Sunday, May 16, 2021
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जिपं सदस्य पद के 451 प्रत्याशी मैदान में

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  • 64 उम्मीदवारों ने नाम लिया वापस, सभी को चुनाव चिह्न किए आवंटित
  • तीसरे चरण में 26 अप्रैल को होगा मतदान

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: जिला पंचायत सदस्य पद के लिये नाम वापसी के साथ-साथ चुनाव चिह्न आवंटन की प्रक्रिया भी रविवार को समाप्त हो गई। अब जिला पंचायत सदस्य पद के लिये 451 प्रत्याशी मैदान में है। रविवार को सभी प्रत्याशियों को चुनाव चिह्न आवंटित कर दिये गये हैं। इससे पूर्व कुल 33 वार्डों में 64 उम्मीदवारों ने अपना नाम चुनाव से वापस लिया। इस दौरान काफी संख्या में लोगों की भीड़ लगी रही।

मेरठ में त्रिस्तरीय पंचायती चुनाव को अब कुछ ही समय बचा है। यहां तीसरे चरण में 26 अप्रैल को मतदान होना है। मतदान से पूर्व की सभी प्रक्रियाएं लगभग पूरी हो चुकि है। नामांकन प्रक्रिया समाप्त हो चुकि है सभी प्रत्याशियों को चुनाव चिह्न भी आवंटित हो चुके हैं। रविवार को चुनाव चिह्न आवंट की प्रक्रिया पूरी हुई।

बता दें कि रविवार को सुबह पहले नाम वापसी का मौका उम्मीरवारों को दिया गया था। कुल 64 उम्मीदवारों ने नाम वापस लिया। इस दौरान वार्ड-एक से 2, वार्ड-तीन से 2, वार्ड-चार से 2, छह से 2, सात से 1, दस से 1, ग्यारह से 2, बारह से 3, तेरह से 4, चौदह से 3, पंद्रह से 4, सोलह से 3, सत्रह से 3, अट्ठाहर से 2, उन्नीस से 4, बीस से 2, इक्कीस से 4, तेईस से 3, चौबीस से 1, पच्चीस से 1, छब्बीस से 1, अटठाईस से 5, उन्नतीस से 2, तीस से 4, इक्कतीस से 2, बत्तीस से 1 उम्मीदवार ने नाम वापस लिया। नाम वापसी लिये जाने के बाद अब कुल 451 उम्मीदवार चुनाव मैदान में है।

नाम वापसी की प्रक्रिया के बाद सभी उम्मीदवारों को चुनाव चिह्न आवंटित किये गये। कलक्ट्रेट में जहां नामांकन हुआ वहीं पर नाम वापसी और चुनाव चिह्न आंवटित किये गये। इस दौरान काफी संख्या में भीड़ भी एकत्रि हुई। जिसे लेकर काफी देरी तक कार्य चलता रहा।

इस दौरान वार्ड 21 से नामांकन करने वाले रविन्द्र गुर्जर ने वार्ड भाजपा प्रत्याशी ऋषि त्यागी के समर्थन में नाम वापस लिया। इस दौरान विधायक सत्यवीर त्यागी, सांसद प्रतिनिधि, उम्मीदवार ऋषि त्यागी ने उनका नामांकन वापस कराया।

सोशल मीडिया पर प्रचार शुरू, किसी को कुल्हाड़ी तो किसी को कप प्लेट का मिला निशान

चुनाव चिह्न आंवटित होते ही प्रत्याशियों ने चुनाव प्रचार की योजना बनानी शुरू कर दी है। ज्यादातर प्रत्याशियों ने तो सॉशल मीडिया के माध्यम से प्रचार भी शुरू कर दिया है। बता दें कि मतदान को मात्र एक सप्ताह शेष है। प्रत्याशियों के पास भी प्रचार के लिये ज्यादा समय नहीं बचा है। ऐसे में उन्हें कोविड की गाइडलाइन का भी पालन करना होगा। ऐसा नहीं हुआ तो उनके ऊपर कार्रवाई तक की जा सकती है।

बता दें कि यहां 26 अप्रैल को चुनाव होना है। 26 अप्रैल को मात्र एक सप्ताह शेष है। रविवार को चुनाव चिह्न आवंटित होने की प्रक्रिया समाप्त हुई है। ऐसे में उम्मीदवारों के पास अब बस मात्र एक सप्ताह ही शेष बचा है। रविवार को चुनाव चिह्न आवंटित होते ही कुछ प्रत्याशियों ने तो फेसबुक और इंस्टाग्राम पर प्रचार तक शुरू कर दिया है। लोग अपने चुनाव चिह्न के साथ फोटो डालकर प्रचार कर रहे हैं।

