Wednesday, April 29, 2026
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1984 के दंगे: सिख विरोधी दंगे के आरोपी को अलीपुर से किया गिरफ्तार

  • एसआईटी की टीम ने सरधना के अलीपुर गांव में दी दबिश
  • सुबह सवेरे पकड़ कर ले गई कानपुर की एसआईटी
  • 38 साल बाद कार्रवाई से मचा हड़कंप

जनवाणी संवाददाता |

सरधना: वर्ष 1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए सिख विरोधी दंगों में एसआईटी यानी विशेष जांच दल ने बड़ी कार्रवाई की है। सरधना के अलीपुर गांव से टीम ने दंगे के एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। सुबह सवेरे पहुंची टीम आनन-फानन में आरोपी को पकड़ कर कानपुर ले गई। करीब 38 साल बाद हुई कार्रवाई से पकड़े गए राजबीर के परिजनों में भी हड़कंप मचा हुआ है।

वहीं राजबीर के परिजनों ने उसे निर्दोष बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। बता दें कि दंगों के दौरान राजबीर परिवार समेत कानपुर में ही रहता था। दंगे के आरोप में वह करीब 30 दिन तक जेल में बंद रहा था। वर्ष 1998 में राजबीर ने कानपुर छोड़ दिया था और हमेशा के लिए वापस अपने पैतृक गांव अलीपुर में आकर बस गया था।

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सरधना के अलीपुर गांव निवासी राजबीर की पत्नी राजेश्वरी ने बताया कि सोमवार की सुबह करीब छह बजे पुलिस उनके घर पहुंची और आनन फानन में उनके पति को उठाकर अपने साथ ले गई। पूछने पर उन्होंने कानपुर के किदवाईनगर थाना पहुंचने की बात कही। अब उन्हें पता चल रहा है कि राजबीर को एसआईटी की टीम ने 1984 के दंगे के आरोप में उठाया है।

राजेश्वरी आगे बताती हैं कि दंगे के दौरान वह कानपुर में ही रहते थे। दंगे के अगले दिन पुलिस उनके पति को उठाकर ले गई थी। करीब 30 दिन जेल में रखने के बाद उनके पति को छोड़ दिया गया था। इसके बाद कोई तारीख या नोटिस जैसी बात नहीं रही। करीब 38 साल में किसी तरह की कोई पूछताछ या पुलिस कार्रवाई की बात सामने नहीं आई।

मगर अब अचानक से पुलिस ने उनके पति को उठाकर ले गई है। जिससे उनके परिवार का बुरा हाल है। राजबीर के परिवार ने उसे निर्दोष बताते हुए सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए न्याय की गुहार लगाई है। वहीं कानपुर से आई एसआईटी की इस कार्रवाई से स्थानीय पुलिस भी अंजान है।

क्या है पूरा मामला?

राजबीर की पत्नी राजेश्वरी बताती हैं कि करीब 1980 से वह कानपुर के जूही गौशाला रोड पर रहते थे। अलीपुर गांव में हैंडपंप के वाल बनाए जाते हैं। राजबीर कानपुर में उसी का व्यापार करता था। पूर्व प्रधानमंत्री की हत्या से एक दिन पहले ही राजबीर मेरठ से कानपुर पहुंचा था। अगले दिन दंगे हो गए थे। उनका कहना है कि जिस बस्ती में वह रहते थे, पुलिस ने अचानक से दबिश देकर सैंकड़ों की तादाद में पकड़ कर ले गई थी।

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30 दिन जेल में रहने के बाद सभी को छोड़ दिया गया था। उसके बाद कोई कागजी कार्रवाई या अन्य कार्रवाई नहीं हुई थी। वर्ष 1998 में बीमारी के चलते राजबीर ने कानपुर छोड़ दिया था और वापस अलीपुर में आकर रहने लगा था। तभी से राजबीर परिवार समेत अलीपुर में ही रहता है।

कैसे शुरू हुई फिर से जांच?

सरकार द्वारा वर्ष 2019 में दंगों की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था। जिसके तहत दंगों से जुडे सात मामलों को फिर से खोलने का फैसला किया गया। जिनमें काफी आरोपी रिहा हो गए था या कुछ मुकदमे बंद कर दिए गए थे। इस विशेष जांच दल द्वारा अभी तक 94 लोगों की पहचान की गई है।

जिनमें से 74 लोग अभी जिंदा हैं। मामले में एसआईटी द्वारा विभिन्न शहरों में दबिश देकर आरोपियों को गिरफ्तार कर रही है। इसी क्रम में अलीपुर गांव में दबिश देकर राजबीर को गिरफ्तार किया गया है। हालांकि स्थानीय पुलिस अधिकारी इस बात की पुष्टि नहीं कर रहे हैं।

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