Wednesday, May 13, 2026
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दैनिक जनवाणी विशेष में समझिए, मौद्रिक नीति समिति का बड़ा फैसला कितना अहम

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक अभिनंदन और स्वागत है। आज गुरूवार को आरबीआई यानि भारतीय रिजर्व बैंक ने अपने रेपो रेट में कोई बढ़ोत्तरी नहीं की। मतलब साफ है कि अब ब्याज दर 6.5 प्रतिशत पर स्थिर रहेगी। हालांकि इससे पहले रिजर्व बैंक ने वित्तीय साल 2022—2023 में अपने रेपो रेट में एक—दो बार नहीं पूरे छह बार बढ़ोत्तरी लगातार किया जिससे ब्याज दरों में 2.5 प्रतिशत बढ़ोत्तरी हुई थी। नीतिगत दर पर भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति का फैसला संतुलित और समझदारी भरा है। आइए जानते हैं विशेषज्ञों की राय…

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बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने बताया कि रेपो दर में बदलाव न करने के लिए आम सहमति से लिया गया फैसला नीति का आश्चर्यजनक पहलू है। यह फरवरी की नीति के विपरीत इसके नजरिये में आशावाद की उम्मीद जगाता है। मदन सबनवीस ने कहा कि कुल मिलाकर एक बेहद संतुलित और समझदारी भरा फैसला लिया गया है, जो स्थिरता सुनिश्चित करता है।

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हाउसिंग डॉटकॉम के समूह मुख्य कार्यपालक अधिकारी ध्रुव अग्रवाल ने कहा कि आरबीआई का फैसला आमतौर पर रियल एस्टेट उद्योग और विशेष रूप से घर खरीदारों के लिए एक बड़ी राहत है। उन्होंने कहा कि अगर आरबीआई दर में एक और बढ़ोतरी करता तो ब्याज दरें रिकॉर्ड उच्चस्तर पर पहुंच जातीं, जो आवास क्षेत्र में सकारात्मक भावना को प्रभावित कर सकता था।

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कमोडिटी पार्टिसिपेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीपीएआई) के अध्यक्ष नरिंदर वाधवा ने उम्मीद जताई कि यह ठहराव लंबा चलेगा। उन्होंने कहा कि आरबीआई के इस फैसले से बाजार खुश है।

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IIFL के वाइस प्रेसिडेंट अनुज गुप्ता ने कहा, ‘RBI ने मार्केट में स्थिरता लाने के लिए ये कदम उठाया है। ऐसे में आने वाले दिनों में बाजार में तेजी देखने को मिल सकती है।’

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नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर शिशिर बैजल ने कहा, ‘महंगाई के साथ-साथ रेपो रेट और लेंडिंग रेट में कोई और बढ़ोतरी संभावित रूप से कंज्यूमर्स की खर्च करने की क्षमता को कम कर सकती थी। ऐसा होता तो इसका असर भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ पर पड़ता।’ इकोनॉमिक ग्रोथ की सुस्ती शेयर बाजार पर भी असर डाल सकती थी।

बता दें कि मॉनेटरी पॉलिसी की मीटिंग हर दो महीने में होती है। पिछले वित्त वर्ष की पहली मीटिंग अप्रैल में हुई थी। तब RBI ने रेपो रेट को 4% पर स्थिर रखा था, लेकिन 2 और 3 मई को इमरजेंसी मीटिंग बुलाकर रेपो रेट को 0.40% बढ़ाकर 4.40% कर दिया। 22 मई 2020 के बाद रेपो रेट में ये बदलाव हुआ था।

इसके बाद 6 से 8 जून को हुई मीटिंग में रेपो रेट में 0.50% इजाफा किया। इससे रेपो रेट बढ़कर 4.90% हो गई। फिर अगस्त में इसे 0.50% बढ़ाया गया, जिससे ये 5.40% पर पहुंच गई। सितंबर में ब्याज दरें 5.90% हो गईं। फिर दिसंबर में 6.25% पर पहुंच गईं। इसके बाद फरवरी 2023 में ब्याज दरें 6.50% कर दी गईं थीं। 6 बार दरें बढ़ाने के बाद इसमें बढ़ोतरी रोकी गई है।

…तो इसलिए आरबीआई ने दरें नहीं बढ़ाईं

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आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा, इकोनॉमी में जारी रिकवरी को बरकरार रखने के लिए हमने पॉलिसी रेट में कोई बदलाव नहीं किया है, लेकिन जरूरत पड़ने पर हम स्थिति के हिसाब से कदम उठाएंगे। तमाम ग्लोबल टेंशन के बीच भारत की इकोनॉमी मजबूत बनी हुई है।

