राजनेताओं ने यह भी संकेत दिए कि यदि जरूरत पड़ी तो विपक्ष इस मामले को विधानसभा और संसद में भी उठा सकता है।
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