- किसी आतंकवादी या असामाजिक तत्व ने तो नहीं लगाई आग
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: असम से मेरठ इंडियन आयल कंपनी के लिए पेट्रोल लेकर आई एक मालगाड़ी के एक टैंकर में ऊपरी ढक्कन पर आग कैसे लगी, यह बड़ा सवाल है। लोग इसके पीछे किसी आतंकवादी या असामाजिक तत्वों द्वारा स्टेशन को उड़ाने की साजिश होने की आशंका जता रहे हैं। हालांकि रेलवे के अधिकारी इससे इंकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि आग भीषण गर्मी के चलते टैंकर में आग लगने की अशांका जता रहे हैं। फिलहाल रेलवे के अधिकारी जांच में जुटे हैं। वहीं, दूसरी ओर इस घटना से टैंकर या रेलवे को कोई नुकसान न होने से मामले की रिपोर्ट भी दर्ज नहीं की गई।
असम के जलपाईगुड़ी से इंडियन आयल कंपनी का 48 टैंकरों में करीब 35 लाख लीटर पेट्रोल लेकर मेरठ आई एक मालगाड़ी शनिवार की दोपहर सिटी स्टेशन के यार्ड में अचानक आग लगने से प्रत्यक्षदर्शी सहमे नजर आए। टैंकर में 72 हजार लीटर पेट्रोल और मालगाड़ी में करीब 35 लाख लीटर पेट्रोल होने की बात सुनकर स्टेशन पर मौजूद यात्रियों ने आशंका जताई कि यह किसी आतंकवादी या असामाजिक तत्व की हरकत हो सकती है। आतंकवादी या असामाजिक तत्वों की मंशा टैंकर में आग लगाकर स्टेशन को उड़ाने की हो सकती है, इतने पेट्रोल से स्टेशन के साथ-साथ आसपास के क्षेत्र में भी भारी जन और संपत्ति की हानि हो सकती थी और यही वे चाहते होंगे,
लेकिन रेलवे के अधिकारियों व लोको पायलेट, गार्ड आदि स्टाफ की सूझबूझ से वे अपने मकसद में कामयाब नहीं सके। देर रात तक रेलवे के लोको पायलेट प्रभारी यादवेन्द्र सिंह, आरपीएफ के इंस्पेक्टर योगेश कुमार अपने स्तर से घटना की जांच कर रहे हैं। लोको पायलेट प्रभारी ने उक्त मालगाड़ी के लोको पायलेट के बयान दर्ज किए। लोको पायलेट की ओर से आरपीएफ के इंस्पेक्टर को घटना की लिखित तहरीर भी दी। समाचार लिखे जाने तक आग लगने का कारण पता नहीं चल सका। हालांकि रेलवे अधिकारी किसी व्यक्ति द्वारा टैंकर में आग लगाने से इंकार किया जा रहा है।
आरपीएफ के इंस्पेक्टर योगेश भाटी का कहना है कि यार्ड में टैंकर में आग लगाना संभव नहीं, क्योंकि टैंकर के ऊपर ढक्कन में आग लगी, उससे थोड़ी से ऊंचाई पर 25 हजार वोल्ट करंट के बिजली के ओएचई वायर की लाइन है, जिनसे इलेक्ट्रिक ट्रेनों का संचालन होता है। यदि कोई आग लगाने की कोशिश करता तो वह करंट की चपेट में आ जाता। उनका कहना है कि संभवत टैंकर का ढक्कन लूज होने पर भीषण गर्मी के चलते टैंकर में अपने आप आग लग गई।
यार्ड में नहीं आग बुझाने के उचित प्रबंध
सिटी स्टेशन के यार्ड में आग बुझाने के उचित प्रबंध नहीं हैं। यहां ट्रेनों की धुलाई के लिए वाशिंग लाइन है, लेकिन उसका प्रेशर फायर ब्रिगेड के गाड़ी में लगे पंप की तरह तेज नहीं है। स्टेशन के यार्ड तक फायरब्रिगेड के आसानी से पहुंचने की भी उचित व्यवस्था नहीं है। रेलवे आग बुझाने के लिए फायरब्रिगेड पर निर्भर है। यदि किसी ट्रेन में आग लग जाए तो स्टेशन पर उपलब्ध सुविधाओं से मिनटों में काबू पानी संभव नहीं है।