इस फैसले से महंगे नहीं होंगे लोन

आरबीआई के पास रेपो रेट के रूप में महंगाई से लड़ने का एक शक्तिशाली टूल है। जब महंगाई बहुत ज्यादा होती है तो, आरबीआई रेपो रेट बढ़ाकर इकोनॉमी में मनी फ्लो को कम करने की कोशिश करता है। रेपो रेट ज्यादा होगा तो बैंकों को आरबीआई से मिलेने वाला कर्ज महंगा होगा। बदले में बैंक अपने ग्राहकों के लिए लोन महंगा कर देते हैं। इससे इकोनॉमी में मनी फ्लो कम होता है। मनी फ्लो कम होता है तो डिमांड में कमी आती है और महंगाई घट जाती है।

इसी तरह जब इकोनॉमी बुरे दौर से गुजरती है तो रिकवरी के लिए मनी फ्लो बढ़ाने की जरूरत पड़ती है। ऐसे में आरबीआई रेपो रेट कम कर देता है। इससे बैंकों को आरबीआई से मिलने वाला कर्ज सस्ता हो जाता है और ग्राहकों को भी सस्ती दर पर लोन मिलता है। इस उदाहरण से समझते हैं। कोरोना काल में जब इकोनॉमिक एक्टिविटी ठप हो गई थीं तो डिमांड में कमी आई थी। ऐसे में आरबीआई ने ब्याज दरों को कम करके इकोनॉमी में मनी फ्लो को बढ़ाया था।

शेयर बाजार में स्थिरता, रियल्टी कंपनियों को मिलेगा लाभ

आरबीआई के इस फैसले के बाद सरकारी बैंकों और रियल्टी शेयरों में तेजी देखने को मिली। पंजाब नेशनल बैंक का शेयर करीब 2 प्रतिशत तो बैंक ऑफ महाराष्ट्र, भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक में 1 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी दिखी।

महंगाई से मिलेगी राहत!

आरबीआई ने आज अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में महंगाई के अनुमान में कटौती की जानकारी दी है। यानी आने वाले दिनों में महंगाई से राहत मिल सकती है। वहीं वायसरॉय प्रॉपर्टीज के फाउंडर और मैनेजिंग पार्टनर साइरस मोदी के मुताबिक, इकोनॉमी में सुधार के संकेत दिख रहे हैं लेकिन सेंट्रल बैंक महंगाई को काबू में रखना चाहता है।

ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि आगे चलकर आरबीआई इस स्तर पर दरों को रोक देगा और कैलेंडर ईयर 2025 से दरों को कम करना शुरू कर देगा। सेंट्रल बैंक का लक्ष्य ग्रोथ रेट और महंगाई के बीच संतुलन बनाना है। हमें उम्मीद है कि एक रेगुलर मानसून ईयर महंगाई को कम करने में मदद करेगा जिससे ब्याज दरों में कमी आएगी।

आरबीआई के टारगेट से ऊपर बनी हुई है महंगाई

आरबीआई गवर्नर ने महंगाई को लेकर कहा कि ये अभी भी महंगाई आरबीआई के टारगेट के ऊपर बनी हुई है। आरबीआई गवर्नर ने भारत के बैंकिंग और एनबीएफसी सेक्टर को बहुत मजबूत बताया। उन्होंने बेहतर रबी फसल से ग्रामीण मांग में सुधार की उम्मीद भी जताई।

रुपए को लेकर आरबीआई गवर्नर ने कहा कि 2022 में रुपए की चाल काफी व्यवस्थित रही है और 2023 में भी इसके बरकरार रहने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि रुपए की स्थिरता और मजबूती को बनाए रखने पर RBI का लगातार फोकस है।

क्या कहते हैं महंगाई के आंकड़े?

फरवरी में रिटेल महंगाई 6.44 प्रतिशत

देश में फरवरी महीने में रिटेल महंगाई घटकर 6.44 प्रतिशत पर आ गई है। जनवरी 2023 में यह तीन महीनों के उच्च स्तर 6.52 प्रतिशत और दिसंबर 2022 में 5.72 प्रतिशत पर रही थी। तीन महीने पहले नवंबर 2022 में रिटेल महंगाई 5.88 प्रतिशत थी। पिछले साल फरवरी 2022 में यह 6.07 प्रतिशत रही थी।

3.85 प्रतिशत रही थी थोक महंगाई दर

थोक महंगाई दर फरवरी में घटकर 3.85 प्रतिशत आ गई है। यह 25 महीने का निचला स्तर है। जनवरी 2023 में थोक महंगाई दर 4.73 प्रतिशत रही थी। दिसंबर में थोक महंगाई दर 4.95 प्रतिशत रही थी। आलू, प्याज, फ्यूल जैसे आइटम के सस्ते होने से महंगाई में ये गिरावट आई है।

कैसे प्रभावित करती है महंगाई?

महंगाई का सीधा संबंध पर्चेजिंग पावर से है। उदाहरण के लिए, यदि महंगाई दर 7 प्रतिशत है, तो अर्जित किए गए 100 रुपए का मूल्य सिर्फ 93 रुपए होगा। इसलिए, महंगाई को देखते हुए ही निवेश करना चाहिए। नहीं तो आपके पैसे की वैल्यू कम हो जाएगी।

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