बता दें कि रविवार को चुनाव चिह्न आवंटित हुए। जिनमें कुल्हाड़ी, छाता, छड़ी, टेलीफोन, कुल्हाड़ी, गमला, खजूर, क्रेन, आरी, उगता सूरज, केतली, कलम दवात, कैंची, गिटार, घुड़सवार, कप प्लेट, टीवी व ट्रैक्टर आदि चुनाव चिह्न आवंटित किये गये हैं।

मीनाक्षी का चुनाव चिह्न आवंटन से पहले ही सोशल साइट पर डालने की चर्चा

नाम वापसी और चुनाव चिह्न आवंटन प्रक्रिया के दौरान काफी हंगामा भी हुआ। इस दौरान एसडीएम कोर्ट के बाहर काफी भीड़ लगी रही। यहां न तो भीड़ को संभालने वाला कोई था और न ही कोरोना की गाइडलाइन का पालन करने वाला कोई था। भीड़ हंगामा करती रही और अधिकारी और कर्मचारी शांत खड़े रहे।

बता दें कि रविवार को चुनाव चिह्न आंवटन प्रक्रिया के दौरान काफी हंगामा हुआ। यहां वार्ड-13 से जिला पंचायत सदस्य उम्मीदवार पर लोगों ने आरोप लगाया कि उन्हें चुनाव चिह्न तय समय से पहले ही आवंटित कर दिया गया। सुबह से ही उम्मीदवार की सोशल साइट्स पर चुनाव चिह्न वायरल होता रहा। इसे लेकर यहां लोगों ने एसडीएम सदर कोर्ट में हंगामा काटा। इस दौरान मौजूद पुलिस बल ने लोगों को समझाकर कोर्ट से बाहर निकाला।

भीड़ द्वारा हंगामा किए जाने के कारण आवंटन प्रक्रिया का कार्य काफी देर तक बाधित हुआ। जिसके कारण अन्य लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। आवंटन का कार्य यहां देरी तक चलता रहा है। उधर, एआरओ अनिल कुमार ने बताया चुनाव चिह्न पहले से आवंटित किए जाने की अफवाह फैली थी। पहले से किसी को चुनाव चिह्न आवंटित नहीं किया गया है। बिना वजह ही लोग शोर-शराबा करने लगे थे। जिन्हें समझाकर शांत किया गया।

गुटबाजी के चलते सपा प्रत्याशियों को नुकसान

सपा में गुटबाजी चरम पर है। पंचायत चुनाव में जो प्रत्याशी जिला पंचायत पद के लिए चुनाव मैदान में हैं, उनको भी पार्टी में चल रही गुटबाजी का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल, पार्टी स्तर से जिला पंचायत पद के लिए प्रत्याशियों की घोषणा की गई है।

जिनको प्रत्याशी बनाया गया है, उनके प्रचार में सपा के तमाम नेताओं को जाना चाहिए, मगर सपा नेता प्रचार से कन्नी काट रहे हैं। जब पार्टी ने प्रत्याशी घोषित किये है तो प्रचार क्यों नहीं किया जा रहा है? इस तरह से सपा प्रत्याशियों की चुनाव मैदान में स्थिति खराब हो जाएगी। वार्ड-10 सरधना विधानसभा का हिस्सा हैं। यहां से विजय राठी को सपा ने प्रत्याशी बनाया है, लेकिन उनका प्रचार करने सपा नेता अतुल प्रधान नहीं जा रहे हैं।

विजय राठी को दूसरे गुट का माना जाता है, जिसके चलते सरधना के चेयरमैन पति निजाम अंसारी भी सपा प्रत्याशी से बगावत कर शादाब खान को चुनाव लड़ा रहे हैं। इसी वजह से विजय राठी की स्थिति मजबूत नहीं हो पा रही है। वार्ड-13 में सपा ने प्रत्याशी ही घोषित नहीं किया है।

वार्ड-11 से विनोद ठाकुर सपा से चुनाव मैदान में हैं, जहां सपा के नेता चुनाव लड़ाने नहीं जा रहे हैं। यह क्षेत्र भी सरधना विधानसभा का हिस्सा है। यहां भी गुटबाजी चरम पर है। यही वजह है कि विनोद की इस बार हालत पतली है। गुटबाजी के चलते उनका चुनाव गति नहीं पकड़ पा रहा है।

कई वार्ड ऐसे है, जहां पूर्व कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर चुनाव प्रचार कर रहे हैं, लेकिन वह भी अपने समर्थकों के चुनाव में ही जा रहे हैं, बाकी दूसरे ग्रुप के प्रत्याशियों के चुनाव प्रचार से कन्नी काट रहे हैं। इस तरह से जिला पंचायत चुनाव में सपा प्रत्याशियों को पहले अपनी ही पार्टी के नेताओं के विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

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